बाबाओं की साधु लीला नहीं रास-लीला

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। पिछले कुछ वर्षों में शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जब देश में महिलाओं के खिलाफ कोई अपराध की घटनाएं हमने न घटी हो। आज महिलाएं घर, स्कूल, कॉलेज आदि कहीं भी सुरक्षित नहीं है। इतना ही नहीं बल्कि आलम तो यह है कि आज महिलाएं धार्मिक स्थलों में भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती। आए दिन इसी सिलसिले में कई अप्रिय घटनाएं हमारे सामने आती है, कि किसी बाबा ने या किसी स्वामी ने मासूम लड़कियों और महिलाओं का यौन शोषण किया। कई महिलाएं व लड़कियां इसके खिलाफ आवाज उठाती है, तो कई चुप रहने में भी भलाई समझती है। हालांकि कई बार विरोध करने वाली महिलाओं की आवाज़ भी दबा दी जाती है। इन ढोंगीयों में आसाराम बापू, नित्यानंद, नारायण साईं, गुरमीत राम रहीम और न जानें कितने नाम शामिल है।

नेता रागे चिन्मयानंद का आलाप

बड़े बड़े पुलिस अधिकारी बाबाओं के मुरीद थे, नामचीन राजनेता इन बाबाओं से मिला करते थे। क्योंकि ये ढ़ोंगी अध्यात्म का भगवा चोला ओढ़ा करते थे। दरअसल ये भगवा लिबास उसका नकाब था, जिसके पीछे उसका अय्याश चेहरा आसानी से छुप जाता था। लेकिन हर गुनाह एक दिन बेनकाब होता जरूर है। इन बाबाओं का गुनाह भी छुप नहीं सका और वह पहुंच गये जेल की सलाखों के पीछे। पुलिस जांच के बाद अय्याश बाबाओं का जो अय्याशलोक सामने आया है, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। बता दें कि पिछले समय से ऐसे कई बाबाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है जिन पर बेहद संगीन आरोप लगे हैं। हालांकि समय समय पर इन पाखंडी बाबाओं के बचाव में उतरे नेता, अभिनेता एवं अधिकारियों को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा। ठीक वैसे ही बीते दिनों भाजपा के विधायक और कद्दावर नेता चिन्मयानंद के बचाव में कई भाजपा विधायक व सांसद उतरे। मीडिया के सामने उन्होंने यह तक कह दिया कि अगर चिन्मयानंद पर लगे आरोप सिद्ध नहीं हुए तो इसका नतीजा ठीक नहीं होगा और लोगों को इसके लिए भुगतना पड़ेगा। 

क्या है पूरा मामला

बता दें कि 24 अगस्त की शाम शाहजहांपुर स्थित एसएस लॉ कॉलेज की एलएलएम की छात्रा ने एक वीडियो वायरल कर स्वामी पर शारीरिक शोषण व दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। उसके बाद से वह लापता रहें। इससे पहले पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. एस. चिनप्पा ने बताया कि 22 अगस्त को स्वामी चिन्मयानंद के वॉट्सएप नंबर पर मैसेज आया, जिसमें उनसे पांच करोड़ की रंगदारी मांगी गई थी। उस प्रकरण में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद 24 अगस्त को एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक छात्रा स्वामी पर आरोप लगा रही थी। छात्रा के परिजनों ने अपनी तहरीर में स्वामी चिन्मयानंद व अन्य लोगों पर वीडियो के आधार पर दुष्कर्म, शारीरिक शोषण और अपहरण समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि अपने ऊपर लगे आरोपों को चिन्मयानंद ने स्वीकार कर लिया है और अपने गुनाहों को कुबुल कर लिया है।  

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद 8 साल बाद फिर विवादों में फंस गए हैं। पहले उनकी शिष्या ने दुष्कर्म का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया था। इस बार उनके कॉलेज की छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए। जून 2011 में उनकी शिष्या ने दुष्कर्म व शोषण का आरोप लगाते हुए कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। वह मामला अभी विचाराधीन है।

धर्म और समाज के अपराधी हैं बाबा 

शाहजहाँपुर के कुख्यात कथित संत, भाजपा नेता और पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद कानून से ज्यादा धर्म और समाज के अपराधी हैं। उन्होंने करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा से खिलवाड़ किया है, इसलिए उनके प्रति किसी भी दृष्टि से उदारता नहीं बरती जानी चाहिए। आसाराम बापू, नारायन साईं, नित्यानंद, गुरमीत राम रहीम और चिन्मयानंद जैसे कोई भी बाबा किसी भी दृष्टि से उदारता के पात्र नहीं हैं। धर्म, शिक्षा और उम्र की आड़ में जघन्य अपराध करने वाले इन बाबाओं को शर्मसार करने के लिए संपूर्ण समाज को आगे आना चाहिए।

