कोरोना वायरस : ग्लोबल हेल्थ इमर्जेंसी कैसे बना ?

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। एक स्वास्थ्य समस्या चीन से शुरू हुई और आज धीरे - धीरे विश्व के कई देशों में फैल रही है। इसका नाम जितना सरल है, इसका असर उतना ही खतरनाक है। यह जानलेवा बन गया है। इस समस्या या इस जानलेवा बीमारी का नाम कोरोना वायरस है।

चीन के वुहान शहर से शुरू हुए इस कोरोना वायरस के आतंक की चपेट में विश्व के कई देशों के नागरिक आ चुके हैं। ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कन्सर्न (पीएचईआईसी) टर्म से जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की ओर से ऐसी इमरजेंसी किसी ऐसे आपातकाल पर की जाती है जब दुनिया में स्वास्थ्य जोख‍िम का माहौल होता है। डब्लूएचओ की तय परिभाषा के अनुसार जब कोई खास इलाका किसी गंभीर स्वास्थ्य खतरों से जूझ रहा होता है तब उस शहर, राजधानी, राज्य या देश में हेल्थ इमरजेंसी लागू की जाती है। लेकिन, जब ये समस्या ग्लोबल स्तर पर फैलने का खतरा होता है तो पीएचईआईसी का मुद्दा बन जाता है। बीते कुछ वर्षों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सार्स, बर्डफ्लू, स्वाइन-फ्लू, इबोला और ज़ीका वायरस की वजह से मानव जाति को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वैज्ञानिकों ने टीके विकसित करके इनका ख़तरा तो कम कर दिया है। लेकिन कोरोना वायरस की अभी तक कोई दवा या टीका नहीं है। कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर में चिंता की असल वजह यही है और उम्मीद की जा रही है कि शोधकर्ता जल्द ही इसका समाधान खोज निकालेंगे। तब तक भारत जैसे देशों के पास एहतियात के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग का कहना है कि इस वायरस का संक्रमण काल 10 दिन होता है और इन दिनों में इससे बचाव के लिए विशेष ख्याल रखना पड़ता है। जापान में पहले ही इस वायरस से संक्रमित दो मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। दरअसल, चीन या फिर वहां के वुहान शहर से दूसरे देशों में आने वाले यात्रियों के जरिए ही यह वायरस अन्य देशों में कदम रख  रहा है। हॉगकॉग और भारत में चीन से लौटे यात्रियों के जरिए ही इस वायरस ने कदम रखा है। इसी वजह से चीन पहले ही अपने 12 शहरों के 3.5 करोड़ से ज्यादा निवासियों के यात्रा पर प्रतिबंध लगा चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थ इमरजेंसी तमाम तरह के कारणों जैसे कोई बीमारी फैलने प्राकृतिक आपदा जैसे भू स्खलन, भूकंप आदि के आने से स्वास्थ्य के बदतर हालातों का अंदाजा लगाते हुए लागू की जाती है। वहीं ग्लोबल हेल्थ एमरजेंसी डब्लूएचओ किसी वायरस के संक्रमण को लेकर ही घोषित कर सकती है। जब उस बीमारी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा पैदा हो जाता है, तभी पब्ल‍िक हेल्थ इमरजेंसी या ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लागू की जाती है। हाल ही में दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के खतरनाक स्तर का लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव को देखते हुए हेल्थ इमरजेंसी लागू की गई थी। इस इमरजेंसी के दौरान आम लोगों को कई प्रोटोकॉल फॉलो करने होते हैं। फिलहाल डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के देखकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। कोरोना वायरस की वजह से चीन में अब तक तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कई अन्य देशों में करोना वायरस से संक्रमित मरीज मिले हैं।

क्यों जरूरी होते हैं प्रोटोकॉल

ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के हालात में दुनियाभर के देशों को उस बीमारी से बचाव और उसे फैलने से रोकने के उपाय करने होते हैं। फिलहाल भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज की पहचान की गई है। केरल और दिल्ली में भी इस वायरस से संक्रमित संदिग्ध मरीज मिले हैं। कोरोना वायरस को लेकर चीन के कई शहर लॉकडाउन हैं। बता दें कि कोराना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए डब्लूएचओ ने आपात बैठक बुलाई थी। बैठक में कोरोना वायरस को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का फैसला लिया गया। डब्लूएचओ के सभी 196 सदस्य देश इस प्रोटोकॉल और गाइडलाइन को फॉलो करते हैं।

