आपकी जान को नोटों से हैं ख़तरा !

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। क्या आपने कभी सोचा है कि रोज़मर्रा के जीवन में काम आने वाली नोटों से भी आपकी जान को ख़तरा हो सकता है। ये ख़तरा सिर्फ आपको बीमार नहीं बल्कि मौत के घाट भी उतार सकता है। यकीन मानिए, नोटों की वजह से अब तक कई हजार लोगों ने अपनी जान गवां दी है। हम बात कर रहे उस ख़रतनाक वायरस की जिसने केवल पड़ोसी देश चीन में ही नहीं बल्कि विश्व के कई अन्य देशों में तबाही मचा रखी है। हालांकि इसके फैलने के माध्यमों को लेकर अभी तक पुख़्ता जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि नोटों यानी करंसी के माध्यम से भी यह वायरस लोगों तक फैल रहा है।

भारत में इसके फैलने की संभावना अधिक

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में जानलेवा कोरोना वायरस के फैलने की संभावना सबसे ज्यादा है। इसके कई कारण हैं, जो हम आपको बताएंगे। सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में नोटों को लेकर कोई खास सुरक्षा नहीं बरती जाती है। इस बात को ऐसे समझें कि विदेशों में नोट केवल कागज के टुकड़े नहीं होते बल्कि नोटों को पूर्ण रूप देने से पहले कई पराबैगनी किरणों के सहारे नोटों का परीक्षण किया जाता है। लेकिन भारत में अभी तक ऐसी पद्धतियों पर काम नहीं किया गया है। इसके अलावा अन्य विकसित देशों में एक निश्चित समय के बाद पुराने या अत्यधिक इस्तेमाल किए गए नोटों को बदल दिया जाता है लेकिन यहां अपने देश में ये प्रचलन भी नहीं है। हालांकि यहां सबसे ज्यादा जरूरी बात यह है कि भारत देश में नोटों को खुले हाथों से हर प्रकार के कार्य क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है। इसका एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण ऐसा है कि हमने कई बार देखा है, मछली एवं मांस की दुकानों में खुले हाथों से नोटों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे किसी भी प्रकार के वायरस के फैलने की संभावनाएं अत्यधिक बढ़ जाती है।

क्लाइमेट से ज्यादा करंसी खतरनाक 

पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन को लेकर कई चिंताएं जताई जा रही है, जो कि कई मामलों में जरूरी भी है। लेकिन आज इस मुकाम पर कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए पुराने करंसी या गंदे नोटों के प्रसार को रोकना उससे कहीं ज्यादा जरूरी होता दिखाई दे रहा है। नोटों के आदान प्रदान से केवल जानलेवा कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि कई छोटे मोटे जीवाणु (बैक्टेरिया), कीटाणु फैल रहे हैं। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बताया गया कि विश्व के अन्य कई देशों की तुलना में भारत में लोग ज्यादा बीमार पड़ते हैं। इस अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया कि मामूली वायरस एवं बैक्टेरिया से संबंधित बीमारियों से लोग ज्यादा पीड़ित होते हैं। ये मामूली वायरस एवं बैक्टेरिया नोटों के ही माध्यम से एक आदमी से दूसरे आदमी तक फैलता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी देश में वायरस को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का यही तरीका है कि इसे नोटों के माध्यम से फैलाया जाए। कोरोना वायरस के भयावह रूप को देखते हुए और इस बात की आशंका से कि नोटों के माध्यम से भी ये वायरस फैल सकता है, भारत सरकार को समय समय पर पुराने नोटों के बदलने की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि आने वाले दिनों में नोटों से फैलने वाले ऐसे किसी भी केमिकल त्रासदी का सामना किया जा सके। 

भारत को हुआ नोटबंदी का फायदा

आपको याद होगा वर्ष 2016 में आठ नवंबर का वो दिन, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी का ऐलान किया था। हालांकि हम आज इस बात पर चर्चा नहीं करेंगे कि नोटबंदी के देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है या कमजोर, लेकिन हम आज की परिस्थिति को देखते हुए यह कह सकते हैं कि नोटबंदी का फैसला आंशिक रूप से सही था। क्योंकि इस दौरान कई पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया। हालांकि जानकारों का मानना है कि देश में सबसे ज्यादा वायरस फैलाने वाले नोट पांच, दस, बीस, पचास एवं 100 रुपए के होते हैं। इसीलिए इन्हें समय - समय पर बदलने की सबसे ज्यादा जरूरत है। बाजार में इन नोटों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। सब्जी वाले से लेकर किराना दुकान तक, नॉनवेज मार्केट से लेकर शॉपिंग मॉल तक, हर जगह पर खुल्ले नोटों का इस्तेमाल किया जाता है। 