यौन शोषण के आरोपी कई 

बीते 24 अगस्त यौन शोषण का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो के अनुसार भाजपा के विधायक स्वामी चिन्मयानंद पर यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा। शाहजहांपुर रेप मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद  पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस ही गया। मामले की जांच कर रही एसआईटी ने उन्हें बीते दिनोंं गिरफ्तार कर लिया। ऐसा हरगिज नहीं है कि देश में पहली बार बलात्कार के आरोप में किसी बाबा पर नकेल कसी गई हो, इससे पहले भी कई अय्याश बाबाओं की काली करतूतों के सामने आने के बाद उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। ये हैं वो बाबा जिनपर यौन शोषण, बलात्कार जैसे संगीन आरोप लग चुके हैं और इनमें से कुछ आज जेल में जिंदगी काट रहे हैं…

स्वामी चिन्मयानंद : अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके स्वामी चिन्मयानंद बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। शाहजहांपुर का पत्ता-पत्ता उनके रुतबे की कहानी बयां करता है। यही वजह है कि कानून की पढ़ाई कर रही छात्रा ने जब चिन्मयानंद पर रेप का आरोप लगाया, तो कई दिनों तक उसकी शिकायत पर सुनवाई तक नहीं हुई। मामला मीडिया में उछला तो योगी सरकार ने किरकिरी से बचने के लिए आनन-फानन में केस दर्ज कर एसआईटी का गठन करने का फरमान सुना दिया। पीड़िता ने एसआईटी को बतौर सबूत कई वीडियो सौंपे हैं, हालांकि सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ा बताया जा रहा एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़िता का कहना है कि यह वीडियो ना ही उससे और ना ही उसके दोस्तों से जुड़ा है। चिन्मयानंद का कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

आसाराम बापू : स्वयंभू बाबा आसाराम बापू ने चार दशक में 10 हजार करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। देश और दुनिया में उसके 400 से ज्यादा आश्रम हैं। दलित परिवार से ताल्लुक रखने वालीं सूरत निवासी दो नाबालिग सगी बहनों ने आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं की काली करतूतों का पर्दाफाश किया था। जिसके बाद 31 अगस्त, 2013 को आसाराम को गिरफ्तार किया गया था और तब से रेपिस्ट बाबा जेल में बंद है। फरार चल रहे नारायण साईं को उसी साल दिसंबर में अरेस्ट किया गया था। दोनों आरोपी कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जा चुके हैं और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। नारायण साईं को इसी साल अप्रैल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इस बीच आसाराम कई बार खराब सेहत का हवाला देकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में जमानत याचिका दाखिल कर चुका है, लेकिन अदालत हर बार उसकी बेल नामंजूर करती आ रही है। आसाराम के भक्त अपने बापू को बेगुनाह मानते हैं।

गुरमीत राम रहीम : बलात्कार और हत्या के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का अब जेल से बाहर आना नामुमकिन है। राम रहीम पर उसकी दो अनुयायियों ने ही रेप का आरोप लगाया था। इन साध्वियों ने एक चिट्ठी के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपनी आपबीती सुनाई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में सुओ मोटो लिया और सीबीआई से मामले की जांच कराई। साल 2017 में पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को रेप का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होते ही पंचकूला में ढोंगी बाबा के समर्थकों ने दंगे सरीखे हालात पैदा कर दिए थे। इस पूरे घटनाक्रम में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसी साल जनवरी में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में भी सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने राम रहीम, उसके भक्त निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह और कृष्णलाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

स्वामी नित्यानंद : तमिलनाडु के थिरुनामलाई निवासी राजशेखर ने 22 साल की उम्र में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का दावा किया। यही बाबा आज स्वामी नित्यानंद के नाम से जाने जाते हैं। स्वयंभू बाबा स्वामी नित्यानंद फिलहाल तो जमानत पर बाहर हैं, लेकिन सेक्स सीडी से लेकर भक्तों से यौन शोषण के आरोपों में उनकी भूमिका हमेशा से संदिग्ध रही है। नित्यानंद पर कई केस दर्ज हो चुके हैं। साल 2010 में बाबा की एक सेक्स सीडी से सनसनी मच गई थी। इस वीडियो में नित्यानंद साउथ की एक मशहूर अभिनेत्री के साथ आपत्तिजनक हालत में दिखे थे। केस दर्ज हुआ और गिरफ्तारी के डर से नित्यानंद फरार हो गए। जिसके बाद कर्नाटक पुलिस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के सोलन से पकड़ा था। उस दौरान नित्यानंद के कई आश्रमों पर ताले तक जड़ दिए गए थे। फिलहाल वह जमानत पर रिहा किए गए हैं।

