महाराष्ट्र में फैसले की घड़ी, राष्ट्रपति शासन के आसार

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मुंबई, (परिवर्तन)। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर पेंच गहराता जा रहा है। आज (मंगलवार) रात साढ़े आठ बजे तक एनसीपी बहुमत का आंकड़ा पेश नहीं कर सकी तो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश गृह मंत्रालय को भेज देंगे।

मंगलवार शाम तक शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में सहमति बनने के हालात कम नजर आ रहे हैं। तीनों दलों में साझा कार्यक्रम, विभागों के बंटवारे आदि मुद्दों को लेकर सहमति बनने में तीन से चार दिन का समय लग सकता है। बड़ा दल होने के नाते राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रण दिया था लेकिन संख्या बल कम होने का हवाला देते हुए भाजपा ने सरकार बनाने से इंकार कर दिया। इसके बाद दूसरे बड़े दल शिवसेना को निमंत्रित किया गया। कांग्रेस-एनसीपी का समर्थन पत्र नहीं मिलने से शिवसेना का दावा भी अधर में लटक गया। शिवसेना ने 48 घंटे का समय मांगा था लेकिन राज्यपाल ने शिवसेना और समय देने से इंकार कर दिया। तीसरे दल एनसीपी को आज शाम साढ़े आठ बजे तक बहुमत का आंकड़ा देने की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिसमें विधायकों की नाम, पते, दल और हस्ताक्षरयुक्त सूची देने कहा गया है। एनसीपी विधायक दल नेता अजीत पवार साफ कर चुके हैं कि इतने कम समय में विधायकों को एकजुट करना संभव नहीं है। कांग्रेस-एनसीपी नेताओं के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय लेना बाकी है। इन परिस्थितियों में समय बेहद कम है। इस महीने की 9 तारीख को सरकार गठन की समय सीमा समाप्त हो गई थी। अब राज्यपाल और इंतजार के मूड़ में नहीं हैं। यदि एनसीपी बहुमत का आंकड़ा पेश नहीं कर सकी तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन लागू करने की शिफारिश केंद्र को भेंज देंगे। चौथे दल कांग्रेस को सरकार बनाने का आमंत्रण नहीं दिया जाएगा। भाजपा के 105, शिवसेना के 56, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं।

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