केरल विधानसभा को सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाने का अधिकार नहीं

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तिरुवंनतपुरम, (परिवर्तन)। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केरल विधानसभा में मंगलवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ पारित प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि किसी राज्य की विधानसभा को ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।

प्रसाद ने यहां एक पत्रकार वार्ता में कहा कि संविधान में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा है उसके तहत नागरिकता और उससे संबंधित कार्यक्रम में केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की संघ सूची के विषयों में 17वें स्थान पर नागरिकता का उल्लेख है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नागरिकता के संबंध में केवल देश की संसद ही कानून बना सकती है। किसी राज्य की विधानसभा को ऐसा करने का अधिकार नही है। केरल विधानसभा पर भी यही बात लागू होती है। रविशंकर प्रसाद ने विधानसभा की कार्यवाही पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते  हुए कहा कि संविधान में यह स्पष्ट रुप से लिखा गया है कि कानून बनाने के लिए कौन से विषय संसद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और कौन से राज्य विधानसभाओं के। उन्होंने मुख्यमंत्री पी. विजयन से आग्रह किया कि वह इस संबंध में उचित कानूनी सलाह के आधार पर काम करें। उल्लेखनीय है कि केरल विधानसभा ने आज नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। मुख्यमंत्री पी. विजयन ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया था जिसे सदन ने पारित कर दिया। प्रस्ताव में नए कानून को रद्द किए जाने की मांग की गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एकमात्र विधायक ओ. राजगोपालन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि संसद के दोनों सदनों ने नया कानून पारित किया है। इसलिए विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव रखा जाना गैरकानूनी है।

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