राजनीतिक मुद्दों में फंसे सावरकर

Total Views : 450
Zoom In Zoom Out Read Later Print

बेंगलूरु, (परिवर्तन)। देश की राजनीति में खींचतान और उठापटक अब आम सी बात हो गई है। राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सभी पार्टियाँ आए दिन राजनीतिक स्वार्थ और लाभ के लिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालती रहती है। कभी गांधी तो कभी गोडसे, कभी नेहरू तो कभी पटेल।

इन सबके बीच बीते कई दिनों से गाहे-बगाहे वीर सावरकर के नाम को राजनीति में अपने हित साधने के लिए कई सत्ताधारी व विपक्षी पार्टियों द्वारा उछाला जा रहा है। कांग्रेस सेवादल द्वारा जारी बुकलेट में कहा गया है कि ब्रह्मचर्य धारण करने से पहले नाथूराम गोडसे के एक ही शारीरिक संबंध का ब्योरा मिलता है। वे समलैंगिक संबंध थे। उनका पार्टनर था उनका राजनीतिक गुरु वीर सावरकर।

क्या है मामला

दरअसल, कांग्रेस सेवादल द्वारा विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसके बाद इस मामले में शिवसेना और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। कांग्रेस सेवादल की टिप्पणी, 'गोडसे और सावरकर में शारीरिक संबंध थे' पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि वीर सावरकर एक महान व्यक्ति थे और हमेशा महान बने रहेंगे। हालांकि उन्होंने सीधे-सीधे कांग्रेस पर हमला नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि एक वर्ग उनके खिलाफ इस तरह की बातें करता है, उससे साबित होता है कि उनके दिमाग में कितनी गंदगी भरी हुई है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि शिवसेना, कांग्रेस के साथ अपने गठबंधन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं चाहती है, जिस वजह से इस विवाद में दूरी बनाए रखते हुए पार्टी के प्रवक्ता ने केवल वीर सावरकर को महान कह कर प्रतिक्रिया व्यक्त की। दूसरी ओर अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने कांग्रेस सेवादल की पुस्तिका में टिप्पणी पर कहा कि ये महासभा के पूर्व अध्यक्ष सावरकर के खिलाफ हास्यास्पद आरोप हैं। उन्होंने कहा कि हमने तो यह भी सुना है कि राहुल गांधी समलैंगिक हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में बाँटी गई बुकलेट 'वीर सावरकर, कितने वीर' में डॉमिनिक लापिए और लैरी कॉलिन्स की किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' के हवाले से दावा किया गया है कि वीर सावरकर के नाथूराम गोडसे के साथ समलैंगिक संबंध थे। इस बुकलेट में सावरकर के बारे में छपी टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के साथ-साथ विनायक सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने सख़्त आपत्ति की है। रंजीत सावरकर ने इस बारे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात करने की भी कोशिश की मगर मुख्यमंत्री दफ़्तर पहुँचने के बाद भी मुख्यमंत्री ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। उन्होंने कहा, "मैं दिन भर उनसे मुलाक़ात का समय लेने की कोशिश करता रहा पर उनके सचिव ने मेरे संदेशों का जवाब नहीं दिया और ना ही मेरा फ़ोन उठाया। इसके बाद मैं मुख्यमंत्री कार्यालय आ गया। यहाँ मुझे बैठने के लिए कहा गया। मगर 50 मिनट बाद पता चला कि मुख्यमंत्री दफ़्तर से निकल गए। इसके बाद मैं उनके दफ़्तर में एक पत्र छोड़कर लौट आया।" वहीं, इस किताब में इस बात का भी ज़िक्र है कि सावरकर की सोच गौ-भक्ति को लेकर क्या थी?

