क्यों रुलाते हो प्याज के आंसू

Total Views : 200
Zoom In Zoom Out Read Later Print

बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

आपको भी एहसास है कि बीते कुछ दिनों से किचन का स्वाद बिगड़ा हुआ है। त्योहारों का मौसम है। घर में तरह तरह पकवान बनने है और ऐसे में प्याज़ के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसा मानों प्याज़ न हुआ कोई सोना हुआ। अब सब्ज़ियों का स्वाद फीका सा रहने लगा है। उस पर देश की वित्त मंत्री का जो बयान आता है वो काफी हास्यास्पद मालूम पड़ता है। मंत्री जी कहती हैं, कि मैं प्याज़ नहीं खाती इसीलिए प्याज के दाम बढ़ने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर देश की वित्त मंत्री ही इस प्रकार की बातें करेंगी तो और किसी से क्या उम्मीद की जा सकती है। एक ओर देश की आर्थिक हालात अब भी चिंताजनक स्थिति में बनी हुई है। सब्जियों के भाव सुन कर लगता है न खाने में ही भलाई है, उस पर से मंत्री जी का बयान आम लोगों के जीवन पर भारी असर डाल रहा है। 

इस कोरोना वायरस की वजह से कई इंडस्ट्रीज बंद हो गई, लोगों की नौकरियां चली गई, बेरोजगारी चरम पर है और अब सब्जियों के कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी से हर व्यक्ति परेशान है। दरअसल, अगर केवल बात प्याज की करें तो भारत में प्याज तीन सीजन में बोया जाता है। इसमें खरीफ (गर्मी), खरीफ (गर्मी के बाद) और रबी (सर्दी) शामिल है।  सितंबर में खरीफ प्याज आना शुरू हो जाता है। वहीं नवंबर के बाद की खरीफ और अप्रैल के बाद से रबी प्याज का आना शुरू होता है। पिछले साल और इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून में भारी बारिश ने प्याज की खोत को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में कर्नाटक में प्याज की खरीफ फसल (गर्मी) सितंबर में बाजारों में आती है, जो भारी बारिश के के चलते प्रभावित हुई है।  वहीं, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी बारिश ने प्याज की फसलों को बर्बाद कर दिया है। यही वजह है कि लगातार प्याज के दामों में उछाल आ रहा है। 

बाढ़ और सुखा के अलावा प्याज की गैरकानूनी तरीके से होर्डिंग की वजह से भी प्याज की कीमतें बढ़ती हैं। हर साल त्योहारी सीजन से पहले जमाखोर प्याज की जमाखोरी करने लगते हैं। जिसकी वजह से प्याज की कीमतें बढ़ जाती हैं। क्योंकि प्याज और आलू दोनों ही ऐसी फसल है जिसे आसानी से स्टोर कर के रखा जा सकता है। मंडी में आने वाली सब्जियों की आवक यानी सप्लाई में कमी के कारण भी दाम तीन गुना से ज्यादा हो जाते हैं। क्योंकि ऐसे समय में सप्लाई तो कम होती है पर डिमांड में कमी नहीं होती। प्याज के उचित स्टोरेज से उसकी कीमतों पर अंकुश रखा जा सकता है। लेकिन भारत में प्याज के भंडारण में दिक्कते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में सिर्फ 2 फीसदी प्याज के भंडारण की ही क्षमता है। 98 फीसदी प्याज खुले में रखा जाता है। बारिश के मौसम में नमी की वजह से प्याज सड़ने लगता है। प्याज की बर्बादी की वजह से भी इसकी कीमतें बढ़ती हैं।

See More

Latest Photos