वेद-श्रवण से जुड़ी भ्रांतियों पर विराम के साथ संपन्न हुआ ‘चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ’

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नई दिल्ली, (परिवर्तन)। वेद-श्रवण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की कवायद के साथ ही छह दिवसीय चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ का सोमवार को यहां लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) में वैदिक विधि-विधान पूर्वक समापन हो गया। इस धार्मिक समारोह में शामिल हुए देश दुनिया के कई सुनामधनी, वेदों के मर्मज्ञ और मूर्धन्य शास्त्रज्ञों के सानिध्य से श्रद्धालु कृतज्ञ हुए।

वेद-मंत्रोच्चार से पूरा माहौल आध्यात्मिक आवेग में मानो प्रवाहित हो रहा था। श्रद्धालुओं का अपार सैलाब जहां एक ओर वेद-श्रवण का रसास्वादन कर रहा था वहीं शास्त्रज्ञ मंत्रोच्चार से ज्ञान की सनातन सरिता की अविरल धारा बहा रहे थे। इस भव्य आयोजन में अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, नार्वे, थाईलैण्ड, सिंगापुर सहित कई देशों के श्रद्धालु शामिल हुए तथा उन्होंने अपने-अपने देशों में चतुर्वेद महायज्ञ करने के लिए संतों से आग्रह किया। महायज्ञ इसमें हॉलेण्ड के प्रिंस लुईस सहित सभी विदेशी अतिथियों ने वैदिक गणवेश में उपस्थित होकर पूजा अर्चना की। महायज्ञ में मुख्य यजमान स्वामी चिदानन्द महाराज ऋषिकेश, स्वामी विवेकानन्द महाराज,  मुनि वत्सल महाराज, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठन महामंत्री राममाधव, विहिप के केन्द्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे एवं विहिप संयुक्त महामंत्री डा. सुरेन्द्र जैन,  झण्डेवाला मंदिर से रवीन्द्र गोयल यजमान स्वरूप उपस्थित हुए। उदासीन आश्रम पहाड़गंज के स्वामी राघवानंद महाराज, विहिप की प्रबंध समिति के सदस्य दिनेश चन्द्र, अशोक सिंहल फाउन्डेशन के न्यासी महेश भागचंदका आदि   भी उपस्थित रहे। श्रीश्रीश्री त्रिदंडी स्वामी रामानुजाचार्य जियर चिन्न स्वामी ने अपने 61 वेदपाठियों के साथ विस्तार पूर्वक वेद से संबंधित छह दिवसीय आयोजन में होने वाली सम्पूर्ण प्रक्रिया से भक्तों का ज्ञानवर्धन किया। उन्होंने यज्ञ की प्रक्रिया को बताते हुए कहा कि यज्ञ में क्या और क्यों होता है तथा इसके पीछे का उद्देश्य क्या है। वेद मंत्र कंठस्थ वेदपाठी, विद्वानों द्वारा अलग-अलग यज्ञ कुंडों में शुद्ध सस्वर उच्चारण करते हुए उन्होंने यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर वेद भगवान यज्ञ का समापन वैदिक विधि विधान पूर्वक किया। दक्षिण भारत के 61 आचार्य यहां आए हुए थे जिन्हें वेद कंठस्थ हैं। घनपाठी विद्वान भी थे उनकी विषेषता थी कि वह जो वाक्य शुरु से पढ़ा उसे उसी स्वर में विपरीत दिशा में भी उसको उसी रूप में बोलते हैं। उल्लेखनीय है कि विश्व हिन्दू परिषद् के पूर्व संरक्षक और दिवंगत नेता अशोक सिंहल वेदों के ज्ञान-विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध थे और इसके लिए वह एक महायज्ञ आयोजित करना चाहते थे। उनके इस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए विहिप के तत्वावधान में अशोक सिंहल फाउंडेशन व झंडेवालान देवी मंदिर के सहयोग से छह दिवसीय ‘चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ’ का आयोजन 9 से 14 अक्टूबर तक किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह भय्या जी जोशी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के अलावा अनेक केंद्रीय मंत्रियों ने भी आयोजन में उपस्थित दर्ज कराई।

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