कोर्ट की अवमानना के मामले में गुरुमूर्ति को मिला एक और मौका

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नई दिल्ली, (परिवर्तन)। दिल्ली हाईकोर्ट ने एस. गुरुमूर्ति के खिलाफ कोर्ट की अवमानना के मामले पर सुनवाई करते हुए आज गुरुमूर्ति को माफी मांगने का एक और मौका दिया। गुरुमूर्ति पर यह मामला हाईकोर्ट के एक जज जस्टिस एस.मुरलीधर पर किए गए ट्वीट के चलते दायर किया गया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जीएस सिस्तानी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आप किसी पर स्याही फेंककर भाग नहीं सकते हैं।

कोर्ट ने गुरुमूर्ति के वकील महेश जेठमलानी से कहा कि वो 11 दिसंबर तक ये बताएं कि उनके मुवक्किल माफी मांगना चाहते हैं कि नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने गुरुमूर्ति के खिलाफ अवमानना याचिका दायर किया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील महेश जेठमलानी से कहा कि हम गुरुमूर्ति के खिलाफ अवमानना के इस केस को खत्म करना चाहते हैं। कोर्ट ने जेठमलानी से कहा वे अपने मुवक्किल एस गुरुमूर्ति से इस बात का निर्देश लें कि क्या वे ट्विटर पर और कोर्ट में हलफमाना दायर कर बिना शर्त माफी मांगना चाहते हैं। तब जेठमलानी ने कहा कि गुरुमूर्ति ने पहले ही अपने जवाब में कहा था कि उनका जस्टिस मुरलीधर के कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। न्यायपालिका को वे आदर के साथ देखते हैं। उन्होंने कहा कि एस गुरुमूर्ति का ट्वीट प्रश्ननुमा था, कोई आरोप नहीं था। ये ट्वीट तब किया गया था जब एक पत्रकार ने उन्हें व्हाट्सऐप पर ये मैसेज भेजा था। उनकी इस सफाई से नाराज जस्टिस सिस्तानी ने कहा कि उनका ट्वीट केवल प्रश्न नहीं था बल्कि उससे बहुत ज्यादा था। क्या आप समझते हैं कि कोर्ट कमजोर होता है। आपको ये किसने बताया। जस्टिस सिस्तानी ने कहा कि जस्टिस मुरलीधर अच्छे जजों में से एक हैं। आप किसी पर स्याही फेंककर भाग नहीं सकते हैं। उसके बाद कोर्ट ने कहा कि आप लंच के बाद अपने मुवक्किल से पूछिए कि वो बिना शर्त माफी मांगना चाहते हैं कि नहीं। लंच के बाद वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि हमने गुरुमूर्ति से बात की लेकिन असफलता हाथ लगी है। तब कोर्ट ने कहा कि आप 11 दिसंबर तक पूछकर हमें बताइए कि गुरुमूर्ति बिना शर्त माफी मांगना चाहते हैं कि नहीं। इससे पहले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि हम सभ्य हैं लेकिन डरनेवाले नहीं हैं। सुनवाई के दौरान गुरुमूर्ति की तरफ से वकील महेश जेठमलानी ने याचिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि जस्टिस एस मुरलीधर ने खुद अपनी न्यायिक शक्तियों का उपयोग करते हुए एक आदेश पारित किया था और कहा था कि वे पी चिदंबरम के जूनियर कभी नहीं रहे। इसलिए गुरुमूर्ति के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है। जेठमलानी ने कहा था कि कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट की धारा 15 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से किसी नोटिफाइड लॉ अफसर के नहीं होने की वजह से कोर्ट की अवमानना की प्रक्रिया शुरु नहीं हो सकती है। जस्टिस मुरलीधर के आदेश पर गौर करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने कहा था कि हम अपनी रक्षा कर सकते हैं, कोर्ट की गरिमा बनाए रख सकते हैं। जस्टिस मृदुल ने जेठमलानी को सलाह दी थी कि गुरुमूर्ति माफी मांगें ताकि मामला खत्म हो। कोर्ट ने कहा था कि गेंद आपके पाले में है ।

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