कैसे डब्लूएचओ कोरोना वायरस से करेगी मुकाबला

ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के लिए डब्लूएचओ के पास आकस्मिक फंड होता है, जिसका इस्तेमाल वायरस प्रभावित इलाकों में किया जाता है। फिलहाल डब्लूएचओ के पास कोरोना वायरस से निपटने के लिए 1.8 मिलियन डॉलर का फंड है। ये पैसा दुनिया के कई देशों से आया है। यूके ने पिछले साल सबसे ज्यादा 11 मिलियन यूएस डॉलर की रकम डब्लूएचओ को दी थी। कोराना वायरस के बढ़ते हुए मामलों को देखकर डब्लूएचओ को इससे निपटने के लिए और भी फंड दिया जा सकता है। डब्लूएचओ के गाइडलाइन में कई तरह के निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इसमें ट्रैवल को लेकर नियम कायदे भी शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में सफर को लेकर डब्लूएचओ विशेष गाइडलाइन जारी करती है। प्रभावित इलाकों के बॉर्डर एरिया और इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर लोगों को स्क्रीनिंग की जाती है, ताकि वायरस के असर वाले लोगों की पहचान करके उनके अलग रहने की व्यवस्था की जाए। डब्लूएचओ आमतौर पर ट्रैवल पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाती। संस्था की कोशिश होती है कि इंटरनेशनल ट्रैवल में हालात सामान्य ही रहें। बीते हफ्ते 25 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नोवेल कोरोना वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान के शरीर में फैल रहा है या नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन, जापान, सिंगापुर, थाईलैंड व कोरिया स्थित अपने विभिन्न केंद्रो को और अधिक सर्तकता बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इन केंद्रों को वहां की सरकारों व स्वास्थ्य विभाग के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने को भी कहा गया है। डब्लूएचओ का कहना है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। महामारी विज्ञान के अनुसार, हमारे अध्ययन में ये स्पष्ट किया गया कि नौ में से आठ रोगी वुहान में हुआनन सीफूड बाजार के संपर्क में आए। इस अध्ययन के अनुसार ये भी बताया गया कि वे बाजार में संक्रमण स्रोत के निकट संपर्क में रहे होंगे, जिसके वजह से वे सीधे इससे संक्रमित हुए हैं। एक मरीज कभी भी बाजार नहीं गया था, हालांकि वह अपनी बीमारी की शुरुआत से पहले बाजार के पास एक होटल में रुका था। यह अध्ययन या तो संभावित संचरण का सुझाव देती है या फिर रोगी वर्तमान में अज्ञात स्रोत से संक्रमित था, यह स्पष्ट करता है। संक्रमित परिवार के सदस्यों और चिकित्सा कर्मचारियों के समूहों के साक्ष्य ने अब मानव-से-मानव संचरण की उपस्थिति की पुष्टि की है। यह संक्रमण एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बना हुआ है। 