लॉकडाउन हुआ लेकिन देर से

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

आज कोरोना वायरस वैश्विक महामारी बनी हुई है। विश्व का शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो इससे अछूता है। हर दिन की बात करें तो सैंकड़ों लोग रोज़ इस जानलेवा वायरस की चपेट में आकर अपनी जान गवां रहे हैं। तरह तरह के अध्ययन सामने आ रहे हैं, लोग एक दूसरे को न जाने कैसी कैसी नसीहतें भी दे रहे हैं, लेकिन इस आपदा की घड़ी में जो सबसे ज्यादा जरूरी थी वो यह कि इसके भारत पहुंचने से पहले ही इससे लड़ने के लिए केंद्र सरकार को कोई ठोस निर्णय तैयार रखना था, जिससे देश के नागरिकों में यह वायरस फैलता ही नहीं। अब देश में कोरोना से संक्रमित 10 लोगों की मृत्यु के बाद कई गहन-विचार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सलाहकारों ने देश को लॉकडाउन करने का फैसला लिया है। उन्होंने इसकी जानकारी एक मीडिया संबोधन में दी। 

मेरा मानना है कि तेजी से फैल रहा कोरोना वायरस के प्रसार में लॉकडाउन रूकावट तो शायद तब बनता जब समय रहते इसे एक कठोर फैसले के रूप में आज से करीब 20 दिन पहले ले लिया जाता। अच्छा तो तब होता जब 20 दिन पहले सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बंद कर दिया जाता। फैसला जनता के हित में तब होता जब पेट्रोल और डीजल से मुनाफा की परवाह किए बिना सरकार अंतरराष्ट्रीय और अंतर राज्यीय तेल व्यापारों पर और ट्रांसपोर्ट पर रोक लगाती। इस फैसले को महामारी के रोकथाम की दिशा में हितकारी तब कहा जाता जब सख्ती से राज्य सरकारों को विभिन्न प्रकार की पावंदी लगाए जाने को लेकर कड़े निर्देश दिए जाते। हालांकि मैं समझता हूं कि अब तो काफी देर हो चुकी है और आज एक व्यक्ति से ये जानलेवा महामारी दूसरे व्यक्ति में नहीं बल्कि 100 से 200 लोगों में फैल रही हैं, क्योंकि कई दिनों तक इसके लक्षण न दिखाई देने पर संक्रमित व्यक्ति मनचाहे तरीके से घूमरा फिरता रहता है और जाने अनजाने में अन्य कई लोगों को भी संक्रमित कर देता है। 

केंद्र सरकार ने अपनी यह दूरदर्शिता अगर समय रहते दिखाई होती तो शायद आज इस पर नियंत्रण कई दिनों पहले ही पा लिया जा सकता था। हालांकि विश्व भर के विषेशज्ञों और जानकारों का कहना है कि इस वायरस को जड़ से खत्म होने में अभी बहुत वक्त लगेगा। क्योंकि इसकी वैक्सिन और दवाओं के निर्माण पर अभी भी काम चल रहा है। 

मैं, यहां यह भी समझना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बारे में और उसके भयावह रूप के बारे में तो बताया लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि लॉकडाउन के दौरान गरीब, भुखमरी के शिकार, दिहाड़ी मजदूर, हाउसमेड और अन्य श्रमिकों का घर कैसे चलेगा। उन्होंने इस बात की भी ज़िक्र नहीं की कि लॉकडाउन के दौरान कौन कौन सी मुलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने अपने भाषण में यह भी नहीं बताया कि किराना स्टोर, दवा दुकान, एटीएम जैसी जगहों पर भारी भीड़ लगी और कोई अप्रिय घटना घटी तो राज्य सरकार या केंद्र सरकार क्या कदम उठाएगी। ये जो उक्त सवाल हैं, ये केवल मेरे और आपके सवाल नहीं है। ये प्रश्न हर एक देशवाशियों आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर रहा है और मैं समझता हूं कि इस विकट परिस्थिति में इसकी भी जवाबदेही जरूरी है।

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