चारों तरफ हरियाली से भरा है लोनावाला और खंडाला

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बेंगलुरु, (परिवर्तन)। बारिश के आते ही मौसम पूरी तरह बदल जाता है। मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू मन को लुभाती है। चारों तरफ छाई हरियाली आँखों को ठंडक पहुँचाती है। जब बारिश की हल्की हल्की बुँदे हमारे चेहरे पर पड़ती है तो हर चहरे पर मुस्कान आ जाती है। कुल मिला कर हम कह सकते है कि बारिश का मौसम एक खुशनुमा मौसम होता है। ऐसे में यदि आप बाहर कही सैर पर जाने की सोच रहे है तो इन तीन जगहों पर जरूर जाए।

मुंबई-पुणे राजमार्ग पर स्थित है, महाराष्ट्र का प्रसिद्ध रमणीक स्थल और पहाड़ी शहर खंडाला लोनावाला। सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी घाट में मोर घाट उतरने पर खंडाला और लोनावाला पहाड़ी स्थल महाराष्ट्र के पर्यटकों में प्रसिद्ध हैं। चूंकि 'गुलाम' का गीत खंडाला के गीत में आता है, इस स्थान की लोकप्रियता देशव्यापी हो गई है और लोग दूर-दूर से यहां आ रहे हैं। लोनावाला की तुलना में खंडाला एक छोटी लेकिन शांत जगह है। वर्षा ऋतु की पहली फुहार के बाद, खंडाला की प्राकृतिक सुंदरता बेहद नशीली हो जाती है। पर्वत श्रृंखलाओं से छोटे झरने और झुके हुए बादल प्राकृतिक वैभव को सुंदर और हवादार बनाते हैं। यह स्थान शांत वातावरण के कारण स्वास्थ्य लाभ के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। यहाँ पर बहुत सारे रेस्ट हाउस, धर्मशालाएँ, सेनेटोरियम आदि हैं। अप्रैल के बाद से बारिश के आने तक यहाँ का तापमान अच्छा रहता है। लोनावाला की पर्वत श्रृंखलाएं पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। कई जगह हैं जैसे लवर्स पॉइंट, टाइगर्स लीप, हॉर्स शू वैली, डीप पॉइंट। इसके अलावा आप भुशी डेम और भूशी झील की यात्रा कर सकते हैं। भूटी बांध के अंत में, जब पानी नदी से मिलने के लिए नदी की ओर ऊपर से नीचे गिरता है, तो इसकी ध्वनि और सुंदर दृश्य अस्पष्ट रहते हैं।

लोनावाला की गुफाएँ 

लोनावाला की गुफाएँ भी अनोखी हैं। विशेष रूप से कार्ला और भजे और बेडासा जैसी प्राचीन गुफाओं का बहुत महत्व है। कार्ला गुफा बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक गुफा है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण ईसा से 160 साल पहले हुआ था। कार्ला गुफा भारत की सबसे बड़ी चैत्य गुफा में से सबसे बड़ी है। यहां बौद्ध वास्तुकला चरम पर है। इस गुफा में स्तंभों पर बनी कई कलाकृतियां वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना हैं। इसके अलावा लकड़ी से बना एक मंदिर है, जिसकी आकृति कैथेड्रल से मिलती है। यहां भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा भी है। भांजा गुफा लोनावाला से बारह किलोमीटर दूर है। भावे गुफा में 18 गुफाएँ हैं और 12 गुफाएँ सर्वश्रेष्ठ हैं। 13 स्तंभ और 14 स्तूप हैं जो बौद्ध हैं। वहाँ भी अंके विहार हैं जो उपदेश और धार्मिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाते थे। वेदसा गुफा महाकाव्य पहाड़ी पर स्थित है। यहां दो गुफाएं हैं। इन गुफाओं का निर्माण संभवत: पहली शताब्दी का है। गुफा के एक तरफ पुरुषों और महिलाओं के सुंदर और आकर्षक भित्तिचित्र हैं। महिला अपने संपूर्ण श्रृंगार के साथ घोड़े पर सवार है। भित्तिचित्रों में महिलाओं के सुंदर कपड़े भी खूबसूरती से रचे गए हैं। अन्य स्तंभों पर भी इसी प्रकार की पेंटिंग है। यह गुफा 30 फीट चौड़ी और 45 फीट गहरी है। कार्ला से तीन गुफाओं तक जाने के लिए एक प्रणाली है। यहां रहने और खाने के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम द्वारा रिसॉर्ट और होटल भी बनाए गए हैं।