12 विशेष रूप से यह प्रकोप चीन के लोगों में तेजी से फैल रहा है। वसंत महोत्सव यात्रा भीड़, जिसके दौरान लाखों लोग चीन की यात्रा करने के लिए तैयार थे। एक प्ररूपी आरएनए वायरस के रूप में, कोरोना वायरस के लिए औसत विकास दर प्रति वर्ष प्रति साइट चक्र के दौरान उत्पन्न होने वाले उत्परिवर्तन के साथ प्रति वर्ष प्रति साइट 10-4 न्यूक्लियोटाइड प्रतिस्थापन होती है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि यहां वर्णित विभिन्न रोगियों के 2019-एनसीओवी के अनुक्रम लगभग समान थे, जिनमें 99 · 9% से अधिक अनुक्रम पहचान थी। इस खोज से पता चलता है कि 2019-एनसीओवी एक बहुत ही कम समय के भीतर एक स्रोत से उत्पन्न हुआ था और अपेक्षाकृत तेजी से पाया गया था। हालाँकि, जैसे-जैसे वायरस अधिक व्यक्तियों तक पहुँचता है, उत्परिवर्तन की निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है। मालूम हो कि चमगादड़ के महत्व के बावजूद, कई तथ्य बताते हैं कि एक अन्य जानवर चमगादड़ और मनुष्यों के बीच एक मध्यवर्ती मेजबान के रूप में कार्य कर रहा है। सबसे पहले, प्रकोप पहली बार दिसंबर 2019 के अंत में रिपोर्ट किया गया था, जब वुहान में सबसे अधिक बैट प्रजातियां हाइबरनेटिंग कर रही थी। दूसरा, हुआनन सीफूड मार्केट में कोई चमगादड़ नहीं बेचा गया या नहीं पाया गया, जबकि विभिन्न गैर-जलीय जानवर (स्तनधारियों सहित) खरीद के लिए उपलब्ध थे। तीसरा, 2019-एनसीओवी और उसके करीबी रिश्तेदारों की बैट-एसएलड-सीओवीजेडसी45 और बैट-एसएल-सीओवीजेडएक्स21 के बीच अनुक्रम पहचान 90% से कम थी, जो उनके बीच अपेक्षाकृत लंबी शाखा में परिलक्षित होती है। इसलिए, बैट-एसएल-सीओवीजेडसी 45 और बैट-एसएल- सीओवीजेडएक्ससी 21 2019-एनसीओवी के प्रत्यक्ष पूर्वज नहीं हैं। एसएआरएस-सीओवी और एमईआरएस-सीओवी, दोनों में चौथा, चमगादड़ों ने प्राकृतिक जलाशय के रूप में काम किया, जिसमें एक अन्य जानवर (एसएआरएस- सीओवी35 के लिए नकाबपोश ताड़ की नाल) और एमईआरएस-सीओवी के लिए ड्रोमेडरी ऊंट, 36 एक मध्यवर्ती मेजबान के रूप में अभिनय करते हैं, जिसमें टर्मिनल होस्ट के रूप में मानव होते हैं। । इसलिए, मौजूदा आंकड़ों के आधार पर, ऐसा लगता है कि 2019-एनसीओवी के कारण वुहान का प्रकोप शुरू में चमगादड़ों द्वारा भी उत्सर्जित किया जा सकता है, और हो सकता है कि वर्तमान में हुआनन सीफूड मार्केट में बेचे गए अज्ञात जंगली जानवर के माध्यम से मनुष्यों को प्रेषित किया गया हो। सरबेको वायरस का यहां विश्लेषण किया गया। हमारे परिणाम बताते हैं कि पुनर्संयोजन की घटनाएं जटिल हैं और 2019-एनसीओवी की तुलना में बैट कोरोना वायरस में होने की अधिक संभावना है। इसलिए, इसकी घटना के बावजूद, पुनर्संयोजन शायद इस वायरस के उभरने का कारण नहीं है। हालांकि यह निकटता बदल सकती है यदि अधिक निकट से संबंधित पशु वायरस की पहचान की जाती है।

