सवाल सरकार से

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बीते एक सितंबर से नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा देश में मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया गया। इसके साथ ही देश के हर प्रांत में मोटर व्हीकल एक्ट का पालन न किए जाने या इससे जुड़े किसी भी नियम के उल्लंघन करने पर जनता पर भारी भरकम चालान लगाया जा रहा है।

इस बीच सोशल मीडिया में तरह तरह के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। इन वायरल वीडियोज़ की मानें तो इनमें पुलिस अफसरों द्वारा आम जनता को ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन किए जाने पर उनसे बदसुलूकी की जा रही है और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा है। लेकिन वहीं एक अन्य वीडियो में देखा जा रहा है कि यूपी के किसी शहर के एडीएम साहब किस प्रकार से बिना हेलमेट बाइक की सवारी का आनंद ले रहे हैं और जब उन्हें स्थानीय ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने रोका तो उन्होंने पुलिस कर्मियों को धमकाते हुए गाड़ी आगे बढ़ा ली। 

आज यह सोशल मीडिया और बढ़ते डिजीटलाइजेशन की ही देन है कि यहां जनता के विरोध प्रदर्शन के साथ ही साथ नेताओं, अफसरों और आला अधिकारियों की मनमानी को भी डिजीटल प्लैटफॉर्म पर पूरी दुनिया के समक्ष लाया जा रहा है। इन वायरल वीडियो को देख कर कोई भी आम व्यक्ति बता देगा कि ब्यूरोक्रेसी के सामने कैसे सबके हाथ पैर काम करना बंद कर देते हैं। नेताओं की मनमानी से लेकर अफसरों की दादागिरि तक को केवल जनता ढो रही है। मेरा सवाल है कि जनता पर अपने पदभार के कोड़े बरसाने वाली पुलिस प्रसाशन को ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने पर जुर्माना वसूली का अधिकार तो दिया गया है लेकिन मासूम लोगों पर हाथ उठाने एवं उन्हें प्रताड़ित करने का अधिकार उन्हें किसने दिया? क्या भारत के संविधान में या मानवाधिकार के नियमों में ऐसे किसी भी बात का ज़िक्र है कि सड़क नियमों के उल्लंघन पर जनता के साथ मारपीट करने का अधिकार पुलिस वालों को दिया गया है? जब सड़क पर इस प्रकार से मनमानी करने वाले पुलिस अधिकारियों द्वारा रिक्शावाले, टैक्सीवाले, या ऑटोवालों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है तो सरकार इन अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती? शायद यही वजह है कि आज पुलिस की वर्दी पहनने वाले खुद को सबसे ज्यादा शक्तिशाली मानने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है चाहे वे कुछ भी करें उन पर कार्रवाई कभी नहीं होगी। यह पुरी तरह से सरकार की नाकामीयाबी को दर्शाता है। दुनिया जिस रफ्तार से बदल रही है उसे देखते हुए, हम ये नहीं कहेंगे हैं कि पिछले 70 या 75 सालों में क्या हुआ लेकिन हम ये जरूर पूछेंगे कि आने वाले समय में हमारे राजनेता देश को क्या भविष्य देंगे?

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