दिल्ली के प्रदूषण का हल संभव, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय काम में जुटा

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नई दिल्ली, (परिवर्तन)। केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण का हल उनके मंत्रालय के पास है। अगर दिल्ली में गैस से चलने वाली गाड़ियां ही चलें और पराली से गैस बनाने का काम शुरू कर दिया जाए तो अगले दो तीन सालों में दिल्ली में प्रदूषण की समस्या आएगी ही नहीं। इसके लिए उनके मंत्रालय के तहत आने वाली कंपनियां और निजी कंपनिया काम कर रही हैं।

फिक्की में गुरुवार को आयोजित इंडिया गैस इंफ्रास्ट्रक्टचर कॉन्फ्रेंस-2019 में उन्होंने कहा कि घरों से निकलने वाले कचरे से लोग घरों में ही मीथेन गैस का उत्पादन कर लाखों रुपये कमा सकते हैं। इससे लोग अपने घर का चूल्हा तो जला सकते हैं और बचे हुए गैस को ग्रिड में डाल सकते हैं। इसके लिए सरकार लोगों की मदद करने को भी तैयार है। इसलिए इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा आगे आना चाहिए। धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि आने वाले सालों में कोयला और पेट्रोलियम की खपत कम होगी, इसलिए गैस उत्पादन  ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां अपार संभावनाएं है। सिन गैस, मीथेन गैस, बायो गैस, एलएनजी इन सभी गैस के उत्पादन को बढ़ाने के साथ बाजार की संभावनाओं और जरूरतों को भी तलाशा जाना चाहिए। आने वाले सालों में देश में एलएनजी गैस की आवश्यकता 600 एमएमटी (मिलियन मीट्रिक टन) तक पहुंच जाएगी। मौजूदा समय में अभी 80 एमएमटी घरेलू उत्पादन किया जा रहा है और इतना ही बाहर से आयात किया जा रहा है। मतलब साफ है कि इस क्षेत्र में अभी अपार संभावनाएं हैं। इसलिए इस क्षेत्र में काम करी कंपनियों को आगे बढ़कर नए तकनीक का प्रयोग कर काम करना चाहिए।

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