सरकार गिराने की बीजेपी की कोशिश 

महाराष्ट्र में 2019 में विधानसभा के नतीजे काफी चौंकाने वाले थे। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की उम्मीद थी वहीं उन्हें इस दौरान करारी हार का सामना करना पड़ा। पूर्ण बहुमत न मिलने और शिवसेना के साथ गठबंधन के टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सत्ता वापसी की उम्मीद झूलसती नजर आई। इसके बाद कई राजनीतिक ड्रामें हुए और अंततः शिवसेना ने कांग्रेस के साथ मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बनाई। अब जब सावरकर का मुद्दा तेज़ हो उठा तो भाजपा इसमें राजनीतिक लाभ के लिए इसे और अधिक तूल दे रही है, ताकि महाराष्ट्र के हालिया गठबंधन पर इसका सीधा प्रभाव पड़े।  साफ शब्दों में कहा जाए तो भारतीय जनता पार्टी वीर सावरकर के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र में सरकार गिराने की फिराक में है। भाजपा के नेता लगातार इस मुद्दे को लेकर शिवसेना को घेर रहे हैं। क्योंकि सावरकर महाराष्ट्र से हैं इसीलिए शिवसेना ने भी उन पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। भाजपा द्वारा शिवसेना और कांग्रेस के बीच भ्रम पैदा करने के लिए सावरकर का मुद्दा उठाया जा रहा है। ताकि शिवसेना इस पर बोले और प्रदेश की गठबंधन पर बनी सरकार पर इसका सीधा प्रभाव पड़े। 

क्या है कांग्रेस सेवादल का दावा

कांग्रेस सेवा दल के 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत बीते दिनों भोपाल में हुई। वहाँ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के बारे में कुछ जानकारियाँ भी बांटी गई। इस पुस्तक में लिखा है कि नेताजी बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, देश को स्वतंत्र कराने के लिए विदेशी सहायता सुनिश्चित कर रहे थे और देश के पूर्वात्तर पर एक अन्य हमले की योजना बना रहे थे, तब वीर सावरकर ने अंग्रेज़ों को पूर्ण सैन्य सहयोग की पेशकश की थी। किताब में ये भी दावा किया गया है कि आरएसएस और भाजपा और उसके दूसरे सहयोगियों की वर्तमान सोच के विपरीत सावरकर ने गाय को कभी भी धार्मिक महत्व नही दिया, बल्कि उसे केवल आर्थिक विकास में उपयोगी माना। इन किताबों ने विपक्षी भाजपा को कांग्रेस को घेरने का मौक़ा दे दिया। भाजपा ने इन किताबों में पेश तथ्यों पर आपत्ति जताई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कांग्रेस सेवादल के बुकलेट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "सावरकर एक महान व्यक्ति थे। एक तबका उनके ख़िलाफ़ बोलता रहता है। वो चाहे जो भी लोग हों, ये उनके दिमाग़ की गंदगी दिखलाता है।"

भाजपा का क्या दिया जवाब

इस घमासान बहस के बीच भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बीबीसी से कहा, "वीर सावरकर के बारे में महात्मा गांधी ने यंग इंडिया में उनकी तारीफ लिखी। इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री के तौर पर उनका टिकट जारी किया। उन्होंने यह भी लिखा कि वीर सावरकर महान योद्धा थे।" उन्होंने आगे कहा, "ये महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी के विचारों पर चलने वाली कांग्रेस नही है बल्कि ये वामपंथियों के विचारों पर चलने वाली कांग्रेस है। कोई वैचारिक बहस हो तो बात समझ में आती है लेकिन अश्लील, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों करना न सिर्फ वीर सावरकर बल्कि सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।" 

कांग्रेस की दलील सच्ची या झूठी

वहीं, कांग्रेस इस पूरे मामले का बचाव कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, "इस मामले में कांग्रेस की सोच वही है जो पूरे देश की है। सावरकर की भूमिका के बारे में जो इतिहास में दर्ज है वही हमारा भी कहना है।" पंकज चतुर्वेदी ने आगे कहा, "भारतीय जनता पार्टी उन्हें भले वीर कहे लेकिन यह सच है कि जब उन्होंने अंग्रेजों से क्षमा याचना की तब कहीं जाकर वो जेल से बाहर आए। सावरकर टू नेशन थ्योरी के सबसे बड़े समर्थक थे।" वहीं, आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कांग्रेस का कहना है कि इस के बारे में सेवादल से बात की जाएगी। पंकज चतुर्वेदी ने कहा, "इसके के बारे में सेवादल से पूछा जाएगा कि इसका सोर्स क्या है, कहा से उन्होंने ये चीज़े ली है। क्योंकि काग्रेंस की संस्कृति किसी का अपमान करने की नही है और न ही हम किसी के प्रति अपत्तिजनक बातें करें।" बहरहाल इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के वजह से कांग्रेस और भाजपा प्रदेश में एक बार फिर आमने सामने आ गए है।