मौजूदा हालातों को देखते हुए लोगों को डिजिटल ट्रांजेक्शन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर लोग नोटों को छूने और पकड़ने के बाद हाथ नहीं धोते, जिससे विभिन्न प्रकार के वायरस, और बैक्टेरिया एक आदमी के शरीर से दूसरे आदमी के शरीर के संपर्क में आने की संभावना होती है। उनका कहना है कि कई बार दस, बीस, पचास और 100 रुपए के नोटों को गिनने के लिए भी लोग थूक लगाते हैं, ये वायरस फैलने का एक बड़ा कारण हो सकता है। वे कहते हैं कि क्योंकि हालात अभी नाजूक है और कोरोना वायरस के फैलने के सठीक माध्यमों का पता अभी तक नहीं चल पाया है, इसीलिए हमें सभी सावधानियों का ख्याल रखना चाहिए। चाहे बात साफ - सुधरे रहने की हो या चाहे नोटों के इस्तेमाल के बाद हाथ धोने की हो।

चीन ने बैन की करंसी

कोरोना वायरस के डर से चीन अब बैंक नोट की सफाई करने में जुटा है। बैंक के पास आने वाली नकदी का ट्रीटमेंट अल्ट्रा वायलेट रेज से किया जा रहा है। इसके अलावा बहुत गर्म तापमान में भी रखने से करेंसी नोट को कोरोना के संक्रमण से मुक्त किया जा सकता है। बैंक यह उपाय भी अपना रहे हैं। इसके साथ ही किस इलाके से करेंसी नोट आ रहे हैं, उस हिसाब से उन नोट को ट्रीट करने के बाद सात से 14 दिन के लिए स्टॉक में रख दिया जाता है। वास्तव में रिसर्च में कहा गया है कि कोरोना वायरस को अगर फैलने का मौका नहीं मिले तो किसी निर्जीव वस्तु से इसका असर सात-दस दिन के बाद खुद खत्म हो जाता है। अब तक कोरोना वायरस की वजह से 1800 लोगों की जान जा चुकी है और पूरी दुनिया में कोरोना से कम से कम 70,000 लोग संक्रमित हैं।

कोविड 19 या कोरोना वायरस की वजह से चीन के कई इलाके में डिसइन्फेक्टेंट के साथ सर्जिकल मास्क खत्म हो रहे हैं। चीन में अब तो हालत यह है कि लिफ्ट के बटन पर भी टिश्यु पेपर चिपके हैं। लिफ्ट का उपयोग करने वाले लोगों से भी कहा जा रहा है कि वे बटन को सीधे छूने की जगह टिश्यु पेपर से छुएं। चीन में फैले कोरोना वायरस निमोनिया के प्रकोप के बाद चीन के विभिन्न स्तरीय वित्तीय विभागों ने सिलसिलेवार तरीके से धन मुहैया कराया है। 13 फरवरी तक चीन के विभिन्न जगहों के संबंधित विभागों ने कुल 80.55 अरब चीनी युआन का योगदान दिया है।

चीनी वित्त मंत्रालय के महामारी कार्य नेतृत्व दल के प्रभारी फू चिनलिन ने चीनी राज्य परिषद की एक न्यूज ब्रीफिंग में कहा कि हाल में चीन की केंद्र सरकार ने 17.29 अरब चीनी युआन हुबेई प्रांत और देश के विभिन्न स्थलों की महामारी रोकथाम, हुबेई प्रांत की केंद्रीय बुनियादी संरचनाओं के निवेश में इस्तेमाल किया है। इस तरह नहीं फैलता कोरोना अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के मुताबिक कोरोना वायरस का अस्तित्व सतह पर आने के बाद खत्म हो जाता है। चीन से आने वाले उत्पादों या पैकेट से कोरोना वायरस के फैलने का जोखिम बहुत कम है। घर के पालतू जानवरों जैसे बिल्ली या कुत्ते से कोरोना वायरस नहीं फैलता।

