जीडीपी गिरावट के आंकड़े देखकर डरें !

Total Views : 325
Zoom In Zoom Out Read Later Print

बेंगलूरु, (परिवर्तन)

मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में रिकॉर्ड 23.9 फीसदी की गिरावट पर चिंता व्यक्त की जानी चाहिए। जीडीपी की ऐसी हालत पिछले कई वर्षों में कभी नहीं देखी गई। भारत की हालिया कई नीति आने वाले दिनों में आत्मघाती साबित हो सकती है। बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राम ने कहा है इन आंकड़ों को देख हम सभी को चौंकना चाहिए और सरकार एवं नौकरशाहों को इससे डरने की जरूरत है।

कई अध्ययन, अनुमान और शोधों में यह कहा जा रहा है कि कोविड - 19 महामारी के साथ ही हालात और बुरे होने वाले है। कोविड - 19 की वजह से मार्च - अप्रैल के महीने में लॉकडाऊन की घोषणा की गई थी, उसकी वजह से कोरोना पर भारत सरकार कितना काबू पा सकी यह एक बात है लेकिन इसके जो दुष्परिणाम निकल कर सामने आए हैं वो आने वाले दिनों में और भी भयावह रूप ले सकते हैं। मैन्यूफैक्चरिंग के कई उद्योग बंद हो गए। ट्रांसपोर्ट की हालत खस्ता है। करीब 2 करोड़ से ज्यादा युवाओं की नौकरियां चली गई। इससे बुरा और क्या हो सकता है। हालांकि देश के किसानों से देश की लाज रखी और कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक ग्रोथ दिखाई दिया है। 

जरा सोचिए, वजह चाहे जो भी हो लेकिन अगर वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही यह हाल है तो आने वाले दिनों में और क्या देखना बाकि रह जाएगा। जीडीपी के आंकड़ो को देख कर हम सभी को डरना चाहिए, क्योंकि यह किसी व्यक्ति विशेष के लाभ और हानि को इंगित नहीं करता बल्कि पूरे देश की हालत को दर्शाता है। देश की अर्थवव्यस्था को चित्रित करता है। अर्थशास्छ के विशेषज्ञों का कहना है भारत में 23.9 फीसदी संकुचन कोरोना से प्रभावित उन्नत अर्थव्यवस्थाओं इटली में 12.4 प्रतिशत और अमेरिका में 9.5 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में काफी अधिक है।

हालांकि भारत में अभी तक महामारी फैल ही रही है। इसीलिए केंद्र सरकार को जरूरी है कि वे वायरस पर काबू पाने के साथ ही साथ राजकोष का सही दिशा में इस्तेमाल भी करें और अर्थव्यवस्था को एक बार फिर से पटरी पर लाने के कार्य को गंभीरता से लें। 

अर्थशास्त्रीयों का मानना है बिना राहत के छोटे उद्योग, दुकानें, रेस्टोरेंट मजदूरों को वेतन देना बंद कर रहे हैं, उनके कर्ज बढ़ रहे हैं और नौबत यह आन पड़ी है कि कई व्यवसायिक संगठन हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो जब तक कोविड-19 वायरस काबू में आएगा, तब तक अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी। मैं मानता हूं यह चुनौती सिर्फ कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से उत्पन्न नहीं हुई है, बल्कि विभिन्न कारणों की वजह से पिछले 3-4 साल में उत्पन्न हुईं है। जल्द ही आर्थिक समस्याओं को ठीक करना होगा।

See More

Latest Photos