सावरकर पर संघ की प्रतिक्रिया

देश की राजनीति संघ और वीर सावरकर को लेकर गर्मा गई है। भोपाल में कांग्रेस सेवा दल के राष्ट्रीय अधिवेशन में वीर सावरकर पर सवाल उठाते हुए संघ को हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद से प्रेरित तानाशाह संगठन बताया गया है। सेवादल ने संघ पर सवाल उस समय उठाया है, जब इंदौर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की एक बड़ी बैठक चल रही है। भोपाल में कांग्रेस सेवा दल के दस दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में संघ और वीर सावरकर को लेकर विवादित सहित्य बांटा गया। बैठक में कार्यकर्ताओं को जो साहित्य बांटा गया उसमें दावा किया गया कि आरएसएस देश के अल्पसंख्यकों को उनके नागरिक अधिकारों से वंचित करना चाहता है। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच बांटी गई 'वीर सावरकर कितने वीर' शीर्षक वाली किताब में दावा किया गया है कि 1940 में हिंदू महासभा के सत्र में वीर सावरकर ने भी हिटलर की तारीफ की थी। इतना ही नहीं किताब में बताया गया है कि सावरकर ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के खिलाफ अंग्रेजों को सैन्य सहायता की पेशकश की थी। साथ ही इस किताब में वीर सावरकर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी भी की गई है। कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई ने बातचीत में कहा कि आरएसएस देश का संविधान नहीं मानता। आरएसएस देश को तोड़ने का काम करता है और सेवा दल देश को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तथ्यों के जरिए आजादी के आंदोलन में आरएसएस की भूमिका का सच बताया जा रहा है। उन्होंने भाजपा और संघ पर देश को बांटने की सियासत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सेवादल देश को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि संघ ने देश में झूठ फैलाने का काम 1925 से कर रही है। कांग्रेस सेवा दल के संघ को तानाशाह संगठन बताते ही मानो सियासी भूचाल आ गया हो। मध्य प्रदेश भाजपा के बड़े नेता संघ के बचाव में आगे आ गए। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कांग्रेस भ्रम फैलाने का कम बंद कर अपनी पार्टी को बचाने पर ध्यान देना चाहिए।

क्या सारी बातें झूठी हैं

भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने कहा कि सेवादल की किताब में लिखी सारी बातें झूठी हैं। कांग्रेस की आदत है कि महापुरुषों का अपमान करने की। उन्होंने कहा कि अब में ये जानना चाहती हूं मेरे भाई उद्धव ठाकरे क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपना दिमागी का संतुलन खो दिया है। उसे मानसिक इलाज की जरूरत है। यह घिनौनी मानसिकता को दर्शाता है। आरएसएस को देशद्रोही कहने पर उमा ने कहा कि कांग्रेस का ही बजूद नही बचा। कांग्रेस पार्टी घिनौने चरित्र की हो गई है। उमा ने कहा कि जल्द ही ये लोग (कांग्रेस) भारत माता की जय कहेंगे क्योंकि भगवा रंग को इन्होंने अब देश का रंग मान लिया है। वहीं वीर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने को भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कांग्रेस की चाल बताया है। प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने वीर सावरकर को देशभक्त बताते हुए लिखा कि यह कांग्रेस की चाल है जब देश की जनता खड़ी होती है तो कांग्रेस उन्हें रोकने की पूरी चाल चलती है। क्रांतिवीरों शहीदों का अपमान करके देश को भ्रमित करती है और सच्चाई जानने से रोकने का कुत्सित प्रयास कर रही है। देश सब समझ रहा है देश के शहीदों को नमन।

