राजनीतिक नेताओं के बचाव में पुलिस

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

वर्तमान स्थिति एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है, क्या पुलिस विभाग केवल अमीर और प्रभावशाली लोगों की सुरक्षा की सुरक्षा के लिए है? हम भारत के आम लोग यह देखकर सदमे में हैं कि जिस व्यक्ति पर भीड़ को उकसाने और दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा का आरोप लगाया गया है, उन्हें जान से मारने की धमकी के मद्देनजर वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। जी हां, कपिल मिश्रा, जिन्होंने नफरत की आग को हवा दी और मोर्चे से दंगों का नेतृत्व किया। उन्हें उसी पुलिस बल द्वारा सुरक्षा दी जा रही है, जो हजारों लोगों की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे।

भारत एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते, यहां हर व्यक्ति अपने विचारों व्यक्त करने का अधिकार रखता है। लेकिन क्या एक पार्टी नेता को इतना आक्रामक होना चाहिए कि वह विष के रूप में ऐसे शब्द बोलें, जिससे एकाएक लगभग 50 आम नागरिकों की जान चली जाए, हजारों को संख्या में लोग घायल हो जाएं और एक बड़ी आबादी को असुरक्षा की स्थिति में धकेल दिया जाए। इन सभी सवालों के बीच राजनीतिक दल, धार्मिक समुदाय और राजनीतिक संगठन एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इस बारे में रिपोर्टें आ रही हैं कि पिछले कुछ महीनों से सक्रिय वामपंथी संगठन पिंजरा टॉड ने कैसे ऐसी स्थिति पैदा कर दी जिससे भड़काऊ भाषण देने का मौका कपिल मिश्रा को मिल गया। पिंजरा टॉड के सदस्यों को लाकर शांति विरोध कर रहे थे और विरोध प्रदर्शनों के लिए अन्य महिलाओं को जुटा रहे थे। उनसे ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो विरोध प्रदर्शन या मंचन में भी शामिल नहीं थे, लेकिन स्थानीय लोगों के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार, उग्र भीड़ पर नकाबपोश, सशस्त्र दंगाई सामने आकर हमला कर रहे थे।

कम से कम दो दिनों तक पुलिस की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। पुलिस ने एंबुलेंस को घायल लोगों को ले जाने की भी अनुमति नहीं दी। दशकों तक राष्ट्रीय राजधानी में नहीं देखे जाने वाले दृश्यों में उन्मादी समूहों ने लोगों को सड़क पर फेंक दिया और वाहनों में तोड़फोड़ की। इस दौरान कई मीडिया के लोगों पर भी हमला किया गया। दंगाइयों ने खुद को बचाने के लिए पत्थरों, छड़ों और यहां तक कि तलवारों का भी इस्तेमाल किया, इस दौरान लोग नकाबपोश और हेलमेट पहने हुए थे। अर्धसैनिक बल के जवानों की मदद की गई। सड़कों पर वाहनों, ईंटों और जले हुए टायरों के ढेर लगे हुए थे, हिंसा के लिए मूक गवाही दी और एक साम्प्रदायिक तिकड़म का सहारा लिया। 

इसके पहले कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया था कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है, उन्होंने लिखा था, 'लगातार फोन पर, व्हाट्सऐप पर, ईमेल पर मुझे हत्या की धमकियां दी जा रही हैं। देश से और विदेशों से सैकड़ों धमकियां लगातार दी जा रही हैं। मैं इससे डरने वाला नहीं हूं।' इसके पहले भी कपिल मिश्रा ने कहा था कि उनको जान से मारने का ऐलान किया जा रहा हैं, धमकियां मिल रही हैं। भाजपा नेता ने कहा था कि बंद सड़कों को खुलवाने को कहना कोई गुनाह नहीं, सीएए का समर्थन कोई गुनाह नहीं, सच बोलना कोई गुनाह नहीं। पिछले दिनों कपिल मिश्रा के खिलाफ उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़काने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई थी। कपिल के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज हुई थीं। एक शिकायत आम आदमी पार्टी की कॉर्पोरेटर रेशमा नदीम और दूसरी वकील हसीब उल हसन ने दर्ज कराई थी। दोनों शिकायतों में कहा गया था कि कपिल ने सड़क पर आकर लोगों को दंगे के लिए भड़काया और पुलिस को भी धमकी दी। इसके पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सरकार से भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।

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