राजदीप सरदेसाई ने झूठी खबर चलाने के लिए माफी मांगी

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नई दिल्ली, (परिवर्तन)। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले को लेकर प्रसारित की गई अपनी एक खबर के लिए माफी मांगी है। सीएनएन-आईबीएन से जुड़े रहने के दौरान सरदेसाई ने वर्ष 2007 में सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ को लेकर ‘झूठी’ रिपोर्ट चलाई थी।

इंडिया टुडे समूह के सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई को हैदराबाद कोर्ट ने सीएनएन-आईबीएन से जुड़े रहने के दौरान 2007 में सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ को लेकर ‘झूठी’ रिपोर्ट दिखाने के मामले में माफी मांगने के बाद बरी कर दिया। राजदीप ने सीएनएन-आईबीएन के प्रधान संपादक रहने के दौरान मई 2007 में “30 मिनट- सोहराबुद्दीन द इनसाइड स्टोरी” नाम से एक टीवी कार्यक्रम किया था। इसी कार्यक्रम को अब उन्होंने झूठा बताते हुए बिना शर्त माफी मांगी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से राजदीप ने तत्कालीन गुजरात सरकार और हैदराबाद विशेष जांच टीम का नेतृत्व कर रहे राजीव त्रिवेदी को फंसाने की कोशिश की थी। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री थे। वहीं हैदराबाद जांच टीम के नेतृत्व में राजीव त्रिवेदी सोहराबुद्दीन मामले की जांच कर रहे थे। टीवी कार्यक्रम में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि बंजारा और पांड्या ने सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी को बीदर से एसपी राजीव त्रिवेदी की मदद से हिरासत में लिया था। आरोप लगाया गया था कि राजीव त्रिवेदी ने दोनों पुलिस अधिकारियों को फर्जी नंबर वाली कार मुहैया कराई थी। इस कार में सोहराबुद्दीन को बीदर से अहमदाबाद लाया गया और फर्जी एनकाउंटर किया गया। इसके बाद पूरे मामले पर आंध्र प्रदेश सरकार ने राजदीप सरदेसाई और सीएनएन-आईबीएन के 10 रिपोर्टर के खिलाफ केस दाखिल किया था। राजदीप पर आरोप लगाया गया था कि इस रिपोर्ट ने राजीव त्रिवेदी की प्रतिष्ठा को धूमिल कर दिया था और आरोप झूठे, मनगढ़ंत और अपमानजनक थे। इसी मामले में सरदेसाई ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। त्रिवेदी से बिना शर्त माफी मांगते हुए पिछले साल 27 नवंबर को सरदेसाई ने हलफनामा दायर किया था। माफी को रिकॉर्ड पर लेने के बाद अतिरिक्त महानगर सत्र न्यायाधीश हैदराबाद डी हेमंत कुमार ने उसी दिन बरी करने का आदेश पारित किया। सरदेसाई ने अपने हलफनामें में कहा, “मैंने महसूस किया कि इसमें कोई साक्ष्य नहीं है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव यूनिट के एसपी राजीव त्रिवेदी की मदद से वंजारा और पांडियन ने सोहराबुद्दीन और कौसर बी को बीदर में पकड़ा। श्री राजीव त्रिवेदी, आईपीएस के बारे में यह झूठी खबर थी। मैं आगे प्रस्तुत करता हूं कि मुझे यह भी एहसास है कि हमारे द्वारा प्रसारित वह खबर भी गलत थी जिसमें हमने यह दावा किया था कि आईपीएस राजीव त्रिवेदी ने फर्जी नंबर प्लेट वाली कारें मुहैया कराईं, जिसमें सोहराबुद्दीन को अहमदाबाद लाया गया था और फिर एक फर्जी मुठभेड़ में मारा गया।” मामले में पहले प्रतिवादियों ने सरदेसाई के खिलाफ मामले को खारिज करने के लिए हैदराबाद हाईकोर्ट से निर्देश मांगा जिसे 2011 में खारिज कर दिया गया और बाद में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक एसएलपी (स्पेशल लीव पटिशन) को मई 2015 में खारिज कर दिया गया। इस मामले को नोएडा स्थानांतरित कराने की भी कोशिश की गई लेकिन वह याचिका भी खारिज हो गई। सरदेसाई ने पिछले साल कुछ अन्य मीडिया हाउस की तरह ही जस्टिस लोया की मौत के मामले में भी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को फंसाने की कोशिश की थी। दिसंबर 2018 में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन एंकाउंटर मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायाधीश एसजे शर्मा ने पाया कि सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और मामले के गवाह तुलसीराम प्रजापति की एनकाउंटर के कथित फर्जी होने के कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।

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