ऐतिहासिक प्रेम कहानी का प्रतीक है चित्तौड़गढ़ किला

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। भारत के सबसे विशाल किला है चित्तौड़गढ़ किला। इस किले का निर्माण 7वीं शताब्दी में किया गया था।

यह भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। साथ ही इस किले को यूनेस्को की हेरिटेज साइट में सूचीबद्ध किया है। इस किले में मुख्य आकर्षण का केंद्र प्राचीन सफेद रानी तीन मंजिला पद्मावती का महल है जो की कमल कुंड के किनारे निर्मित है। यह किला अपने आप में विशालता का प्रतीक है साथ ही इसकी शिल्‍पकला और वास्‍तुकला भी हैरान करने वाली है। इस किले में सजावटी स्तंभों, भूमिगत तहखानों के साथ ही आकर्षक वास्तुशिल्प किया गया है जो किसी का भी मन मोह सकता है। बता दें की चित्तौड़गढ़ किला राजा रतन रावल सिंह और रानी पद्मिनी की ऐतिहासिक प्रेम कहानी का प्रतीक माना जाता है। रानी पद्मिनी को राजा ने स्वयंवर के दौरान बहुत कठिन परीक्षा से प्राप्त किया था और उसके बाद अपनी प्रिय रानी बनाकर चित्तौड़गढ़ के किले में लाए। उनकी प्रेम कहानी किले की दीवारों में गुंजायमान है। जिसे आप किले में जाकर देख सकते है।

यात्रा से संबंधी जरूरी जानकारी

वयस्कों के लिए 20 रूपये और 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 15 रूपये

सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक रोजाना

अगर आप राजस्थान के सबसे बड़े किलों में से एक चित्तौड़गढ़ किले की सैर के लिए जाना चाहते हैं तो बता दें कि यहां की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय साल में अक्टूबर से लेकर मार्च के महीने तक का होता है। अगर आप किले की सैर करने जा रहे हैं तो शाम के समय जाएं क्योंकि शाम के समय मौसम ठंडा होता है और भीड़ भी कम होती है।

चित्तौड़गढ़ उदयपुर शहर से करीब 112 किमी की दूरी पर, राजस्थान में गणभेरी नदी के पास एक ऊंचे ढलान पर स्थित है। इस किले तक जाने का सबसे अच्छा विकल्प बस से या फिर उदयपुर शहर से टैक्सी किराये पर लेकर यात्रा करना है।

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