अमेरिका ने बनाया है कोरोना वायरस : रूस 

वुहान कोरोना वायरस क्रोध की उत्पत्ति पर बहस के रूप में, नई आवाज़ें चर्चा में शामिल हो रही हैं। रूसी मीडिया के सूत्रों का कहना है कि यह जानलेवा खतरनाक बीमारी है, जिसे अनंतिम रूप से 2019-एनसीओवी के रूप में जाना जाता है, यह चीन में तोड़फोड़ करने के लिए बनाया गया एक अमेरिकी निर्मित जैव हथियार हो सकता है। मुख्यधारा के रूसी मीडिया पर दावों का महत्वपूर्ण प्रसारण हुआ है और यह क्षेत्र में अमेरिकी हितों को बदनाम करने के लिए व्लादिमीर पुतिन के प्रयासों का हिस्सा हो सकता है। यह एक ऐसा समय है जब तेजी से फैलने वाले इस प्रकोप ने 170 लोगों की मौत के साथ लगभग 8,000 से अधिक लोगों को संक्रमित किया है। रूस ने खतरों के जवाब में चीन के साथ अपनी सीमा को बंद कर दिया है। 

क्या कोरोनवायरस एक अमेरिकी जैव-हथियार है?

संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच हालिया तनाव सर्वविदित हैं। संघर्ष को एक स्थापित महाशक्ति और उसके प्रतिद्वंद्वी के बीच एक महान शक्ति संघर्ष के रूप में देखा जाता है। संघर्ष की गुंजाइश व्यापार युद्ध से लेकर दक्षिण चीन सागर और 5 जी इंटरनेट के विवादों तक है। रूस के कुछ लोगों का मानना है कि इन तनावों ने अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संयुक्त राज्य की सरकार को कठोर कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया है। जैविक और रासायनिक हथियारों पर यूनाइटेड नेशन के एक पूर्व सदस्य इगोर निकुलिन का दावा है कि उन्हें चीनी सहकर्मियों द्वारा संपर्क किया गया था जो मानते हैं कि कोरोना वायरस मानव निर्मित है। निकुलिन बताते हैं, यह सब तोड़फोड़ जैसा लग रहा है। सबसे पहले, यह वुहान का शहर है - यह देश का केंद्र है, एक प्रमुख परिवहन केंद्र है, और अब चीनी नव वर्ष - सैकड़ों चीनी लाखों देश भर में रिश्तेदारों, परिचितों, और इतने पर यात्रा करने वाले थे। निकुलिन ने और भी आश्चर्यजनक बात कही कि हो सकता है अमेरिकी निगमों ने इलाज से पैसा बनाने के लिए वुहान कोरोना वायरस बनाया है। उसका कहना है, यह अमेरिकी निगमों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो केवल लाभ के लिए इस प्रकार की नई बीमारियों का विकास कर रहे हैं। या शायद खुद अमेरिकियों के लिए, क्योंकि अमेरिका एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास दुनिया भर में 400 सैन्य जैविक प्रयोगशालाएं हैं, न केवल रूस के आसपास बल्कि चीन के आसपास, मलेशिया में, इंडोनेशिया में, फिलीपींस में - अमेरिकी सेना हर जगह है। निकुलिन इन चरम दावों की पुष्टि करने वाला एकमात्र उल्लेखनीय रूसी नहीं है। राजनेता भी अमेरिका को कोसने के अवसर का उपयोग कर रहे हैं। रूसी एलडीपीआर के एक नेता, व्लादिमीर ज़िरिनोव्स्की ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमेरिका इस प्रक्रिया में टन पैसा बनाते हुए चीनी आर्थिक शक्ति को कम करने के लिए संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा, फार्मासिस्ट 2020 में अरबपति बन जाएंगे, और हर कोई जल्दी से सब कुछ भूल जाएगा। चीन के कुछ लोग इन सुझावों को गंभीरता से लेते हैं। 

रूस कोरोना वायरस खतरा के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहा है

रूस के प्रधान मंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने वुहान के कोरोना वायरस को देश में फैलने से रोकने के लिए रूस की सुदूर पूर्वी सीमा को बंद करने का आदेश दिया है। मॉस्को टाइम्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच 25 क्रॉसिंग में से 16 को आधी रात 31 जनवरी तक बंद कर दिया जाएगा। अब तक, रूस में वुहान के कोरोना वायरस के कोई ज्ञात मामले सामने नहीं आए हैं।

कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था पर असर

सवाल ये उठता है कि कोरोना वायरस से आर्थिक परिणाम कितने गंभीर होंगे और उनका असर कहां तक होगा? चूंकि कोरोना वायरस का प्रसार अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए अर्थशास्त्री फ़िलहाल कोई आंकड़े देने से एहतियात बरत रहे हैं। अतीत में इस तरह की घटनाओं से हुए आर्थिक नुक़सान को देखते हुए हम अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के किसी संभावित असर के बारे में बता सकते हैं। ज़्यादा पुरानी बात नहीं है, साल 2002-03 के दौरान सार्स की महामारी फैली थी और इसकी शुरुआत भी चीन में हुई थी। फ़िलहाल तो चीन को थोड़ा आर्थिक नुक़सान हुआ ही है। देश के कुछ हिस्सों में यात्रा प्रतिबंध लागू हैं और वो भी ऐसे वक़्त में जब चीनी नव वर्ष का समय है और लोग बड़ी संख्या में यात्राएं करते हैं। इस लिहाज़ से चीन के पर्यटन व्यवसाय को झटका लग ही चुका है। कोरोना वायरस से मनोरंजन और तोहफों पर उपभोक्ताओं के ख़र्च पर असर होगा। मनोरंजन क्षेत्र की बात करें तो बहुत से लोग घर से बाहर जाकर ऐसी किसी गतिविधि में हिस्सा लेने से बचेंगे जिनसे उनके संक्रमण की ज़द में आने का ख़तरा हो। इसमें कोई शक नहीं कि कई लोगों ने पहले से निर्धारित अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए होंगे। हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कोरोना वायरस का प्रसार जिस वुहान शहर से शुरू हुआ वो चीन का एक अहम ट्रांसपोर्ट हब है। किसी भी ऐसे कारोबार के लिए जहां लोगों और वस्तुओं के आवागमन की ज़रूरत पड़ती हो, यात्रा प्रतिबंध एक बड़ी समस्या होती है। इससे इंडस्ट्री के सप्लाई चेन पर पर असर पड़ता है, कुछ चीज़ों की डिलेवरी में बाधा आती है और कुछ चीज़ें ज़्यादा महंगी हो जाती हैं। अगर लोग काम के लिए सफ़र न कर सकें या न करना चाहें तो इससे कारोबार का नुक़सान अलग से होता है। कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों के इलाज में होने वाला ख़र्च का भार सरकारी और निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को वहन करना पड़ेगा। चीन के बाहर काफी कुछ इस पर निर्भर करेगा कि कोरोना वायरस का असर कितना होता है। अगर ये महामारी कहीं और फैलती है तो इसका थोड़ा असर होना तय है हालांकि ये उतने बड़े पैमाने पर नहीं होगा। अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव काफी कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि ये वायरस कितनी आसानी से फैल सकता है और इससे संक्रमित होने वाले लोगों की मौत की आशंका किस हद तक है। अच्छी बात ये है कि इससे संक्रमित होने वाले काफी लोगों में पूरा सुधार देखा गया है, हालांकि इसके दुखद अपवाद भी रहे हैं। अक्सर ये देखा गया है कि आर्थिक समस्याओं को लेकर प्रतिक्रिया देने में वित्तीय बाज़ार ज़्यादा देरी नहीं करते। क्योंकि यहां बिज़नेस करने वाले ट्रेडर्स भविष्य के घटनाक्रम को भांपकर ही चीज़ों पर दांव लगाते हैं। कोरोना वायरस का कुछ हद तक नकारात्मक असर दुनिया के शेयर बाज़ारों पर ख़ासकर चीन में देखने को मिला है। लेकिन फिलहाल अभी हालात चिंताजनक नहीं हैं। यहां तक कि शंघाई कॉम्पोज़िट इंडेक्स भी अपने पिछले छह महीने के रिकॉर्ड से उच्च स्तर पर है।परेशान करने वाली इन बातों को छोड़ भी दें तो अर्थव्यवस्था का एक क्षेत्र ऐसा है जिसके लिए ये एक अवसर की घड़ी है और उसे इसका फ़ायदा हो सकता है। वो है दवा उद्योग। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए जो पहली दवा उपलब्ध है, वो इसके लक्षणों से राहत देने वाली दवा है। लंबे समय में ये मुमकिन है कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए वैक्सीन विकसित करना मुनाफ़े का कारोबार बन जाए। जॉनसन एंड जॉनसन के चीफ़ साइंटिफिक ऑफ़िसर पॉल स्टोफ़ेल्स ने बीबीसी को बताया कि उनकी टीम ने इस वैक्सीन पर बुनियादी अध्ययन पहले ही कर लिया है। उन्हें लगता है कि साल भर के भीतर इस वैक्सीन की बात साकार हो सकती है। संक्रमण से बचने के लिए सर्जिकल मास्क और दस्तानों की मांग में भारी उछाल देखा गया है। ऐसी दवाइयां और सर्जिकल मास्क और ग्लव्स जैसे चीज़ें बनाने वाली चीनी कंपनियों के स्टॉक वैल्यू में तेज़ उछाल दर्ज किया गया है।

क्या है कोरोना वायरस?