आशु महाराज उर्फ आसिफ खान : राजधानी दिल्ली में साल 2018 में खुद को आशु भाई गुरुजी महाराज बताने वाले स्वयंभू बाबा की काली करतूतों का कच्चा-चिट्ठा सामने आते ही लोग सकते में आ गए थे। खुद को आशु भाई महाराज बताने वाले शख्स का असली नाम आसिफ खान था। आशु महाराज के खिलाफ गाजियाबाद की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाते हुए कहा था कि वह साल 2008 में उससे मिली थी। उसकी 6 साल की बेटी के पैरों में दर्द रहता है। बाबा इलाज के नाम पर बच्ची को नग्न कर मालिश करता था। इतना ही नहीं, बच्ची को ठीक करने का झांसा देकर आशु महाराज ने उसका रेप किया। वह जान से मारने की धमकी देकर लगातार उसे हवस का शिकार बनाता रहा। आसिफ खान के दोस्तों और बेटे समर खान ने भी महिला का रेप किया था। मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी देते हुए पीड़िता को कई बार पीटा गया था। पुलिस ने केस दर्ज किया और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आशु महाराज अपने दोस्तों और बेटे के साथ जेल की हवा खा रहा है।

पहले भी लगे हैं रेप के आरोप

इसके पहले भी एक लड़की ने स्वामी चिन्मयानंद के ऊपर किडनैपिंग और रेप का मामला दर्ज करवाया था। स्वामी चिन्मयानंद पर 2011 में उनके आश्रम में रहने वाली एक लड़की ने रेप का आरोप लगाया था। 30 नवंबर 2011 को शाहजहांपुर की कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद के ऊपर रेप की एफआईआर दर्ज की गई। रेप का आरोप लगाने वाली लड़की ने चिन्मयानंद के आश्रम में कई साल गुजारे थे। उसने अपनी शिकायत में कहा था कि हरिद्वार में आश्रम में रहने के दौरान स्वामी चिन्मयानंद ने उसका रेप किया था। इस संबंध में पीड़ित लड़की के पिता ने शाहजहांपुर में एफआईआर दर्ज करवाई थी। 

इस मुकदमे के खिलाफ स्वामी चिन्मयानंद ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। पिछले साल यूपी की योगी सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने का फैसला लिया। इस संबंध में 6 मार्च 2018 को शाहजहांपुर प्रशासन को पत्र लिखा गया था। जिसके बाद 9 मार्च 2018 को शाहजहांपुर प्रशासन ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की सिफारिश कर दी थी। इस बारे में योगी सरकार के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा था कि सरकार ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है। लेकिन कोर्ट में मामला चलता रहेगा। अगर कोई इस फैसले के खिलाफ जाना चाहता है तो वो इसे कोर्ट में चलैंज कर सकता है। कहा जा रहा था कि पीड़ित लड़की ने एफिडेविट देकर मामले को खत्म करने की अपील की थी। जबकि बाद में पीड़ित लड़की ने मीडिया के सामने आकर कहा था कि इस बारे में उसके नाम पर झूठा एफिडेविट दिया गया था। उसने कभी एफिडेविट फाइल नहीं किया था। पिछले साल योगी सरकार ने स्वामी चिन्मयानंद के ऊपर लगे रेप के एक मुकदमे को वापस ले लिया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ पीड़ित लड़की ने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, यूपी के राज्यपाल और यूपी के सीएम के साथ जिला जल को पत्र लिखकर इंसाफ की मांग की थी। उसने स्वामी चिन्मयानंद की तुरंत गिरफ्तारी की मांग रखी थी।

