साक्षात्कार : ज्वेल्स ऑफ कर्नाटक पुस्तक से : सुभाष बंसल

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कर्नाटक के रत्नों का सम्मान करने के उद्देश्य से परिवर्तन समाचार पत्र द्वारा ज्वेल्स ऑफ कर्नाटक नामक पुस्तक का विमोचन किया जाना है। लेकिन इससे पहले हम राज्य के प्रत्येक रत्नों के व्यक्तिगत उपलब्धियों के बारे में और उनकी सफलता की कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं। आज के अंक में बेंगलुरु के प्रसिद्ध व्यवसायी और समाजसेवी सुभाष बंसल की उपलब्धियों और सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के बारे बताया जा रहा है। संस्कारों और आदर्शों से आगे बढ़ेगा समाज

बेंगलूरु, (परिवर्तन)। देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसी तेजी से हम भी निरंतर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इस भाग-दौड़ में कहीं हम अपने संस्कारों को पीछे न छोड़ दें। मेरा मानना है कि हम आने वाली पीढ़ी को हमारे पूर्वजों द्वारा दिए गए संस्कारों और आदर्श सीखा सकते हैं। इस प्रकार से अत्याधुनिकता के साथ ही साथ संस्कार और आदर्श भी सालों साल आगे बढ़ते रहेंगे। उक्त बातें शहर के जाने माने व्यवस्यायी और समाजसेवी सुभाष बंसल ने कहीं। वे बताते हैं कि संस्कारों और आदर्शों से ही समाज आगे बढ़ता है, और समाज के आगे बढऩे से देश का विकास होता है। इसीलिए युवाओं को अपने पूर्वजों द्वारा बताए गए संस्कारों और आदर्शों का ज्ञान होना चाहिए।
अपने उदार मन के लिए पहचाने जाने वाले सुभाष बंसल बताते हैं कि एकता केवल एक शब्द नहीं है, अपितु यह अपने आप में एक परिभाषा है। यह परिभाषा है जिससे न केवल समाज का विकास होता है, बल्कि व्यवसाय का विकास होता है। जो भी व्यक्ति एकता के बल को समझ पाता है सफलता उसके कदम अवश्य चूमती है। 
सुभाष जी के छोटे से परिवार में उनके अलावा, उनकी पत्नी कांता बंसल, बेटा हेमंत बंसल, बेटी निधि बंसल और पुत्रवधु रूचिका बंसल हैं। सुभाष जी के बेटे हेमंत ने अपनी पढ़ाई जैन कॉलेज, बेंगलूरु से पूरी की और अब व्यवसाय में अपने पिताजी का हाथ बटाते हैं। सुभाष जी बताते हैं बेटी निधि ने भी अपनी पढ़ाई जैन कॉलेज, बेंगलूरु से पूरी की है।
मूल रूप से हरियाणा के निवासी सुभाष बंसल का जन्म 6 मई 1965 में हिसार में हुआ। उन्होंने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई वहीं से पूरी की। वे बताते हैं कि व्यवसाय विस्तार के उद्देश्य से वर्ष 1985 में कोलकाता आना हुआ, जहां कई सालों तक कड़ी मेहनत और परिश्रम के बदौलत अपने व्यवसाय को स्थापित करने में कामयाब हुए। वे बताते हैं कि दक्षिणी राज्यों में अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए वे वर्ष 1992 में पूरे परिवार समेत बेंगलूरु आए और यहीं बस गए। बेंगलूरु में उन्होंने कोलकाता पाइप फिटिंग कम्पनी की स्थापना की। बेंगलूरु के अलावा सुभाष जी ने अपने व्यवसाय का विस्तार आंध्र प्रदेश के विशाकापट्टनम समेत अन्य कई शहरों में किया है। शुरुआत से ही सामाजिक कार्यों में रूचि होने की वजह से सुभाष जी बेंगलूरु में कई स्थानीय समाजिक कार्यों में योगदान देने लगे। वे इस बीच कई संस्थाओं, संघों और संगठनों से जुड़े। सुभाष जी बताते हैं मनुष्यों में मानव प्रेम की भावना बेहद जरूरी होती है। इससे न केवल मन की शांति मिलती है बल्कि जरूरतमंद लोगों को आपकी मदद भी मिलती है। सेहत को जीवन का बड़ा धन मानने वाले सुभाष जी कहते हैं विभिन्न कार्यों के बीच लोगों को अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना चाहिए। इससे मन प्रसन्न होगा और कार्यों को करने में रूचि बढ़ेगी। रोजाना समय पर उठना, नियमित कार्य करना एवं स्वस्थ भोजन करना सुभाष जी के दिनचर्ये में शामिल है।
किस किस संस्था एवं समाज से हैं जुड़े
अग्रसेन अस्पताल
स्वस्तिक सेवा ट्रस्ट
श्याम मंडल सेवा ट्रस्ट
हरियाणा भवन
दक्षिण भारत अग्रवाल समाज
अग्रवाल युवा संघ
अग्रवाल समाज, कर्नाटक
हरिद्वार गौशाला
जीवन की महत्वपूर्ण बातें
अपने संस्कारों को न भूलें 
समाज और व्यवसाय में एकता बनाए रखें
ईमानदार बनें
युवाओं को प्रेरित करें
जीवन में अनुशासन बनाए रखें
समय के महत्व को समझें
समाजसेवा में योगदान दें

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