जानवरों से फैलने वाले दूसरे बैक्टीरिया से बचने के लिए पालतू जानवरों को हाथ लगाने के बाद हाथ धोना अपने आप में अच्छी आदत है। शोधकर्ता कह चुके हैं कि चीन के वुहान शहर में किसी जंगली जानवर से कोरोना वायरस दुनिया भर में फैला है। चीन में कोरोना वायरस की महामारी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बुखार के लक्षण वाले मरीज खुद अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य जांच कराएं। प्रशासन ने लोगों को जांच के लिए प्रोत्साहित करने के लिए खुद कोरोना की जांच के लिए अस्पताल पहुंचने वालों को 1000 युआन इनाम देने की घोषणा की है।

वुहान शहर में जनवरी के अंत में लॉकडाउन की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद देश भर के फार्मासिस्टों ने कीटाणुनाशक और सर्जिकल मास्क बेच दिए, जहां से कोविड-19 बीमारी सामने आई थी। कार्यालय की इमारतों में लिफ्ट में टिशू के पैकेट स्थापित किए गए हैं। ताकि लोगों को लिफ्ट के बटन दबाने पर इनका उपयोग कर सके। माना जा रहा है कि तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के रोकथाम की दिशा में ये कार्य किए जा रहे हैं। जबकि राइड-हाइलिंग कंपनी दीदी ड्राइवरों को अपनी कारों को रोजाना कीटाणुरहित करने एवं अत्यधिक साफ-सुधरी रखने के लिए प्रेरित कर रही है।

चीन के केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर फैन युफेई ने पिछले दिनों कहा कि बैंकों से अपील की गई है कि जब भी संभव हो ग्राहकों को नए नोट प्रदान करें। केंद्रीय बैंक ने हुबेई प्रांत में नए नोटों में चार अरब युआन का "आपातकालीन जारी" किया, जो हाल के चंद्र नव वर्ष की छुट्टी से पहले प्रकोप का केंद्र था। फैन ने कहा कि उपायों का उद्देश्य, नकदी का उपयोग करते समय जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सुरक्षित करना है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि हाल के वर्षों में नकदी पर मोबाइल भुगतान पसंद करने वाले चीनी लोगों की बढ़ती संख्या के साथ केंद्रीय बैंक के कीटाणुशोधन कार्य पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ेगा। ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में, लगभग तीन-चौथाई चीनीओं ने एक इप्सोस सर्वेक्षण को बताया कि वे 100 युआन से अधिक नकदी का उपयोग किए बिना पूरे महीने जीवित रह सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कोविड -19 को संक्रमित रोगियों के साथ सीधे संपर्क के अलावा दूषित वस्तुओं के माध्यम से फैलाया जा सकता है।

क्या कहता है हेक्सगन शोध

हेक्सगन के शोध के अनुसार, ऐसे समय में जब विभिन्न सरकारें और स्वास्थ्य निकाय अभी भी उपन्यास कोरोनो वायरस 2019 के प्रसारण के विभिन्न तरीकों का पता लगा रहे हैं, कुछ सावधानियाँ बरतनी जरूरी है। उनमें से एक वस्तुओं, लोगों, सतहों, एट सभी के साथ संपर्क से बचने के प्रयास किए जाने चाहिए। घर पर अलगाव का विकल्प संभव नहीं है क्योंकि लोगों को अभी भी भोजन खरीदने या आवश्यक खरीद के लिए बाहर जाने की जरूरत हो रही है, और उन जगहों पर जहां यह सामान्य रूप से व्यापार है, लगभग अपरिहार्य रूप से फैल रहा है। सिक्के, कागज के पैसे, एटीएम, कार्ड स्वाइप मशीन और यहां तक कि प्लास्टिक कार्ड जैसे भी हों, वित्तीय लेनदेन से बचा नहीं जा सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में जोखिम से बचने के लिए अब कैशलेस अर्थव्यवस्था के विस्तार के बारे में बहस होनी चाहिए। नोट, सिक्के, और प्लास्टिक कार्ड, विनिमय के माध्यम के रूप में दैनिक जीवन में इसके लगातार प्रचलन के कारण, इस कोरोना वायरस द्वारा आसानी से दूषित हो सकते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, भारत, और अन्य देशों (शर्मा और सुंबाली, 2014) के पिछले अध्ययनों से पता चला है कि 70-94 प्रतिशत बैंकनोट और सिक्के विभिन्न बैक्टीरिया और सतह पर वायरस को फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। यहां तक कि मुद्रा की गिनती करने वाली मशीनें घातक मलिन बस्तियों को प्रभावित कर रही थीं। यदि यह पर्याप्त नहीं था, तो क्रेमर एट अल द्वारा किए गए एक और अध्ययन 2006 में, प्रयोगशाला सिमुलेशन का उपयोग करते हुए निष्कर्ष निकाला कि बैक्टीरिया और वायरस एक से तेरह दिनों तक बैंकनोट्स या सिक्कों की सतह पर जीवित रह सकते हैं।

