साक्षात्कार : ज्वेल्स ऑफ कर्नाटक पुस्तक से

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कर्नाटक के रत्नों का सम्मान करने के उद्देश्य से परिवर्तन समाचार पत्र द्वारा ज्वेल्स ऑफ कर्नाटक नामक पुस्तक का विमोचन किया जाना है। लेकिन इससे पहले हम राज्य के प्रत्येक रत्नों के व्यक्तिगत उपलब्धियों के बारे में और उनकी सफलता की कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं। आज के अंक में चर्चित हास्य कवि एवं कुशल मंच संचालक : डॉ. सुनील तरूण की उपलब्धियों और सामाजिक क्षेत्र में उनके बारे बताया जा रहा है।

बेंगलूरु, (परिवर्तन)। मृदु भाषी, हँसमुख और सरल स्वभाव वाले मगर धुन के पक्के डॉ सुनील 'तरुण' बेंगलूरू में बसे प्रवासी उत्तर भारतीयों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी अपनी एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। डॉ सुनील 'तरुण' बेंगलूरू के ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत के एक जाने-माने हास्य कवि और कुशल मंच संचालक हैं।  उनकी कविताओं का आकाशवाणी बेंगलूरू और विभिन्न टी.वी.चैनलों पर भी अक्सर प्रसारण होता रहता है। वो बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में आयोजित एक काव्य-समारोह में समस्त कर्नाटक का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। उनको 'बेंगलूरू पीस आॅरगेनाइजेशन' की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कर्नाटक सरकार के दो मंत्रियों द्वारा 'ग्लोबल पीस अवार्ड' से सम्मानित भी किया जा चुका है। इसके अलावा अहिंदी भाषी प्रदेश कर्नाटक में हिंदी कविता के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए प्रयागराज में आयोजित एक भव्य समारोह 'काव्य कुंभ - 2018' में उन्हें 'कैलाश गौतम राष्ट्रीय हिंदी गौरव सम्मान' से और 'इंडियन वर्चुअल यूनिवर्सिटी फाॅर पीस एंड एज्यूकेशन' द्वारा 'डॉक्टरेट की मानद उपाधि' से भी नवाजा जा चुका है। साथ ही साथ बॉल्डविन मेथोडिस्ट महिला महाविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में 'काव्य गौरव सम्मान', बेंगलूरु जैन समाज द्वारा आयोजित 'एक सुबह महावीर के नाम' कार्यक्रम में 'कवि रत्न सम्मान', 'प्रेरणा महिला साहित्यिक मंच' द्वारा 'साहित्य प्रहरी सम्मान' और ऐसे न जाने कितने ही सम्मानों से डॉ सुनील 'तरुण' को सम्मानित किया जा चुका है। 

डॉ सुनील 'तरुण' समाचार परिवर्तन, पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्फोर्मेशन टैक्नोलॉजी की वैज्ञानिक संस्था सेन्टर फार डवलपमेंट ऑफ एडवांस कम्प्यूटिंग (C-DAC), मिनिस्ट्री ऑफ इन्वारनमेंट, फॉरेस्ट एवं क्लाइमेट चेन्ज की स्वायत्त निकाय इंस्टीट्यूट ऑफ वूड साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, इंडियन टेलिफोन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ITI), रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO), रक्षा मंत्रालय के अधीन इलेक्ट्रोनिक तथा रेडार विकास संस्थन (LRDE), सांस्कृतिक मंत्रालय (कलकत्ता), रेल मंत्रालय के अधीन सवारी डिब्बा कारखाना (चेन्नई), हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत खाद्य निगम (FCI), ज्ञान किरण हिंदी शिक्षक संघ (बेंगलूरु विश्वविद्यालय), श्री भगवान महावीर जैन कॉलेज (बेंगलूरू एवं केजीएफ), राजनदेसर ओसवाल नागरिक परिषद् (चेन्नई), अनुभूति (चेन्नई), पंजाब एसोसिएशन (चेन्नई), स्वास्तिक सेवा ट्रस्ट, 21 ब्रदर्स, सेंट जाॅसेफ कालेज, जी टी ग्रुप आॅफ इन्स्टीट्यूशन्स, सिंधी काॅलेज, अग्रवाल समाज (मैसूर), हरियाणा सेवा ट्रस्ट, माहेश्वरी समाज, जोधपुर एसोसिएशन, उत्तर भारतीय संघ, पुलिस पब्लिक प्रेस, श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ, बीएमटी म्यूजिक अकादमी, काउंसलि फॉर मडिया एवं सेटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग, एकल अभियान, मारवाड़ी युवा मंच, स्वर संगम और अन्य कितनी ही संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि, हास्य कवि या फिर मंच संचालक के रूप में अपनी हास्य और काव्य प्रस्तुतियां दे चुके हैं। 