कैसे पहुंचे लोनावाला और खंडाला

मुंबई से पुणे के रास्ते में, खंडाला और लोनावाला में सड़क और रेल द्वारा दूसरा पड़ाव है। दोनों शहरों में पाँच किलोमीटर की दूरी है। सड़क मार्ग से खंडाला 99 किलोमीटर और लोनावाला 104 किलोमीटर दूर है और इस दूरी की दूरी 123 किमी और 128 किमी है। मुम्बई से पूणे जाते समय खंडाला पहले आता है तथा खंडाला से थोड़ा आगे लोनावाला पड़ता है। दोनो स्थलों में लगभग 3 किलोमीटर का फासला है। लोनावाला की तुलना मे खंडाला शांत व छोटा है। किन्तु अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए अत्यन्त प्रसिद्ध है। खंडाला की खोज सन् 1871 में मुम्बई के तत्कालीन गवर्नर सर एल फिंस्टन ने की थी शूरू में यहां घना जंगल था। बाद में अंग्रेजों ने इसे खुबसूरत पर्वत सैरगाह का रूप दे दिया था। बरसात के मौसम में अक्सर पहाड़ी सड़को से दूर रहने की सलाह दी जाती है। किन्तु लोनावाला हिल्स स्टेशन इसके बिल्कुल विपरीत है जैसे जैसे वर्षा की तीव्रता बढ़ती जाती है, वैसे वैसे ही मुम्बई से लोनावाला जाने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ जाती है। और काफी बड़ी संख्या में लोग लोनावाला के मनोरम दृश्यों का आनंद लेने वहां की यात्रा करते हैं। यह दोनों छोटे से हिल्स स्टेशन मुम्बईवासीयों के लिए करीबी मनपसंद और पिकनिक स्पॉट है। इसके अलावा यहां के खुबसूरत व्यू प्वाइंट सैलानीयों को खूब भाते हैं। 

लोनावाला की प्रसिद्धता

लोनावाला चिक्की के लिए मशहूर है। तिल, काजू, बादाम, मूंगफली, पिस्ता, अखरोट जैसे मेवों को शक्कर या गुड़ में मिलाकर बनाई जाने वाली चिक्की का स्वाद जबरदस्त होता है। यहां के फज भी बहुत फेमस हैं। लोनवला की यादगार के तौर पर आप यहां से चिक्की, चॉकलेट, मैंगो फज साथ ले जा सकते हैं।

लोनावाला के विभिन्न पर्यटक स्थल 

समुद्रतल से 624 मीटर की ऊंचाई पर बसे हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे लोनावला की सुंदरता बहुत ही सुहावनी है। यहां घूमने लायक बहुत सारी जगहें हैं। ट्रैकिंग का मन हो तो पहाड़ पर चढ़ने की सुविधा भी मौजूद है। ट्रैकिंग करते समय पहाड़ों के नजारों का लुत्फ लेने का एक अलग ही मजा है। इस छोटे से शहर में घूमने के लिए कई जगहें हैं। राजमची पाइंट, लोनावला झील, कारला केव्स, लोहागढ़ फोर्ट, बुशी डैम, रईवुड पार्क तथा शिवाजी उद्यान प्रमुख हैं। परिवार के साथ घूमने जाना हो या दोस्तों के साथ मस्ती करनी हो, यह जगह सभी के लिए सुहावनी है।


A. राजमची पाइंट - लोनावला से लगभग 6 किमी की दूरी पर खूबसूरत वादियों से सजी एक दूसरी जगह है राजमची। इसका यह नाम यहां के गांव राजमची के कारण पड़ा है। यहां सबसे ख़ास शिवाजी का किला और राजमची वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी है। इस जगह की सुंदरता सभी को बहुत लुभाती है।


B. रईवुड पार्क - यह जगह परिवार के लिए बहुत ही अच्छी है बच्चों के खलने मनोरंजन की सभी चीज़े यहाँ उपलब्ध है।


C. बुशी डैम - लोनावला से 6 किलोमीटर की दूरी पर बसा बुशी डैम एक फेमस पिकनिक स्पॉट है। बरसात के दिनों में जब यह पानी से पूरा भर जाता है तो इसकी सुंदरता देखने लायक होती है। यहां कई पर्यटक पहुंचते हैं।


