संगीत सांस है हमारी : सुरेश वाडकर

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सूर सम्राट सुरेश वाडेकर से चार सवाल करते परिवर्तन समाचार पत्र के सम्पादक प्रशान्त गोयनका।

सवाल 1. आपकी नजर में संगीत का क्या अर्थ है?
जवाब : संगीत सांस है हमारी, जिन्दगी है और इसके सिवा कुछ भी हमको दिखता नहीं। वही करना अच्छा लगता है, ठीक है बाकी संसारिक चीजें हैं, मां-बाप है, भाई-बहन है, बीबी-बच्चे हैं, मगर सबसे ऊपर हमारे गुरु, उसके बाद हमारा गाना फिर भगवान, फिर माता-पिता और सारे रिश्ते।

सवाल 2. नये गायकों के लिए आज के समय में रियालिटी शो में आना कितना महत्वपूर्ण है और इस पर आपकी क्या राय है?
जवाब : बहुत अच्छा भी है और बहुत बुरा भी है, क्योंकि कोई बहुत अच्छी चीज हम बहुत ज्यादा खा जाएं तो भी तबियत खराब हो सकती है ना। उसकी वजह से डरना चाहिए कि कितना खाना चाहिए वो भी ध्यान रखा जाना चाहिए। रियालिटी शो भी वैसे ही हैं। अच्छी चीजें भी क्योंकि दुनिया भर के लोगों का जो टेलेंट हैं ,उसको एक स्टेज मिलता है, इतना बड़ा प्लेटफार्म मिलता है। वो सारी दुनिया में पॉपूलर हो जाते हैं। मगर उसके साथ जो आपको जैसे बैंक में बैलेंस डालना पड़ता है ऐसे ही रियाज करके अपने गाने को और अच्छा करने की कोशिश करते रहना होता है, जो अक्सर बच्चों से हो नहीं पाता है। जिसके वजह से वो आते भी हैं और आउट भी हो जाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए जो आते हैं अन्दर ही रहना चाहिए बाहर नहीं जाना चाहिए। मगर 95 से 97 प्रतिशत लोग बाहर हो जाते हैं, कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो मेहनत करते हैं, डटे रहते हैं वे ही टिके रह पाते हैं।

सवाल 3. जीवन में गायिकी की प्रेरणा आपको किनसे और कब मिली?
जवाब : मेरे पिता को बहुत शौक था, जब में बच्चा था तो उनके साथ भजन वगैरह सूनने जाया करता था तो कहीं पर वो संस्कार में आ गया। उसके बाद सद्गुरु यानी मेरे गुरु पंडितजी जीयालाल वसंत जिन्दगी में आये। उन्होंने जो रास्ता दिखाया उस पर हमने चलने की कोशिश की। जिसकी वजह से आज सब कुछ है मेरे पास, वो सब मेरे गुरुजी का दिया हुआ है। सरस्वती माँ का, मेरी बहन है, मेरे गानों को सुनने वाले मेरे ऑडियन्स जो मेरे माई-बाप हैं। यह सब उन्हीं का दिया हुआ है।

सवाल 4. सींगिंग के अलावा खाली समय में आप क्या करना पसन्द करते हैं और नयी पीढ़ी, नये गायकों के लिए आप क्या संदेश देना चाहते है?
जवाब : सीगिंग के अलावा मुझे बहुत अच्छा लगता है जितना समय मिले उसमें रियाज करूं। उसमें भी अगर थोड़ा समय मिले तो मैं सो जाऊँ। सोना (नींद) मुझे बहुत अच्छा लगता है। बाकी मेरा पूरा समय तो रियाज, रिकोर्डिंग, मेरे स्टूडेंट्स, मेरा सीखाना। रात को सोने से पहले थोड़ी देर मैं हॉलीवूड की फिल्में देखता हूं। आज के नवयूवकों के लिए यही संदेश है कि अच्छा गुरु ढूंढ कर संगीत की साधना करें क्योंकि अच्छे गुरुओं को अच्छे शिष्यों की भी जरूरत होती है। आप अच्छा स्टूडेंट बनकर अच्छे गुरु के पास जाएं। कम से कम दस साल गाना अच्छे से सीखें, दबाकर रियाज करें और फिर प्रोफेशनल की ओर रूख करें। तो आप को कोई रोकेगा नहीं, आपका कोई हाथ भी नहीं पकड़ सकता। 

अपने साक्षात्कार के अन्तिम शब्दों में सुरेश वाडेकर ने समाचार पत्र परिवर्तन का धन्यवाद करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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