कोरोना वायरस एक तरह का संक्रमित होने वाला वायरस है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस वायरस को लेकर लोगों को चेता चुका है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के जरिए फैलता है। दुनिया के तमाम देशों में यह वायरस चीन से आने वाले यात्रियों के जरिए ही पहुंच रहा है। इस वायरस के लक्षण निमोनिया की ही तरह हैं। यह वायरस कोरोनो वायरस परिवार से संबंध रखने वाला वायरस है। कोरना वायरस जानवरों में भी पाया जाता है। समुद्री जीव-जंतुओं के जरिए यह वायरस चीन के लोगों में फैला। दक्षिण चीन में समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों को सबसे पहले इस वायरस ने चपेट में लिया, जिनमें वुहान शहर है। दक्षिण चीन के बाजार जहां काफी मात्रा में समुद्री जीव मिलते हैं, उनके जरिए यह वायरस लोगों में फैला। इस बाजार में समुद्री जीव जिंदा भी मिलते हैं और उनका मांस भी मिलता है। यहीं से इस वायरस ने चीन के निवासियों को अपनी चपेट में लिया।

कोरोना वायरस के लक्षण

बुखार

सांस लेने में दिक्कत

सर्दी-जुकाम 

खांसी

नाक का लगातार बहना

सिर में दर्द

ऑर्गन  फेल्योर (अंगों का काम करना बंद )

कोरोना वायरस में किसी भी तरह की कोई एंटीबायोटिक काम नहीं करती है। फ्लू में दी जाने वाली एंटीबायोटिक भी इस वायरस में काम नहीं करती है। अस्पताल में भर्ती कराए जाने वाले व्यक्ति के अंगों को फेल होने से बचाने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ दिया जाता है। जानवरों से फैलने वाले कोरोना वायरस सिवीर एक्यूट रेस्परटॉरी सिंड्रोम (गंभीर श्वसन लक्षण) और मिडिल इस्टर्न रेस्परटॉरी सिंड्रोम दोनों तरह का होता है। मिडिल इस्टर्न रेस्परटॉरी सिंड्रोम (मेर्स) अफ्रीकी और शियाई ऊटों के जरिए मनुष्य में फैलता है। चमगादड़ ऐसा जीव है जिसमें सिवीर एक्यूट रेस्परटॉरी सिंड्रोम (गंभीर श्वसन लक्षण) और मिडिल इस्टर्न रेस्परटॉरी सिंड्रोम दोनों तरह का कोरोनो वायरस होता है। ऐसे में अभी पता नहीं चला है कि यह कोरोनो वायरस सांपों या चमकादड़ों में से किसके जरिए इंसानों में फैला है क्योंकि यह एक अलग तरह का कोरोनो वायरस है। चीन में सबसे पहले सिवीर एक्यूट रेस्परटॉरी सिंड्रोम (गंभीर श्वसन लक्षण) साल 2002 में फैला था। उस वक्त यहां से यह वायरस 37 देशों में फैला था और आठ हजार से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आए थे और 750 से ज्यादा मौतें हुईं थी।

चीन से बाहर कैसे मचा रहा है तबाही?

चीन से बाहर भी इस वायरस के मरीजों की पुष्टि होने लगी है। अमेरिका में रविवार को इस वायरस से संक्रमित पांचवें मरीज की पुष्टि हुई है। वहीं सिंगापुर के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना वायरस से ग्रसित चार मरीजों की पुष्टि हुई है। ऑस्ट्रेलिया में इस वायरस से संक्रमित चार मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं फ्रांस में कोरोना वायरस से संक्रमित दो मरीजों की पुष्टि हुई है। नेपाल का भी कहना है कि वहां भी कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज मिला है। इस तरह यह वायरस चीन से बाहर विश्व के कई देशों के लिए दहशत बन रहा है। 