करेंसी नोट और सिक्कों से बचना पर्याप्त नहीं हो सकता है; प्लास्टिक कार्ड और कार्ड स्वाइप मशीनें भी दूषित होने से प्रतिरक्षित नहीं हो सकती हैं। कार्ड को कभी साफ नहीं किया जाता है और उपयोगकर्ता को भुगतान माध्यमों पर पिन डालने की आवश्यकता होती है, जिसे हर उपयोग के बाद कीटाणुरहित नहीं किया जा सकता है। जर्मनी के रुहर-यूनिवर्सिटिक बोचुम में मेडिसिन संकाय में प्रोफेसर ईक स्टाइनमन ने द जर्नल ऑफ हॉस्पिटल इन्फेक्शन में एक नया विश्लेषण प्रकाशित किया है। प्रोफेसर स्टीनमैन ने विभिन्न प्रकार के कोरोनावायरस के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह निष्कर्ष निकाला है कि कई उपभेदों को कांच, प्लास्टिक या धातु जैसी सतहों पर नौ दिनों तक रह सकते हैं।

सरकारें और सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन लोगों को संपर्क रहित भुगतान प्रणाली का उपयोग करने के लिए शिक्षित कर सकते हैं जो डिजिटल वॉलेट्स, क्यूआर कोड स्कैन या पॉइंट एंड पे का उपयोग करके भुगतान की सुविधा प्रदान करते हैं। हेक्सजेन के अध्ययन के अनुसार, संपर्क रहित भुगतान फिनटेक क्षेत्र का एक हिस्सा है, जिसने निवेश में 46 बिलियन डॉलर आकर्षित किए, इसमें से 10 प्रतिशत भुगतान प्रणाली और पर्स में विशेषज्ञता वाले उद्यमों में किए गए। यदि सरकार मौजूदा प्रणालियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे संपर्क रहित भुगतान को तुरंत नहीं अपनाती है, तो यह असामान्य रूप से बढ़ सकता है। यह बैकएंड सिस्टम को मजबूत करने और नए उपभोक्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए आगे धन उत्सर्जन करने की ओर ले जाएगा। इससे आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा लोग भुगतान के लिए वॉलेट सेगमेंट के उपयोग को अपनाएंगे। संस्थापक और हांगकांग स्थित फिनटेक यूनिकॉर्न, टीएनजी वॉलेट के अध्यक्ष एलेक्स कोंग कहते हैं, संक्रमण को जल्द से जल्द खत्म करने की दिशा में, सरकारों के लिए न केवल नई प्रक्रियाओं को अपनाना अनिवार्य हो गया है बल्कि संपर्क रहित भुगतान और लेनदेन के उपयोग को सक्रिय रूप से बढ़ाना भी एक बड़ी चुनौती है। यह एक सुरक्षित लेनदेन विकल्प प्रदान करेगा क्योंकि हम इस जानलेवा कोरोन वायरस के साथ लड़ने की प्रक्रिया को जारी रख रहे हैं। पेमेंट्स और डिजिटल वॉलेट कंपनियां जानलेवा कोरोना वायरस 2019 के प्रसार को कम करने में मदद कर सकती हैं और वैश्विक स्वास्थ्य निकायों को इस ज्वार को कम से कम नुकसान पहुंचाने में मदद कर सकती हैं।

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