राहुल गांधी नहीं मांगेंगे माफी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में सरकार की आर्थिक नीतिओं के विरोध में बुलाई गई एक रैली में अपने 'रेप इन इंडिया' वाले बयान का ज़िक्र करते हुए फिर कहा है कि वो अपने बयान के लिए माफ़ी नहीं माँगेंगे। उन्होंने रामलीला मैदान में कहा,"मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है। मेरा नाम राहुल गांधी है. मैं सच्चाई के लिए माफ़ी नहीं मांगूंगा। मर जाऊंगा लेकिन माफ़ी नहीं माँगूंगा।" उन्होंने कहा, "माफ़ी प्रधानमंत्री और उनके असिस्टेंट अमित शाह को मांगनी है। पहले अर्थव्यवस्था हमारी शक्ति थी...है नहीं थी। पहले 9 फ़ीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट थी और आज प्याज़ पकड़े हुए हैं।" राहुल गांधी के सावरकर वाले बयान पर बीजेपी और शिव सेना के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी के आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि "इस बार राहुल गांधी सही हैं। वह कभी 'राहुल सावरकर' नहीं हो सकते हैं। वीर सावरकर एक राष्ट्रीय आइकन हैं जिनका भारत के राज्य व्यवस्था पर एक सभ्यता मूलक प्रभाव है और आने वाली पीढ़ियों पर इसका प्रभाव बना रहेगा। नेहरू-गांधी परिवार की पांच पीढ़ी उनकी विरासत को माप नहीं सकती।" दूसरी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया है। गिरिराज सिंह ने लिखा है कि वीर सावरकर तो सच्चे देशभक्त थे....उधार का सरनेम लेने से कोई गांधी नहीं होता, कोई देशभक्त नहीं बनता। गिरिराज सिंह ने अपने ट्वीट के साथ सोनिया, राहुल और प्रियंका की तस्वीर लगाई है और पूछा है कि ये तीनों कौन हैं? क्या यह तीनों देश के आम नागरिक हैं?

शिव सेना को क्यों है ऐतराज़

शिव सेना सांसद संजय राउत ने ट्वीट किया, "वीर सावरकर सिर्फ़ महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के देवता हैं। सावरकर नाम में ही राष्ट्राभिमान और स्वाभिमान है। नेहरू और गांधी के जैसे ही सावरकर जी ने भी स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की आहुति दी है। ऐसे हरेक देवता का सम्मान करना चाहिए। इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।" राउत ने कहा, "हम पंडित नेहरू और महात्मा गांधी को मानते हैं तो आप भी वीर सावरकर का अपमान मत कीजिए।" महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "सावरकर ने अपने जीवन की आहुति मातृभूमि के लिए दी है। अपना सब कुछ अर्पित किया है। उनके लिए ऐसी भाषा का उपयोग करना देश के लिए सर्वोच्च त्याग करने वाले सभी देशभक्तों का अपमान है। राहुल को पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए।" उन्होंने एक और ट्वीट किया, "आखिरी नाम गांधी होने से कोई महात्मा गांधी नहीं होता। खुद को गांधी समझने की गलती न करें राहुल। सावरकर के नख के बराबर भी नहीं हैं राहुल।" राहुल गांधी के सावरकर वाले बयान पर बीजेपी सांसद और प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने भी जवाबी हमला किया है और निशाना साधा है। जीवीएल नरसिम्हा राव ने ट्वीट कर कहा है "आपके (राहुल गांधी) लिए अधिक उपयुक्त नाम राहुल जिन्ना है। आपकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति और मानसिकता आपको सावरकर की नहीं, बल्कि मोहम्मद अली जिन्ना की योग्य वारिस बनाती है।" राहुल गांधी के सावरकर वाले बयान पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी पलटवार किया है। संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है कि राहुल गांधी अगर हजार जन्म भी ले लें तो भी "सावरकर" नहीं बन सकते। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी समेत कई बीजेपी सांसदों ने संसद में इस बयान पर कड़ा विरोध जताया। स्मृति इरानी ने लोकसभा में कहा, ''ये पहली बार हुआ है, जब गांधी परिवार का बेटा ये कहता है कि आओ हिंदुस्तान में रेप करो। राहुल गांधी इस सदन के नेता हैं। क्या राहुल गांधी ये कहना चाहते हैं कि हिंदुस्तान का हर व्यक्ति रेप करना चाहता है?''

See More

Latest Photos