जीडीपी को लेकर दो मत, निवेशकों में असमंजस

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

भारत की मौजूदा वृहद आर्थिक स्थिति के सवाल पर हर किसी के जहन में रह रह कर उठ रहा है। कोरोना वायरस की वजह से एक ओर जहां विभिन्न कंपनियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारों की संख्या में भी तेज़ी से बढ़ोत्तरी हो रही है। विकास दर और ऋण वृद्धि कम है। निवेश में भी गिरावट है। ऐसे में विकास दर पहले के अनुमान के मुकाबले कम रहेगी। बीते दिनों आरबीआई के गवर्नर ने ये कहते हुए अपना पल्ला झाड़ दिया कि इस समस्या का कारण कोरोना वायरस ही है, जिससे अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं संकट में हैं। लेकिन सच कहें तो भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से ही अच्छी स्थिति में नहीं थी। ऐसे में कोविड-19 महामारी के कारण यह और प्रभावित होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पांच किस्त में आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद जीडीपी को लेकर दिए गए बयान और आरबीआई के बयान में काफी अंतर देखा गया। ऐसे में जनता के लिए यह समझना बड़ा कठिन हो गया है कि इस मामले में वे सरकार पर भरोसा करे या आरबीआई द्वारा बताए गए आंकड़ों पर। 



यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दोनों कार्यालय संपर्क में न होने की वजह से विभिन्न वृद्धि प्रतिशतों की घोषणाएं व्यक्तिगत रूप से किया जा रहा है। निवेशकों के लिए मुद्रास्फीति और जीडीपी चार्ट उसी तरह हैं जैसे एक सर्जन ऑपरेशन से पहले एक मरीज के चार्ट का अध्ययन करता है। मुद्रास्फीति और आर्थिक उत्पादन (जीडीपी) के बीच का संबंध बहुत नाजुक होता है। शेयर बाजार के निवेशकों के लिए, सकल घरेलू उत्पाद में वार्षिक वृद्धि महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में शीर्ष अधिकारियों की कोई भी गलत जानकारी निवेशकों के लिए अत्यधिक हानिकारक हो सकती है।

हालांकि इस संकट से निपटने के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए। बजट घोषणा के मुकाबले राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में 0.5 फीसदी की वृद्धि पर चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस महामारी से निपटना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार ने 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.8 फीसदी रखा है, जो पहले 3.3 फीसदी था। रेपो दर वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे वाणिज्यक बैंकों (कॉमर्शियल बैंक) को अल्पावधि के लिए नकदी या कर्ज उपलब्ध कराता है। प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए आरबीआई को नीतिगत दरों में कटौती करनी चाहिए और केंद्रीय बैंक पहले ही ऐसा कर चुका है।

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