डॉ सुनील 'तरुण' बेंगलूरु की अग्रणी साहित्यिक संस्था 'साहित्य संगम' के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। 'साहित्य संगम' संस्था की स्थापना के पीछे उनका उद्देश्य नए-नए कवियों का उत्साहवर्धन और उन्हें मंच प्रदान करना था। इसके लिए वो प्रतिमाह प्रथम रविवार को काव्य-गोष्ठी का आयोजन भी करते हैं। उन्होने हमारे मुख्य संवाददाता से बातचीत में यह भी बताया कि एक हिंदी कवि के रूप में अपनी पहचान बनानेे का ख्वाब संजोने वाले बेंगलूरु के लगभग 15 महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को लेकर उन्होंने कुछ समय पहले एक काव्य प्रतियोगिता का आयोजन भी किया था और साथ ही साथ विजेताओं को पुरस्कृत भी किया था। स्थानीय कवियों के उत्साहवर्धन के लिए भी वो अब तक दो बार 'हम किसी से कम नहीं' कार्यक्रम का आयोजन 'साहित्य संगम' के माध्यम से करा चुके हैं। 

एक जानेमाने हिंदी कवि होने के साथ साथ डाॅ सुनील 'तरुण' 'गोकुलधाम हाउसिंग को-आॅपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड' के अध्यक्ष भी हैं। यह सोसाइटी शुरू करने के पीछे उनका यही उद्देश्य था कि आजकल आसमान छूती हुई कीमतों के कारण आमजन की पहुँच से दूर होते हुए एक छोटे से घर के सपने को कैसे पूरा किया जाए। उनकी कोशिश है कि बाजार भाव से कम कीमत पर लोगों की सामर्थ्य के अनुसार आसान किश्तों में मध्यम वर्ग के अपने घर के सपने को पूरा किया जाए। आज उनके साथ समाज के विभिन्न वर्गों से चुने गए दस डायरेक्टरों की पूरी टीम आम जन के इसी सपने को पूरा करने के लिए सतत् प्रयासरत है।

उनके छोटे से परिवार में उनके अलावा, उनकी पत्नी अनु और दो बेटियाँ विदिशा और ईशा हैं। बड़ी बेटी विदिशा चार्टर्ड अकाउंटेंट है और छोटी बेटी ईशा सी.ए.टी. (कैट) की तैयारी कर रही है। मुजफ्फर नगर, उत्तर प्रदेश में जन्मे डॉ सुनील 'तरुण' ने मेरठ विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा काॅमर्स में स्नातकोत्तर (M Com) पूरी की। बाद में 'दि इन्स्टीट्यूट आॅफ कोस्ट अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया' द्वारा आयोजित ICWA (I) की परीक्षा भी पास की। 

अपने शुरुआती दौर में देश की राजधानी दिल्ली में केनारा बैंक में लगभग दस वर्षों तक कार्यरत रहे। लेकिन जिन्दगी में कुछ अलग करने की चाह में वो बैंक की नौकरी छोडकर अपना भाग्य आजमाने के लिए उद्यानों की नगरी बेंगलूरू आ गए। हाँलाकि उसके बाद उनके लिए राह आसान नहीं थी। लेकिन वो नई जगह, नई भाषा और नए लोगों के बीच अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए जीवन के उतार- चढावों के बीच जिन्दगी की पथरीली राहों पर संभल-संभल कर अपनी मंजिल की ओर निरन्तर अग्रसर रहे। अपने अथक प्रयासों और दृढ इच्छा-शक्ति के बल पर ही आज वो इस मुकाम पर पहुँचे हैं और बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत्र हैं।

हम डॉ सुनील 'तरुण' को गोकुलधाम हाउसिंग को-आॅपरेटिव सोसाईटी लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में उनके प्रयासों और हिन्दी कविता के प्रति उनके समर्पण की मुक्त कंंठ से प्रशंसा करते हुए शुभकामनाएँ अर्पित करते हैं। 

अन्त में डाॅ सुनील 'तरुण' की कविता की कुछ पंक्तियाँ-


"जिन्दगी के दामन पर मुकद्दर के दिये हुए जख्मों की निशानी है,
सच तो ये है साहब, इस मुकद्दर के साथ अपनी जद्दोजहद बहुत पुरानी है।
ऐ मेरी जिन्दगी, मायूस ना हो, भरोसा रख मुझ पे,
और जा, जा के कह दे मुकद्दर से, मैंने अभी हार नहीं मानी है।।"

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