बदलाव की शुरुआत

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

शायद आपको पता हो कि भारत में पहले चुनाव बैलेट पेपर पर आधारित था। लोकतंत्र में जन प्रतिनिधि का चुनाव बैलेट पेपर के वोट के आधार पर किया जाता था। उसके बाद 1982 में चुनाव के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी पर चर्चा हुई, हालांकि उच्चतम न्यायालय ने उस वक्त कहा कि कानून में इसका प्रावधान नहीं है। इस वजह से जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन करके ईवीएम के जरिए भी चुनाव कराने की बात जोड़ी गई। वर्ष 2004 से पहले तक दोनों पद्धतियां यानी बैलेट पेपर और ईवीएम दोनों के जरिए चुनाव हुए। वर्ष 2004 का लोकसभा चुनाव पूरी तरह ईवीएम के जरिए हुआ। अब पूरे देश में ईवीएम के जरिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव होते हैं। 

आज हम इस पर बात इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि आने वाले दिनों में देश के कुछ राज्य अपने मतदान माध्यम में परिवर्तन करने की ओर अग्रसर होते दिख रहे हैं। बीते दिनों खबर आई कि महाराष्ट्र सरकार चुनाव कराने के लिए बैलेट पेपर को फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि मार्च में राज्य विधानसभा के बजट सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश हो सकता है। 

विधानसभाध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे सरकार को ईवीएम के साथ बैलेट पेपर पर चुनाव कराने के लिए एक ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। अगर ड्राफ्ट तैयार है तो विधेयक को आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। हालांकि पेश किया गया बिल केवल राज्य विधान सभा चुनावों और स्थानीय चुनावों के लिए लागू होगा। अगर ठाकरे सरकार इस विचार पर आगे बढ़ती है तो महाराष्ट्र, बैलेट पेपर और ईवीएम पर एक साथ चुनाव के लिए इस तरह का कानून लाने वाला पहला राज्य होगा।

हालांकि राज्य में चुनाव के लिए ऐसे कानून को बनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 328 के तहत शक्तियां मिली हुई हैं। अनुच्छेद 328 राज्य सरकार को इस तरह का कानून बनाने का अधिकार देता है। चुनाव, ईवीएम से होना है या बैलेट पेपर से यह फैसला राज्य कर सकेगा। एक तरफ देखें तो जो लोग लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, जो लोग बैलेट पेपर में यकीन रखते हैं, वह इससे खुश होंगे। 

अब सवाल ये उठता है कि अगर देश का हर राज्य अपने चुनाव माध्यम में बदलाव करना चाहे तो क्या ये किसी क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत होगी। क्या आने वाले दिनों में इससे जनता के निर्णय पर असर पड़ेगा। क्या एक देश में अलग-अलग मतदान माध्यम की वजह से विश्व में हमारी जगहंसाई होगी। इस पर विचार होना चाहिए।

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