चीन की सेंधमारी और डेटा सुरक्षा

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

पिछले कई दिनों से भारत और चीन की सरहद पर तनातनी के बाद अब सरहद पर सबकुछ सामान्य हो गया है। लेकिन भारत में चीन निर्मित वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर अब भी कई प्रश्न बने हुए हैं। खबरें आई कि चीन निर्मित कई एप हैं जिनकी मदद से चीन भारतीय की डेटा में सेंधमारी कर रहा है। ऐसे में मामले को संज्ञान में लेते हुए भारत सरकार ने बीते दिनों चीन के करीब 59 एप पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए भारत ने चीनी आधार वाले नए 47 एप को प्रतिबंधित कर अपनी उसी नीति को आगे बढ़ाया है, जिसके जरिए हम अपने लिए सुरक्षा जुटाना चाहते हैं। ये पिछले एप से मिलते-जुलते या जुडे़ हुए एप हैं। सूत्रों की मानें तो अभी भी भारत सरकार की निगाह ऐसे कई एप पर हैं और शायद आने वाले दिनों में इन सभी चीन निर्मित एप्स पर प्रतिबंध लगा दिए जाने की संभावनाएं हैं।

खबर तो अच्छी है कि अब जाकर भारत सरकार अपने नागरिकों से संबंधित डाटा की सुरक्षा के लिए सचेत हुई है, तो इस फैसले का स्वागत भी किया जाना चाहिए। विगत एक दशक से डाटा सुरक्षा को लेकर चर्चाएं हो रही थीं, लेकिन हम इन खतरों के प्रति अब तक उदासीन ही थे, जिसकी वजह से चीन जैसे अविश्वसनीय देश के एप भारत में  दिन-दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे थे। चीनी एप भारत में विगत पांच-छह वर्षों में कुछ ज्यादा ही मजबूत हो गए थे और उनका एक ऐसा शक्तिशाली नेटवर्क बन गया था कि लगता था, देश इससे कभी निकल नहीं सकता। लेकिन गलवान के तनाव ने भारत को सोते से जगा दिया और जिस कदम को असंभव माना जा रहा था, वह भारत सरकार ने आसानी से उठा लिया। भारत सरकार के इस कदम की पूरी दुनिया में चर्चा है और अब तो दूसरे देश भी इसके लिए प्रेरित हो रहे हैं।

आज विश्व के पटल पर चीन एक ऐसे देश के रूप में सामने आ चुका है, जिसे भारत से केवल फायदा लेना आता है। या यूं कहें कि अब चीन का मुखौटा दुनिया भर के सामने आ चुका है। शायद यही वजह है कि आज विश्व की कई बड़ी कंपनियां चीन से अपने व्यापार को समेटने में लगी हुई है। विकसित देशों की सूची में आने वाला और भारत का पड़ोसी देश चीन को भारतीयों की भावना की कोई कद्र नहीं है। गलवान में विभिन्न दौर की सैन्य वार्ताओं में पीछे हटने के लिए सहमत होने के बावजूद चीन ने जमीन पर कई जगह अपनी मनमानी के तंबू गाड़ रखे हैं। वह हमें विवश कर रहा है कि हम अपने लिए चिंतित हों और अपनी सुरक्षा के हरसंभव कदम उठाएं। आज हमारी दृढ़ता  समय और संसार की मांग है।

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