फिर छीड़ी हिन्दूत्व की राजनीति !

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

एक तरफ कोरोना की महामारी ने केवल देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को ठहराव पर लाकर खड़ा कर दिया है। तो वहीं दूसरी ओर इस विपरीत परिस्थिति में भी राजनेताओं की राजनीति खत्म होने का नाम नहीं लेती। अफसोस की बात बस इतनी है कि हमारे देश के नेताओं को केवल विषय चाहिए, मुद्दा तो वे बना ही लेते हैं। खात तौर पर जब वक्त चुनाव का हो तो नेतागन न आव देखते हैं न ताव, बस बोल जाते हैं कुछ भी चुनावी मुद्दा बना कर। ऐसा ही कुछ हुआ पिछले दिनों जब कोरोना लॉकडाउन की वजह से बंद पड़े धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए बीजेपी ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ दिनों से महाराष्ट्र में सिद्धिविनायक मंदिर समेत अन्य मंदिरों को खोलने की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का मुंबई में प्रदर्शन जारी है। इस बीच महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा और मंदिरों को खोलने को कहा है। कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा कि आप अचनाक सेक्युलर कैसे हो गए? जबकि आप इस शब्द से नफरत करते थे। कोश्यारी की चिट्ठी पर उद्धव ठाकरे का भी जवाब आया है। उद्धव ठाकरे ने चिट्ठी के जवाब में कहा है कि मुझे हिन्दुत्व पर आपसे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। 

इसके बाद तीखे वारों का सिलसिला शुरु हो गया। उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल पर पलटवार करते हुए कहा, जैसे अचानक लॉकडाउन लगा देना ठीक नहीं था वैसे ही अचानक इसे हटा देना भी ठीक नहीं है। और हां, मैं हिंदुत्व का समर्थक हूं और हिन्दुत्व का अनुपालन करता हूं, इसके लिए मुझे आपसे किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। 

दरअसल महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मामले अधिक होने के कारण वहां सभी सामाजिक और व्यवसायिक स्थलों को बंद रखा गया था, लेकिन जैसे ही राज्य सरकार ने वहां पब एवं रेस्तरां खोलने के फैसले को हरी झंडी दिखा दी, वैसे ही विपक्ष ने इस फैसले को आड़े हाथों लेते हुए राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा की मांग है कि राज्य में धार्मिक स्थलों को भी खोल दिया जाए ताकि लोग भगवान के दर्शन कर सकें। 

हालांकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कोरोना महामारी के तेजी से फैलने पर राज्य में क्या खोला जाना है और क्या बंद रहेंगे, यह निर्णय पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन है फिर इस पर राजनीति करने का क्या फायदा। सच तो यह भी है कि सामने बिहार चुनाव है और भारतीय जनता पार्टी को अपने हिन्दूत्व का कार्ड खेलना है, जिसका मोहरा इस बार महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे है। 

ये सारे चुनावी स्टंट जनता बरसों से देखती आ रही है। चुनाव आते ही हिंदुत्व का मुद्दा गरम हो जाना कोई आम सी बात हो गई है। अब जनता को बेवकूफ बनाना आसान नहीं है और शायद आने वाले चुनाव में इसका परिणाम हमें देखने को मिले। 

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