लक्ष्य एक लाख एकल विद्यालय का

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वन बन्धु परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रमेश सरावगी से चार सवाल करते परिवर्तन समाचार पत्र के सम्पादक प्रशान्त गोयनका। साथ में वन बन्धु परिषद कर्नाटक राज्य के अध्यक्ष रमेश अग्रवाल तथा साउथ जोन के चेयरमैन श्याम सुंदर दमानी भी उपस्थित थे।

सवाल 1. आप एकल विद्यालय से कब जुड़े?
जवाब : एकल विद्यालय की शुरूआत वर्ष 1989 में 14 जनवरी मकर संक्रान्ति के दिन हुई। मैं तब से संस्थान से जुड़ा हुआ हूँ। एकल विद्यालय वन बन्धु परिषद के गठन के समय करीब 30 एकल विद्यालयों से इसके कार्य शुरूआत की गई।

सवाल 2. एकल विद्यालय का उद्देश्य क्या है और आज एकल विद्यालय क्यों महत्वपूर्ण है?
जवाब : एकल विद्यालय की अगर पृष्ठ भूमि बताऊँ तो उद्देश्य आपको स्पष्ट हो जाएगा। हमारे देश के सूदूर गांवों में, पहाड़ों में, जंगलों में, जहाँ बिजली भी नहीं पहुंचती उस वक्त और शिक्षा के नाम पर कोई कुछ जानता ही नहीं था, उन वनवासियों को अगर बोलें कि तुम पढऩे स्कूल जाओ  तो जाने को तैयार नहीं होते। उनका यह कहना था कि मेरा बच्चा पढ़-लिखकर करेगा क्या? आज मेरा बच्चा गाँव के खेत में जाता है, तो दो पैसे कमाकर ले आता है, गायें चरा कर ले आता है। पढऩे जायेगा तो बर्बाद हो जाएगा। तो फिर हम लोगों ने विचार किया कि कैसे क्या किया जाए? शिक्षा की ज्योति तो जलाना जरूरी है। तो विचार यह हुआ कि जैसा स्वामी विवेकानन्द ने कहा अगर विद्यार्थी स्कूल नहीं आते हैं तो स्कूल को विद्यार्थी के पास जाना पड़ेगा। हमने उस थीम को लिया और गाँव-गाँव में एक शिक्षक विद्यालय शुरू किया, 30 विद्यालय से काम शुरू हुआ। आज 80 हजार से अधिक एकल विद्यालय पूरे देश में चल रहे हैं। अभी तक 25 लाख से अधिक विद्यार्थी हमारे स्कूलों से पढक़र निकल चुके हैं। और वर्तमान में लगभग 28 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

सवाल 3. सरकार की ओर से एकल विद्यालयों के लिए क्या सहयोग मिल रहा है और आने वाले समय में किस प्रकार का सहयोग मिलना चाहिए? 
जवाब : हम सरकार से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं लेते हैं। हमारा लगभग 200 करोड़ रुपयों का वार्षिक बजट है जो कि हम समाज से ही लेते हैं। सरकार से लेते ही नहीं हैं। हम सरकार को एप्रोच भी नहीं करते हैं कि किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग करो। क्यों यह भी समझना आवश्यक है। हम यह मानते हैं कि समाज में जो समृद्ध वर्ग है, उनका यह दायित्व है कि उनको अपने भाई जो कमजोर है उनको वह निर्वाह करे।
इसलिए हम दान नहीं दायित्व की भावना से उनसे सहयोग लेते हैं। समाज का जो कमजोर वर्ग है उसको ऊपर लाने के लिए। अगर हम जिस दिन सरकार से आर्थिक सहयोग लेने लग जायेंगे जो हमारे आचार्य हैं उनको 1000 रुपया महीना ऑनेरियम के रूप में देते हैं, तो उनको लगेगा कि सहज पैसा आ रहा है तो उनमें जो भाव है कि मेरे गाँव का विकास करना है तो उसमें गाँव के विकास की जगह अर्थ के भाव आ जाएंगे। तो जो सरकारी स्कूलों का हाल वही हमारी स्कूलों का हो जाएगा। हमारी पॉलिसी यही है कि सरकारी सहयोग नहीं लेना है।

सवाल 4. एकल विद्यालयों के विस्तार को लेकर कोई खास योजना?
जवाब : हमने तो सोचा था कि 2022 तक हम 1 लाख विद्यालय तक पहुंचेंगे। देश की स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ पर हम एक लाख एकल विद्यालय भारत माता के चरणों में समर्पित करेंगे। किन्तु समाज का स्नेह, हमारे कार्य को आशीर्वाद और हमारे कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम से हम 2019 में ही एक लाख गाँव यानि विद्यालय तक पहुंच जायेंगे।

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