पुलिस, प्रेस और स्वास्थ्य कर्मियों की सहायता करें

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

कोरोना वायरस की महामारी तेज़ी से फैल रही है। देश में दो बार लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है। पहले 21 दिनों के लॉकडाउन की, और फिर 19 दिनों की। लेकिन क्या लोगों को पता भी है कि लॉकडाउन का असली मतलब है क्या। लॉकडाउन का अर्थ होता है कि लोग घरों में रहें। अत्यंत जरूरी न होने पर घर से बाहर न निकलें। लेकिन क्या ये बात हम अपने देश के पुलिस कर्मियों, मीडिया कर्मियों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कह सकते हैं? अगर नहीं तो क्यों नहीं? क्या वे हमारे देश के नागरिक नहीं है? क्या उन्हें स्वस्थ और सुरक्षित रहने की जरूरत नहीं है? जी हां, आज अगर हम ये बातें कह रहे हैं, तो जरूर इसके पीछे कोई ठोस वजह होगी। बात चाहे देश के विभिन्न राज्यों में सड़कों पर दिन रात निगरानी कर रहे पुलिस कर्मियों की करें या निरंतर देश के स्वास्थ्य की जानकारी पहुंचाते मीडिया कर्मियों की करें, या फिर अपनी जान को दावं पर लगाकर स्वास्थ्य कार्यों में जुटें स्वास्थ्य कर्मियों की करें, इन सबका हाल आज एक बराबर हो रहा है। दिन रात काम से थकान और सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा। 

और जिसका डर था आखिर वही हुआ, बीते दिनों आई खबर ने झकझोर कर रख दिया। जहां देश के कुछेक राज्यों में स्वास्थ्य कर्मियों एवं मीडिया कर्मियों में कोरोना वायरस के संक्रमण के खबरों की पुष्टि की गई। आखिर हमारा सवाल राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से है, दिन रात लोगों के लिए जुटे इनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी किसकी है। वहीं सोशल मीडिया पर कई वीडियोज भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस कर्मियों को बिना किसी मास्क और सुरक्षा सामग्रियों के साथ सड़कों पर लोगों को जागरूक करते और लॉकडाउन की अवहेलना करने वाले मनचलों पर कार्रवाई करती नज़र आ रही है। लेकिन आम नागरिकों से ज्यादा इन पुलिस कर्मियों औऱ मीडिया कर्मियों को भी अपने स्वास्थ्य का ख़्याल रखना पड़ेगा। क्योंकि एक बार जो पुलिस कर्मियों में कोरोना वायरस फैला तो इसे नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। 

मेरा मानना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार को अन्य सभी जरूरती कदमों के साथ पुलिस कर्मियों, मीडिया कर्मियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। मैं मानता हूं पहली ज़िम्मेदारी जो देश के नागरिकों के प्रति स्वास्थ्य कर्मियों की है, उसे किसी भी हाल में नकारा नहीं जा सकता। तमाम सुरक्षा एहतिहातन के बावजूद उन्हें कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना ही पड़ता है। लेकिन यहां जो सरकार कर सकती है, वो ये कि उनके लिए उचित किट मुहैय्या कर उन्हें संक्रमण के खतरे से बचा सकती है। वहीं दूसरी ओर देश को कड़ी निगरानी में रखने वाले और आम लोगों से सख्ती से लॉकडाउन को पालन करवाने वाले पुलिस कर्मियों के लिए भी सरकार को थोड़ा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कई पुलिस कर्मियों से बातचीत के आधार पर ये पता चला कि वे कई दिनों से अपने परिवार से नहीं मिले और घर तक नहीं गए। तीसरी जिम्मेदारी सभी मीडिया संस्थानों की है, कि वे अपने संस्थान में कार्य कर रहे हर एक कर्मी का पूरा ध्यान रखें, ताकि उन्हें भी कोरोना वायरस से लड़ने और देश को एक स्पष्ट आइना दिखाने में मदद मिल सके।  याद रखें एक दूसरे की सहायता से ही हम कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ेंगे भी और जीतेंगे भी।

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