गंभीर है कोरोना वायरस : कोरोना वायरस के कारण अमूमन संक्रमित लोगों में सर्दी-जुक़ाम के लक्षण नज़र आते हैं लेकिन असर गंभीर हो तो मौत भी हो सकती है।यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग के प्रोफ़ेसर मार्क वूलहाउस का कहना है, जब हमने ये नया कोरोना वायरस देखा तो हमने जानने की कोशिश की कि इसका असर इतना ख़तरनाक क्यों है। यह आम सर्दी जैसे लक्षण दिखाने वाला नहीं है, जो कि चिंता की बात है।

वायरस की उत्पत्ति : यह बिल्कुल नई क़िस्म का वायरस है। ये एक जीवों की एक प्रजाति से दूसरे प्रजाति में जाते हैं और फिर इंसानों को संक्रमित कर लेते हैं। इस दौरान इनका बिल्कुल पता नहीं चलता। नॉटिंगम यूनिवर्सिटी के एक वायरोलॉजिस्ट प्रोफ़ेसर जोनाथन बॉल के मुताबिक़, यह बिल्कुल ही नई तरह का कोरोना वायरस है। बहुत हद तक संभव है कि पशुओं से ही इंसानों तक पहुंचा हो। सार्स का वायरस बिल्ली जाति के एक जीव से इंसानों तक पहुंचा था। हालांकि चीन की ओर से अभी तक इस मूल स्रोत के बारे में कुछ भी पुष्ट तौर पर नहीं कहा गया है।

आखिर चीन ही क्यों : प्रोफ़ेसर वूलहाउस का कहना है कि जनसंख्या के आंकड़ों और घनत्व के कारण यहां के लोग जानवरों के संपर्क में जल्दी आ जाते हैं। वो कहते हैं, कोई हैरानी नहीं है कि चीन में ही आने वाले समय में कुछ ऐसा ही सुनना को मिले।

इसका फैलना आसान : चीन के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं जिससे ये पुष्टि होती है कि यह वायरस एक शख़्स से दूसरे को भी होता है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा कहने के पीछे वजह ये है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में भी संक्रमण के लक्षण नज़र आ रहे हैं। इस मौजूदा वायरस को लेकर यही सबसे बड़ा डर है कि इससे सबसे पहले फेफड़े ही प्रभावित हो रहे हैं। इस वायरस का संक्रमण होते ही संक्रमित शख़्स को खांसी और नज़ला की शिकायत हो जाती है। हालांकि अभी जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो ही अंतिम आंकड़े हों ऐसा नहीं कहा जा सकता।

कैसे काम कर रहे हैं अधिकारी : संक्रमित लोगों की एकल कक्ष में और अकेले में जांच की जा रही है ताकि इस बीमारी को और बढ़ने से रोका जा सके। जिन-जिन जगहों से यात्री गुजरेंगे उन-उन जगहों पर थर्मल स्कैनर्स लगाए गए हैं ताकि जैसे ही किसी के बुख़ार की पुष्टि हो उसकी जांच की जा सके। इसके अलावा सी-फ़ूड मार्केट को फिलहाल के लिए बंद कर दिया गया है ताकि सफ़ाई बनी रहे और संक्रमण को कम किया जा सके। यह व्यवस्था केवल चीन में ही नहीं की गई है। चीन के अलावा एशिया के कई दूसरे देशों और अमरीका में भी इस तरह की व्यवस्था की गई है ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।

संक्रमण को कम करने के उपाय

डब्लूएचओ के मुताबिक, कोरोना वायरस से बचने के लिए अपने हाथों को साबुन, पानी या अल्कोहल युक्त हैंड रब से अच्छे से साफ करें।

खांसते, छींकते वक्त नाक और मुंह को किसी टिश्यू या रूमाल से ढ़कें, क्योंकि यह वायरस छींक से भी फैलता है।

सर्दियों के मौसम में जिन लोगों को सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारी है उनसे दूरी बनाकर रखें। अगर, घर में किसी को फ्लू जैसी समस्या हो तो उन्हें तुरंत दवाई दिलवाएं या डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर भोजन में चिकन, फिश, रॉ मीट या अंडे का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसे अच्छे से पकाएं।

जंगली और खेतों में रहने वाले जानवरों के साथ असुरक्षित संपर्क न बनाएं।

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