'मंत्री जी' का बयान दुर्भाग्यपूर्ण

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देशों में विकास की रफ्तार का कम होना न केवल अफसोस, बल्कि चिंता की बात है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की विकास दर पांच प्रतिशत के आसपास है। ऐसे में देश में अगर नौकरियां उत्सर्जित करने की पहल हो और निवेश की बात की जाए तो नेताओं व मंत्रियों को इसका स्वागत करना चाहिए। लेकिन हाल की घटनाओं को देख इस बात पर सहमति व्यक्त नहीं की जा सकती। बीते दिनों जब ग्लोबल ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की तरफ से भारत में एक अरब डॉलर के निवेश पर केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक आश्चर्यजनक बयान दिया। उन्होंने उस वक्त कहा था कि भारत में निवेश कर अमेजन ऐसा कोई एहसान नहीं कर रहा है। हालांकि बाद में जब इस बयान को विभिन्न मीडिया चैनलों में दिखाया गया और विपक्ष ने भी उन्हें इस मुद्दे पर घेरा तो उन्होंने कहा, “मेरे बयानों को उस संदर्भ में देखा जाना चाहिए। निवेश का स्वागत है लेकिन वह कानून के अंतर्गत होना चाहिए।” गौर करने वाली बात यह है कि देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री द्वारा इस प्रकार बयान दिया जाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। ये बयान भी तब आया है जब देश मंदी जैसे हालातों से जूझ रहा है, देश में विकास की रफ्तार कम हो गई है, हजारों-लाखों लोगों की नौकरियां जा चुकी है। जब देश को निवेश की सख्त जरूरत है, उस समय मंत्री द्वारा ऐसी टिप्पणी करने से देश का भला नहीं होगा। हम कह सकते हैं कि यह दुर्भाग्य है जो ऐसी टिप्पणी की गई। और यह तब होता है जब किसी अनुभवहीन व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा उम्मीद कर किसी बड़े पद पर बैठा दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है, आज देश की आर्थिक प्रगति की दर बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने, महंगाई पर काबू पाने और बेरोजगारी को समाप्त करने की सख्त जरूरत है और इन मुद्दों पर देश की स्थिति बड़ी चिंताजनक है, जो शायद पिछले 25-30 साल में नहीं हुई हो। अमेजॉन द्वारा भारत में निवेश करने पर पीयूष गोयल द्वारा की गई टिप्पणी पर कई विपक्षी नेताओं द्वारा सवाल दागे गए। हालांकि कोई भी निवेश करने वाला व्यक्ति जब किसी भी देश में निवेश करता है, उससे देश का भी भला होता है और निवेशकर्ता का भी भला होता है। लेकिन मैं नहीं मानता कि यह उचित है कि जब कोई भागीदारी हो निवेशकर्ता के बीच में और देशहित के बीच में, कोई भी ऐसी टिप्पणी जो उस भागीदारी को छोटा करे या उसे कम करने की कोशिश करे।’आज देश में निवेश की सख्त जरूरत है। पूरे विश्व में हर देश निवेश के लिए रेड कारपेट लगा रहा है और अगर हमारे देश में हम ऐसी टिप्पणी करें तो इससे निवेशकर्ता में तो ऊर्जा नहीं आने वाली।’ वैसे भी देश के अंदर जितने भी उद्योगपति हैं उनकी ऊर्जा तो निवेश करने के लिए समाप्त हो गई है इसलिए आज हमें (विदेशी) निवेशकर्ता को आकर्षित करने की जरूरत है। आज अंतरराष्ट्रीय जगत में देश की स्थिति चिंताजनक है। राज्यों के बीच में भी प्रतिस्पर्धा है। भारत के हर राज्य के बीच में प्रतिस्पर्धा चल रही है, अन्य राज्य में निवेश न करने को लेकर प्रचार किया जाता है। इसके माध्यम से ये समझाना जरूरी है कि अगर किसी राज्य ने निवेशकर्ता पर गोयल जैसी टिप्पणी कर दी तो कितने और राज्य अन्य राज्य हैं उनको अपनी ओर आकर्षित करने के लिए। वे कहेंगे कि आप वहां छोड़ों, यहां आ जाओ, और यहां निवेश कर लो। वैसे ही स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समान है।

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