आईएमएफ की बैठकों में गरीब देशों को कर्ज की बजाय अनुदान दिए जाने पर विचार

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वॉशिंगटन, (परिवर्तन)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि कोरोना संकट के बादल छट रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था करवट ले रही है। जो स्थिति चार महीने पहले थी, उससे आज बेहतर है।

सुश्री क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने मंगलवार को कहा कि बीते वसंत में जब 85 प्रतिशत वैश्विक आर्थिक गतिविधियां लाॅकडाउन में थीं, तब विश्व इकाॅनमी को कोरोना ‘ग्रहण’ लग गया था। उन्होंने संकेत दिया कि अगले सप्ताह आईएमएफ की बैठकों में कम आय वाले देशों के ऋण से निपटने और अमीर देशों को कर्ज देने की बजाय गरीब देशों को अधिकाधिक अनुदान के रूप में सहायता उपलब्ध कराने पर विचार होगा।

उन्होंने कहा कि इन बैठकों में कोरोना संक्रमण से जूझ रहे देशों की विभिन्न समस्याओं पर आईएमएफ की सहायक सचिव सबीना भाटिया, प्रज्ञान देव और गुगुल सीईओ सुंदर पिछई सहित अनेक देशों के वक़्ता भाग लेंगे। जोर्जिवा ने आईएमएफ बैठकों से पूर्व आर्थिक स्थिति की समीक्षा करते हुए मंगलवार को इस बात पर ज़ोर दिया कि आईएमएफ अपना अद्यतन आर्थिक दृष्टिकोण जारी रखेगी। उनका कहना था, 'हालांकिकुछ सुधार हुए हैं पर नकारात्मक जोखिम बना हुआ है।'

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट के दौर से वापस आ रही है। लेकिन यह आपदा खत्म नहीं हुई हैअभी सभी देश इस चुनौती से जूझ रहे हैं कि वे एक लंबी दुर्गम चढ़ाई को कैसे सुगमता से पार करें, जबकि असमान धरातल है, अनिश्चिताएं बनी हुई हैं। फिर उसमें जोखिम एवं असफलताओं का भी खतरा है।"


जॉर्जीवा ने कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि विभिन सरकारों ने अपनी-अपनी इकाॅनमी में सुधार के लिए कुल क़रीब 12 खरब डॉलर व्यय किए हैं। इससे लाखों कंपनियों को कारोबार में बने रहने और मंदी रोकने में मदद मिली है, लेकिन अमीर और गरीब देशों के बीच की खाई को कम नहीं किया जा सका है।

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