ग्रीन पटाखों की दीपावली

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इस वर्ष से दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों की ब्रिकी शुरु हो गई है। इस बात की घोषणा केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने की है।

बताया जा रहा है कि इन पटाखों से 30 प्रतिशत प्रदूषण में कमी आएगी। पिछले वर्ष दीपावली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था और ग्रीन पटाखों को लाने पर जोर दिया था। ग्रीन पटाखों का सुझाव केंद्र सरकार ने ही दिया था।  यह बताना जरूरी है कि ग्रीन पटाखे क्या होते हैं। दरअसल, यह पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान की खोज हैं। ये देखने में अन्य पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से प्रदूषण बहुत कम होता है। सरकार पूरे देश में ग्रीन पटाखे लाने पर काम कर रही है। फिलहाल, इस साल दिल्ली-एनसीआर से इसकी शुरुआत कर रही है। यदि अच्छा रिस्पांस मिला तो फिर इसे देशभर में लागू किया जाएगा। बढ़ते प्रदूषण को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक चिंतित हैं। अपने देश में भी यह समस्या विकराल होती जा रही है। खासकर, महानगरों में तो बुरा हाल है। शुद्ध हवा नहीं मिलने से सांस की बमारियां बढ़ती जा रही हैं। शहरों के परिवेश में बात करें तो बीते कुछ वर्षों में यहां की आबोहवा विषाक्त हो गई है। बढ़ते ट्रांसपोर्ट, पराली जलाने और पटाखों के प्रदूषण से लोगों की जान आफत में रहती है। दरअसल, अक्टूबर - नवम्बर में प्रदूषण हवा में घुल कर रह जाता है क्योंकि सर्दी की प्रांरभिकता होती है और मौसम में बदलाव की वजह से हवा कम चलती है। इससे प्रदूषण 50 से 70 फुट तक ही घुमता रहता है। इस वजह से सांसों के जरिए हमारे शरीर में घुस कर यह स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार करता है।

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