D. लोहागढ़ किला - लोनावला से 20 किलोमीटर की दूरी पर समुद्रतल से 1,050 मीटर की ऊंचाई पर बसा लोहागढ़ किला बेहद ही दर्शनीय स्थल है। इस किले की बनावट और इसकी ऐतिहासिकता हमें इसकी ओर खींचती है। यह किला शिवाजी का युद्धस्थल भी था। विशाल चट्टान पर स्थित इस किले में कैदियों के लिए लोहे के दरवाजे लगाए गए थे।


E. कारला गुफा - 160 ईसा पूर्व बनी कारला की गुफाएं खंडाला से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कारला गुफा का मुख्य आकर्षण बौद्ध चैत्य है मूर्तिकला युक्त 16 मीटर ऊंचा 45 मीटर लंबा और 15 मीटर चौडा चैत्य हॉल सुंदर दस्तकारियो से सुसज्जित है। इस गुफा के प्रवेशद्धार पर एक खंभे पर बनी तीन शेरो की आकृतिया विशेष रूप से दर्शनीय है।


F. भाजा की गुफाएं - कारला गुफा के दक्षिण मे 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 200 ईसा पूर्व निर्मित भाजा की गुफाएं भिन्न भिन्न शैलियो मे बनी है। इनकी संखय़ा 18  है। भाजा की गुफाओ के प्रवेशद्धार पर चार घोडो के रथ पर सूर्य़ देवता का चित्र यहा मुख्य आकर्षण है।

  

G. भेडसा की गुफाएं - पहली शताब्दी मे बनी भेडसा की चैत्य गुफाएं लोनावाला स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुचंने का 3.5 किलोमीटर रास्ता दुर्गम होने के बावजूद पर्यटको मे इन गुफाओ को देखने का आकर्षण बरकरार है।


H. बसी बांध - लोनावाला से 6 किलोमीटर की दूरी पर बना बशी बांध मानसून के मौसम मे पर्यटको से भरा रहता है। बांध की सीढीयो के ऊपर से बहते हुए पानी को देखकर जलप्रपात होने का अहसास होता है। पर्यटक इन सीढीयो पर बैठ कर जल के बहाव का आनंद ले सकते है।


I. टाइगर लीप - आईएनएस शिवाजी (भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण संस्थान) से कुछ ही दूर, द टाइगर लीप लोनाला का एक और प्रमुख आकर्षण है। टाइगर के लीप को नाम दिया गया है, जब यह इस जगह से घाटी की तरह दिखता है, ऐसा लगता है जैसे घाटी में एक बाघ छलांग लगा रहा है। यह दर्शनीय स्थल भी घेरने वाली घाटी के सुरम्य-परिपूर्ण विस्टा का एक शानदार स्थल है। टाइगर लीप के चारों ओर, एक छोटा सा झरना है जो केवल मानसून के दौरान सक्रिय है। एक संक्षिप्त खड़ी चढ़ाई के बाद, झरना उचित मात्रा में बल के साथ एक धारा बनाता है जो टाइगर के लीप के आधार पर जाता है। पानी में आराम करना इस स्थान पर आने वाले पर्यटकों की सबसे पसंदीदा गतिविधियों में से एक है।


J.  ड्यूक नोज़ - जिसे नागफनी के नाम से भी जाना जाता है, ड्यूक नोज का नाम वेलिंगटन के ड्यूक के नाम पर रखा गया था। यह चट्टान संरचना दायीं ओर घाटी में लटकी हुई है, जब आप लोनावाला की ओर यात्रा करते हैं तो यह मनोरम नज़ारा आपको देखने को मिलता है। यह बिंदु सह्याद्रि पर्वतमाला के लुभावने क्षेत्रों को प्रस्तुत करता है। जो व्यक्ति एडवेंचर प्रेमी है वे हाई प्वाइंट तक आगे बढ़ते हैं और क्षेत्र के मनोरम दृश्यों का मज़ा लेते हैं। नए ट्रेकर्स के लिए भी यह ट्रैक उपयुक्त है। ट्रेक करने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी तक होता है और पूरे ट्रेकिंग ट्रेल में आसपास के क्षेत्रों के लुभावने विस्टा उपलब्ध हैं। एक बार, आप भगवान हनुमान के मंदिर का दौरा कर सकते हैं या बस विस्तार के लुभावनी नज़ारों की प्रशंसा कर सकते हैं।

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