भारतीय बाजार पर चीन का दबदबा

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- कई भारतीय कंपनियों में है चीन का निवेश - कैसे बनेंगे “आत्मनिर्भर”

बेंगलूरु, (परिवर्तन)। दुनिया के कई देशों ने चीन का बहिष्कार करना शुरु कर दिया है। कोरोना वायरस से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के लिए विश्व पटल पर चीन को न केवल ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है बल्कि कोरोना वायरस को चीन वायरस या वुहान वायरस के नाम से भी जाना जाने लगा है। ऐसे में दुनिया के विभिन्न देशों द्वारा चीन के उत्पादों के निर्यात एवं आयात को बंद करने का कठोर फैसला लिया गया है। हालांकि भारतीय सरकार की ओर से चीनी वस्तुओं एवं चीन के बहिष्कार को लेकर किसी प्रकार की बात सामने नहीं आई है लेकिन 12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश को आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाने की सलाह दी तो कहीं न कहीं यह अनुमान लगाया गया कि वे चीनी वस्तुओं एवं उत्पादों के इस्तेमाल न करने की गुज़ारिश कर रहे थे। उन्होंने देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर बनने और स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल करने का आग्रह किया। 

हालांकि देश के ज्यादातर लोगों को इस बात का इल्म तक नहीं है कि भारत में कई ऐसी प्रमुख कंपनियां हैं, जिनमें चीन के विभिन्न कंपनियों ने निवेश किया है। ऐसी कंपनियों द्वारा उपलब्ध सेवाओं का इस्तेमाल हम रोज़मर्रा के जीवन में करते हैं। 


ज्यादातर भारतीयों को चीन के निवेश का पता नहीं

भारत में कई कंपनियां ऐसी है, जिनका योगदान कार सेवा, डिलेवरी सेवा, शिक्षा सेवा, टिकिट बुकिंग सेवा एवं राशि भुगतान सेवा में हैं। ऐसी कई कंपनियों में चीन द्वारा निवेश किया गया है। बीते दिनों एक गैर सरकारी संस्था द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात पता चला है कि देश के लगभग लगभग 68 प्रतिशत लोगों को लगता है कि भारतीय नाम वाली सभी कंपनियां संपूर्ण रूप से भारतीय है। ऐसी कंपनियों में भारतीय की तुलना में चीन का निवेश ज्यादा है। लोगों का कहना है क्योंकि इन कंपनियों के लिए प्रसिद्ध भारतीय कलाकारों और चर्चित चेहरों द्वारा विज्ञापन दिया जाता है इसीलिए उन्हें लगता है कि यह संपूर्ण रूप से भारतीय कंपनी है। इनमें मुख्य रूप से ऑनलाइन किराना डिलेवरी कंपनी बिग बास्केट, ऑटोमेटेड कार सेवा देने वाली कंपनी ओला, ऑनलाइन एजुकेशन कंपनी बायजूज, भुगतान कंपनी पेटीएम, होटल व्यवसाय कंपनी ओयो आदि प्रमुख हैं।


भारत और चीन का व्यापार 

भारत चीन को 18 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात कर रहा है। वर्ष २०००-२००१ में लगभग १ अरब डॉलर का व्यापार घाटा बढ़कर ५६ अरब डॉलर हो गया। एक ही बात हर देश के साथ हुई है। चीन की रणनीति अधिक निर्यात करने और बड़े भंडार बनाने के लिए एक विशाल व्यापार अधिशेष बनाने के लिए कम आयात करना है। रिपोर्ट के अनुसार आज चीन के पास 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का भंडार है। वे इन भंडार को गरीब देशों के लिए ऋण अग्रिम के रूप में निवेश कर रहे हैं, जिनमें सड़क, हवाई अड्डों और अन्य ढांचागत विकास के निर्माण के लिए निवेश किए गए हैं। यदि देश ऋण राशि का भुगतान नहीं कर सकते हैं तो चीन द्वारा कब्जा कर लिया जाएगा। हालांकि भारत में चीन का आर्थिक पदचिह्न मुख्य रूप से तकनीकी स्टार्टअप्स में है। ये अलीबाबा, बाइटडांस और टेनसेंट जैसे दिग्गजों के नेतृत्व में लगभग दो दर्जन चीनी टेक कंपनियों और फंडों द्वारा किए गए निवेश हैं, जिनमें 92 भारतीय स्टार्ट-अप्स शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से पेटीएम, बायजू, ओयो और ओला जैसे प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। भारत में चीनी निवेश के गहन अध्ययन ने उल्लेखनीय निष्कर्ष दिए। एक अध्ययन के मुताबिक 30 प्रसिद्ध भारतीय कंपनियों में से 18 के पास चीनी निवेशक हैं। इसका मतलब यह है कि चीन भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था और इसे प्रभावित करने वाले प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में अंतर्निहित है। एक बंदरगाह या एक रेलवे लाइन के विपरीत, ये छोटे आकार में अदृश्य संपत्ति हैं - शायद ही कभी 100 मिलियन डॉलर से अधिक और निजी क्षेत्र द्वारा बनाई गई। यह सब भारत में कुल आधिकारिक चीनी (हांगकांग सहित) एफडीआई का सिर्फ 1.5% तक जोड़ता है। यदि हम अंतर्निहित तालिका का उल्लेख करते हैं, तो हमें यह पता चलेगा कि चीनी निवेश पर ज्यादातर भारतीय कंपनियां ज्यादातर स्टार्टअप इकाइयां निर्भर हैं।


आइए एक तालिका के माध्यम से समझते हैं कि किन भारतीय कंपनियों में चीन द्वारा कितना निवेश किया गया है - 

भारतीय कंपनी 

ब्रांड का नाम

चीन निवेशक

अनुमानित निवेश (मिलियन डॉलर में)

इनोवेटिव रिटेल कॉन्सेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड

बिग बास्केट

अलिबाबा ग्रूप, टीआर एलटीडी

>250

थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड


बायजूज

टेंसेंट होलडिंग्स

>50

डेलहीवरी प्राइवेट लिमिटेड

डेलहीवरी

फोसून

>25

स्पोर्टा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड


ड्रीम 11

स्टेडव्यू कैपिटल, टेंसेंट होलडिंग्स


>150

वॉलमार्ट

फ्लिपकार्ट

स्टेडव्यू कैपिटल, टेंसेंट होलडिंग्स



>300

हाइक मैसेंजर लिमिटेड


हाइक

टेंसेंट होलडिंग्स, फॉक्सकॉन


>150

मेक माय ट्रिप (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड


मेक माय ट्रिप

सी ट्रिप

एनए

एएनआई टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड


ओला

स्टेडव्यू कैपिटल, टेंसेंट होलडिंग्स, सेलिंग कैपिटल एंड चीन, इटरनल येल्डइंटरनेशनल लिमिटेड, चीन यूरासियन

इकोनॉमिक कोऑपरेशन फंड


>500

ओरावेल स्ट्रेस प्राइवेट लिमिटेड


ओयो

दिदि शूजिंग, चीन लॉजिंग ग्रूप


>100

पेटीएम ई कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड


पेटीएम मॉल

अलिबाबा ग्रूप

>150

वन 97 कॉम्यूनिकेशन लिमिटेड


पेटीएम डॉट कॉम

अलिबाबा ग्रूप

>400

रिविगो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

रिविगो

एसएआईएफ पार्टनर्स

>25

*उपरोक्त तालिका  गोट-वे हाउस द्वारा उपलब्द्ध डाटा के अंतर्गत ह, जो ग्लोबन रिलेशन्स के लिए भारतीय काउंसिल है

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