क्यों बदलें भारत पर ट्रंप के सुर

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। 23 फरवरी का वो दिन देश के इतिहास में काफी यादगार दिन रहा जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर भारत आए और नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में अपने पूरे परिवार के साथ शामिल हुए।

यह वो वक्त था जब भारत का पड़ोसी देश चीन कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा था और वहां का हालात दिन प्रतिदिन खराब होता जा रहा था। यह वो समय था जब कार्यक्रम से ठीक एक महीने पहले यानि 29 जनवरी को भारत के केरला में कोरोना वायरस के संक्रमण की जानकारी प्राप्त हुई। इसके वाबजूद कार्यक्रम का आयोजन धूमधाम के साथ किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्यक्रम में शिरतक करने के साथ ही भारत के साथ अच्छे संबंधों की भी बात कही। 

हालांकि इस कार्यक्रम के बीतने के कुछ ही हफ्तों के बाद चीन से निकला महामारी कोरोना वायरस पूरे दुनिया में बुरी तरह से फैल गया। मालूम हो कि भारत के हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर मुहर लगाते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदल गए हैं। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा है- मोदी महान हैं, वह बहुत अच्छे नेता हैं। ट्रंप ने अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान कहा- नरेंद्र मोदी ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के मामले में हमारी मदद की है, वह काफी अच्छे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम विदेश से कई दवाइयां मंगवा रहे हैं। इसमें भारत में बनाई जाने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाइयां भी शामिल है। इसे लेकर मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत में कहा कि भारत से अभी बहुत अच्छी चीजें आनी बाकी हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की 29 मिलियन डोज खरीदी है।

ट्रंप ने चैनल से बातचीत में कहा कि मैंने पीएम मोदी से पूछा था क्या वो हमें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाइयां देंगे? वो शानदार थे। बता दें कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन भारत में मलेरिया के इलाज की दवा है। भारत में मलेरिया के मामले हर साल बड़ी संख्या में आते हैं और यही वजह है कि भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक है। ये दवा इस वक्त एंटी-वायरल के रूप में इस्तेमाल हो रही है।मंगलवार को ही सरकार ने इस दवा पर लगे निर्यात से आंशिक तौर पर प्रतिबंध हटाया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार सरकार ने मानवीय आधार पर यह फैसला लिया है। ये दवाएं उन देशों को भेजी जाएंगी जिन्हें भारत से मदद की आस है। हालांकि घरेलू जरुरतें पूरी होने के बाद स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर निर्यात किया जाएगा। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि भारत अनुरोध के बावजूद अमेरिका को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात की अनुमति नहीं देता है तो उन्हें हैरानी होगी। पिछले हफ्ते ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है ताकि भारत अमेरिकी में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की बिक्री की इजाजत दे। इससे कुछ घंटे पहले ही भारत ने मलेरिया की इस दवा के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था।

अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच उनके इलाज के लिए इस दवा के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, 'मुझे हैरानी होगी अगर वह (ऐसा) करेंगे, क्योंकि आप जानते हैं कि भारत का अमेरिका के साथ व्यवहार बहुत अच्छा रहा है।' मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत कई वर्षों से अमेरिकी व्यापार नियमों का फायदा उठा रहा है, और ऐसे में अगर नई दिल्ली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को रोकता है, तो उन्हें हैरानी होगी।

भारत के फैसले से आश्चर्यचकित हैं ट्रंप

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रम्प से सवाल पूछा गया, ‘‘ क्या आपको चिंता है कि आपकी तरफ से अमेरिका के उत्पाद के एक्सपोर्ट में पाबंदी लगाने की प्रतक्रिया आएगी, जैसे की भारतीय पीएम मोदी ने अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन न देने का डिसीजन लिया है।’’  जवाब देते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘‘मुझे यह डिसीजन पसंद नहीं आया। मैंने नहीं सुना कि यह उनका डिसीजन है। हां मैनें यह सुना है कि उन्होंने कुछ देशों के लिए पाबंदी लगाई है। मैंने कल उनसे बात की थी। हमारी अच्छी बात हुई। मैं बहुत आश्चर्यचकित होऊंगा अगर वे दवा पर पाबंदी लगाते हैं। क्योंकि भारत कई सालों से अमेरिका से व्यापार में लाभ ले रहा है। मैंने रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि अगर वह हमारी (हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की) सप्लाई को अनुमति देते हैं तो हम उनकी सराहना करेंगे। अगर वह एसा नहीं करते हैं तो इसका जवाब दिया जाएगा, आखिर क्यों नहीं दिया जाए?’’ बता दें कि शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से गुहार लगाई थी कि बीमारी से निपटने के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की खेप भेजें।

विदेश विभाग के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ हमेशा से सहयोग किया और बेहतर संबंध रखे। कई देशों में भारत के लोग रह रहे हैं, कोरोना के चलते उन्हें निकाला गया। मानवीयता के आधार पर सरकार ने फैसला लिया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और पैरासिटामॉल को पड़ोस के उन देशों को भी भेजा जाएगा, जिन्हें हमसे मदद की आस है।’’

इटली और स्पेन के बाद अमेरिका में मौतों का आंकड़ा 10 हजार से ज्यादा हो गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क स्टेट में पांच हजार मौतें हुई हैं। इनमें आधा से ज्यादा केवल न्यूयॉर्क सिटी में है। वहीं, राज्य में एक लाख 20 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं और 16 हजार से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, अमेरिका ने एशियाई देश में फंसे अपने 29 हजार नागरिकों को 13 विशेष विमानों से अपने देश बुला लिया है। ये नागरिक साउथ एंड सेंट्रल एशियाई देश भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान में फंसे हुए थे। यह जानकारी दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की अमेरिका की सीनियर डिप्लोमेट एलिस वेल्स ने प्रेस वार्ता में दी। अकेले भारत में ही 1300 अमेरिकी नागरिक थे।

जानबुझ कर क्यों किया गया कार्यक्रम का आयोजन

स्वास्थ्य से संबंधित जानकार लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस के फैलने की प्रक्रिया सुस्त नहीं बल्कि काफी तिब्र साबित हुई। चीन से फैले इस जानलेवा वायरस ने अब धीरे धीरे दुनिया भर में पैर पसार लिया है। वर्ल्डो मीटर के अनुसार भारत में सबसे पहले कोरोना वायरस के संक्रमित व्यक्ति का पता बीते 29 जनवरी को चला। इसके बावजूद 23 फरवरी को नमस्ते ट्र्ंप कार्यक्रम का विशाल आयोजन किया गया। मालूम हो कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश और विदेश से करीब तीन लाख से ज्यादा लोग एक साथ जुटे थे। कोरोना वायरस महामारी के फैलने की जानकारी होने के बावजूद इस प्रकार के आयोजन को मंजूरी दी गई और विशाल संख्या में लोगों को एकत्र किया गया। केंद्र सरकार से बस हमारा सवाल इतना है कि क्या इस आयोजन को टाला नहीं जा सकता था? क्या कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की जांच की गई। क्या राष्ट्रपति ट्रंप से साथ आए लोगों की किसी प्रकार की सुरक्षा जांच यानि स्वास्थ्य जांच की गई। आज जब यह महामारी देश नहीं बल्कि पूरे दुनिया में फैल रही है, तह सरकार से इस प्रकार की गलती की उम्मीद नहीं की जा सकती। सरकार की इस एक गलती की वजह से आज अगर देश के एक भी नागरिक की जान जाती है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगा।

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