पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र पर हमला करने जैसा है

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- हम अर्नब गोस्वामी पर हमले की निंदा करते हैं

बेंगलूरु, (परिवर्तन)। किसी व्यक्ति के लिए कुशलता से काम करना तब मुश्किल हो जाता है, जब उस पर उसके काम की पहचान के लिए व्यक्तिगत रूप से हमला किया जाता है। भारत में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। पत्रकार जगत की गरिमा केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के हर देश में एक जैसी है। पत्रकार लोकतंत्र के आंख, कान और मुंह होते हैं। उन्हें अपनी नौकरी के हिस्से के रूप में कड़वे सच की सूचना देनी होती है। लेकिन इसी कारण से अगर कोई पत्रकार से हाथापाई करता है या उसे किसी प्रकार से कोई नुकसान पहुंचाता है तो स्थिति को लोकतंत्र पर हमले के रूप में लिया जाता है। अगर किसी पत्रकार की किसी भी राय को अस्वीकार करने की जरूरत है तो उसे अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए या कानून के तहत आरोप दायर करके किया जा सकता है न कि शारीरिक रूप से हमला करने से। लेकिन हाल ही में कुछ असामाजिक लोगों ने विरोध करने का घटिया तरीका अपनाया और दुर्व्यवहार का एक नया रास्ता अपनाया। 

क्या है मामला ?

बीते दो दिनों से हंगामा मचाने वाली खबर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की है, जिन पर कांग्रेस के गुंडों ने शारीरिक रूप से तब हमला किया जब वे 22 अप्रैल यानि बुधवार की रात को अपनी पत्नि के साथ ऑफिस से घर लौट रहे थे। इस हमले को अर्णब के घर से कुछ ही दूरी पर गणपतराव कदम मार्ग पर अंजाम दिया गया। अर्णब ने अपने ऊपर हुए हमले से संबंधित एख वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि दो गुंडे एक बाइक पर आए और उनकी कार को ओवरटेक किया, उनकी कार को रोका और उनकी कार को तोड़ने के लिए लगातार कार के शीशे को पीटना शुरू कर दिया। हालाँकि, उनके पीछे उनकी सुरक्षा टीम थी और उन्होंने दोनों गुंडों को पकड़ लिया और अब वे दोनों हिरासत में हैं। उन्होंने अर्णब की सुरक्षा के लिए स्वीकार किया कि उन्हें अर्णब पर हमला करने और नुकसान पहुंचाने के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा भेजा गया था।

कैसे शुरु हुआ विवाद ? 

दरअसल यह विवाद अर्णब गोस्वामी के न्यूज रूम से शुरू हुआ जब उन्होंने अपने चैनल पर एक बहस के दौरान सोनिया गांधी को पालघर में साधुओं की हत्या के मामले को लेकर "खुश" बताया। साथ ही, गोस्वामी ने सोनिया गांधी के बारे में 'संतों को मारने' जैसी कई टिप्पणियां भी कीं। अर्णब ने अपने शो में आचार्य प्रमोद कृष्णन से कहा कि "अगर एक पादरी मारा गया, तो आपकी पार्टी और आपकी पार्टी की" इटली की सोनिया गांधी चुप नहीं रहेंगी। अर्नब ने कहा, सोनिया गांधी खुश हैं। वह इटली में एक रिपोर्ट भेजेंगे कि, देखो मैंने यहां सरकार बनाई है और अब मैं हिंदू संतों को मार रही हूं। वहां से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गांधी ने अच्छा काम किया। अर्णब ने कहा उन्हें शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिंदू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बताया जाना चाहिए कि क्या हिंदू चुप रहेंगे? पूरा भारत एक ही सवाल कर रहा है।

उनकी राय के बाद एक दंगा भड़काने के लिए अर्णब के खिलाफ नागपुर में मामला दर्ज किया गया। महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने अर्णब की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'कुछ मीडिया हाउस नफरत फैलाने और अपने टीवी चैनलों के जरिए समाज को बांटने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उल्लेखनीय है कि नितिन राउत और बालासाहेब थोरात ने अर्णब गोस्वामी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की है। इस बीच, अर्णब के खिलाफ नागपुर में दंगा भड़काने के आरोप में धारा 153, 153ए, 153बी, 295ए, 208, 500, 504, 505 (2), 506, 120बी और 117 के तहत मामला दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने अर्णब की गिरफ्तारी की मांग करते हुए ट्विटर पर लिखा, "कुछ मीडिया घराने अपने टीवी चैनलों के माध्यम से नफरत फैलाने और समाज को विभाजित करने के लिए हमेशा तैयार हैं।"

पत्रकार समुदाय के लिए शर्मनाक घटना

कानून के तहत किसी पर मुकदमा करना वैध है, लेकिन घातक हमला बिल्कुल अनुचित है। इस तरह के कृत्यों की निंदा की जानी चाहिए और असामाजिक तत्वों को दंडित किया जाना चाहिए। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अर्णब गोस्वामी पर हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी पत्रकार पर हर हमले की निंदा करती है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है और यह वास्तव में विडंबना है कि जो लोग सहिष्णुता का प्रचार करते हैं, वे इतने असहिष्णु हो गए हैं। आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के प्रमुख और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि अर्णब पर हमला न केवल लोकतंत्र के चौथे स्तंभ बल्कि मानव अधिकारों पर भी हमला है। इसके अलावा, उन्होंने सलाह दी कि यह देश अलग-अलग आवाजों के अस्तित्व पर पनपता है। उन्होंने सभी से अर्णब गोस्वामी पर हुए हमले की निंदा करने का आह्वान किया। समाचार परिवर्तन पत्रकारों पर इस तरह के हमलों की निंदा करता है और हमेशा न्याय का मार्ग प्रशस्त करने की उम्मीद करता है।

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