कैसे सहे निजी विमानन कंपनियों का अत्याचार

Total Views : 1,957
Zoom In Zoom Out Read Later Print

बेंगलूरु, (परिवर्तन)। आकाश मेहता (बदला हुआ नाम) अपने परिवार के साथ किसी काम से कोलकाता पहुंचे थे। उन्होंने कोलकाता से वापसी में अपने परिवार के साथ निजी विमानन कंपनी एयर एशिया की फ्लाइट की टिकिट बुक की।

आकाश जब कोलकाता एयरपोर्ट में एयर एशिया के काउंटर पर पहुंचे तो विमानन कंपनी के ग्राउंड स्टाफ के व्यवहार से वे दंग रह गए। दरअसल हुआ यूं कि जब आकाश ने एयर एशिया के स्टाफ से अपने परिवार के लिए बोर्डिंग पास की मांग की तो उन्होंने परिवार के पांच सदस्यों के लिए अलग-अलग सीट दे दी। आकाश ने स्टाफ से इस मामले में आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे बच्चें अभी छोटे हैं, वे अकेले बैठ नहीं पाएंगे, इसीलिए आप उनकी सीट हमारे साथ ही दें। एयर एशिया के स्टाफ ने आक्रोशित आवाज़ में उनसे कहा कि एक साथ सीटों का आवंटन संभव नहीं है। यह सुन कर आकाश भी उत्तेजित हो गए उन्होंने इसका कारण जानना चाहा। स्टाफ ने उन्हें बिना कारण के केवल इतना ही बताया कि सर, परिवार के साथ यानि एक साथ पांच सीटों का आवंटन (एलॉटमेंट) संभव नहीं है। इस बात के बावजूद आकाश ने उनसे साथ में सीट देने का आग्रह किया।

सीट के लिए आग्रह करते और उन्हें अग्रेषित होता देख स्टाफ ने उन्हें परिवार के साथ बैठने का एक अन्य उपाय बताया, जिसे सुनकर आकाश दंग रह गए। एयर एशिया के स्टाफ ने उनसे कहा कि अगर आप अपने परिवार के साथ इकट्ठे यानि एक ही रो (पंक्ति) में बैठना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 250 रुपए प्रति सीट के हिसाब से भुगतान करना पड़ेगा। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और इसकी वजह जाननी चाही तो स्टाफ ने बताया कि यह कंपनी की पॉलिसी है, इसके अतिरिक्त वे कुछ नहीं कर सकते।

फ्लाइट में बोर्डिंग होने के बाद आकाश ने ये महसूस किया कि फ्लाइट में उनके आस-पास की सभी पक्तिंया खाली थी। उन्होंने फ्लाइट में मौजूद स्टाफ से भी इस बारे में बात करनी चाही तो उन्होंने भी आकाश को एक ही जवाब दिया कि प्रत्येक सीट के उन्हें अतिरिक्त 250 रुपए देने पड़ेंगे। हालांकि ऐसी ही हालत में उन्हें एयर एशिया की फ्लाइट से बेंगलूरु आना पड़ा।

इस घटना के बाद बेंगलूरु वापस आकर आकाश ने मामले की एक शिकायत करनी चाही। उन्होंने इंटरनेट पर एयर एशिया के स्थानीय दफ्तर का पता निकाला। जब आकाश एयर एशिया के दफ्तर पहुंचे तो ऑफिस में मौजूद अधिकारियों ने मामले पर किसी भी प्रकार की बातचीत करने या शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया। अंत में आकाश ने समाचार परिवर्तन अखबार को घटना की पूरी कहानी बताई। समाचार परिवर्तन ने जब एयर एशिया के दफ्तर में संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी इस ऑफिस में नहीं बैठते हैं। यह कहते हुए उन्होंने एक के बाद एक करीब चार अलग - अलग नंबर दिए और उनसे बात करने की सलाह दी। अंत में किसी नवीन नाम के अधिकारी ने आकाश को रोहित का नंबर दिया और उनसे बात करने को कहा। रोहित से बात करने पर पता चला कि रोहित एयर एशिया का कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक सामान्य कर्मचारी है। परिवर्तन के संपादक ने जब रोहित को फोन पर एयर एशिया के फ्लाइट में आकाश के साथ हुए इस दुर्व्यवहार की घटना की जानकारी दी तो यह सुनकर वे ऐसे चौंके मानो उन्हेंं विमानन कंपनी की इस पॉलिसी को लेकर कोई जानकारी ही नहीं है। अखबार के संपादक की बात सुनकर रोहित ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस मामले को लेकर अपने अन्य अधिकारियों से बात करेंगे और बात में उन्हें सारी जानकारी देंगे। हालांकि इस बात को हुए एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन अब तक एयर एशिया की ओर से किसी प्रकार का कोई जानकारी नहीं दी गई। इस मामले में एयर एशिया के कर्मचारियों का व्यवहार अत्यंत उदासीन और असंतोषजनक रहा।

नागरिक उड्डयन विभाग कोई एक्शन लें

यात्रा साधनों को खास यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया है लेकिन अगर यात्री ही न खुश हो तो इन सुविधाओं का क्या फायदा? आकाश मेहता को एयर एशिया की फ्लाइट पर जिस असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा उसका क्या? सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग को इस मामले को संज्ञान में लेकर मनमानी करने वाली सभी निजी विमानन कंपनियों पर कार्यवाही करनी चाहिए। समझने वाली बात बस इतनी है कि एक साधारण और मध्यम वर्गिय व्यक्ति जब इतने पैसे देकर फ्लाइट में यात्रा करने का निर्णय लेता है तो उसे विमानन कंपनियों के इस प्रकार पैसे कमाने के फॉर्मूले का पता नहीं होता। सबसे बड़ी बात यह भी है कि जब कोई व्य़क्ति अपने परिवार के साथ खासकर बच्चों के साथ ट्रैवल करता है तो उन्हें इस प्रकार की परेशानियों का अनुमान पहले से नहीं लगता। सरकार को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए और आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो इसीलिए निजी विमानन कंपनियों की हर पॉलिसी एवं फैसलें पर पैनी नज़र रखना चाहिए। जानकारों का मानना है कि ऐसी घटनाएं  केवल एक ही उपाय से रोकी जा सकती है, विमानन कंपनियों के खिलाफ शिकायत प्राप्त होने पर सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा उनके खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाना चाहिए। मुश्किल की बात तो यह भी है कि आज के समय में कोई भी आम व्यक्ति अपनी शिकायतों का पिटारा लेकर पुलिस के पास जाना नहीं चाहता। उनका कहना है कि पुलिस से मदद मांगने तो हम चले जाते हैं लेकिन पुलिस अधिकारी मदद के बदले जो मांग कर बैठते हैं, उसी डर से लोगों ने अब पुलिस के पास जाना छोड़ दिया।

See More

Latest Photos