चिन्मयानंद की पूरी कहानी कहानी 

शाहजहाँपुर में एक संत स्वामी शुकदेवानंद ने मुमुक्षु आश्रम में शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना की थी, उनके देह त्यागने के बाद चिन्मयानंद संस्थाओं के अध्यक्ष बन बैठे। चिन्मयानंद द्वारा ही कथित तौर पर संचालित की जा रही संस्था के लॉ कॉलेज में एक छात्रा थी और वह यहाँ जॉब भी करती थी, इस छात्रा ने एक वीडियो क्लिप के द्वारा चिन्मयानंद पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। वीडियो में छात्रा ने अपने और अपने परिवार पर खतरा होने की बात कही थी, जिसके आधार पर छात्रा के पिता ने 27 अगस्त को शाहजहांपुर स्थित चौक कोतवाली में चिन्मयानंद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने उच्च स्तरीय दबाव के बाद बमुश्किल मनमानी धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया था, जबकि आरोप लगाने से पहले से छात्रा लापता भी हो गई थी। उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था, जिसके बाद न्यायाधीश आर. भानुमति और ए.एस. बोपन्ना की पीठ ने सुनवाई शुरू कर दी। छात्रा राजस्थान में पाई गई, जिसे न्यायालय ने अपने पास बुलवा लिया और दिल्ली पुलिस की अभिरक्षा में दे दिया। छात्रा के आग्रह पर न्यायालय ने छात्रा के माता-पिता को भी दिल्ली बुलवा लिया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह प्रकरण की जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करे। एसआईटी का नेतृत्व आईजी स्तर का अधिकारी करे, जिसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय करेगा, साथ ही छात्रा और उसके भाई का नामांकन अन्य संस्थान में करायें। न्यायालय के आदेश पर एसआईटी शाहजहाँपुर में डेरा डाले हुए है और जाँच में जुटी हुई है, इस सब पर शर्मसार होने की जगह चिन्मयानंद का बयान आया था कि वह विश्वविद्यालय बनाना चाहता है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है, उसे प्रभावित करने के लिए झूठे आरोप लगाये गये हैं, इस बीच एक दर्जन से अधिक वीडियो वायरल हो गये, जिनमें पीड़ित छात्रा कुख्यात कथित संत चिन्मयानंद की तेल से मालिश करती नजर आ रही है, चिन्मयानंद बिल्कुल नंगे हैं, साथ ही छात्रा से अश्लील बातें भी करते दिख रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद चिन्मयानंद के पास कहने को कुछ नहीं बचा है। हालाँकि चिन्मयानंद के बारे में सभी को पहले से ही सब कुछ पता है पर, वह साक्ष्य न होने के कारण बेशर्मी से आरोपों को नकार देते थे और राजनैतिक शक्ति के बल पर कार्रवाई से बच जाते थे। छात्रा द्वारा लगाये आरोप सही पाये जायेंगे या, गलत?, यह एसआईटी की जाँच में साबित होगा और उस जांच आख्या को न्यायालय परखेगा पर, अब सवाल कानून का नहीं है। सवाल है आस्था, श्रद्धा का। सवाल है, उन भगवा वस्त्रों का, जिन्हें देखते ही लोगों की आस्था और श्रद्धा उमड़ आती है। सवाल है, उस उम्र का, जिसके सामने सर्व समाज नतमस्तक हो जाता है। सवाल है, उस शिक्षा के मंदिर का, जिसे देवताओं के मंदिर से कम सम्मान नहीं दिया जाता। एसआईटी जाँच में क्या होगा, न्यायालय क्या सजा देगा, यह बात अब पीछे छूट गई है। अब बात भारतीय संस्कृति और परंपरा को छिन्न-भिन्न करने की है। भगवाधारी को भारतीय परंपरा के अनुसार विशिष्ट सम्मान दिया जाता रहा है। चिन्मयानंद ने भगवा को कलंकित किया है। धर्म के प्रति लोगों में गहरी आस्था और श्रद्धा है। चिन्मयानंद ने आस्था और श्रद्धा को तार-तार किया है। 75-80 वर्ष के बुजुर्ग को हर कोई अतिरिक्त सम्मान देता है, उन्होंने समाज के वरिष्ठता क्रम को कलंकित किया है। स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियाँ संस्था के संरक्षक के लिए बेटी समान ही होती हैं, इसने बेटियों को ही शिकार बना कर शिक्षा के मंदिर को भी कलंकित किया है।  चिन्मयानंद की कारगुजारियों से हर वर्ग पहले से परिचित था। सरस्वती संप्रदाय में स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है, इसके बावजूद यह व्यक्ति स्त्रियों के संपर्क में सदैव रहा है, यह बात संत समाज से भी छुपी नहीं है पर, राजनैतिक दृष्टि से मजबूत चिन्मयानंद के विरुद्ध संत समाज भी कभी खड़ा नहीं हुआ। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक को सब कुछ ज्ञात है पर, भाजपा की ओर से भी इसके विरुद्ध कभी कोई बयान नहीं आया। राजनैतिक दलों के हित हो सकते हैं, वे राजनैतिक लाभ और हानि के आधार पर निर्णय लेते हैं लेकिन, समाज का प्रथम दायित्व होता है कि वह नरभक्षी जानवरों से समाज को बचाये। समाज ही त्वरित निर्णय लेता है, ऐसे ही समाज को चिन्मयानंद के प्रकरण में त्वरित निर्णय लेना चाहिए। अब समाज का ही प्रथम दायित्व है कि वह इसके विरुद्ध एकजुट हो और इसके कुकृत्यों की घोर निंदा करे। कानूनी रूप से मिलने वाली अपराध की सजा से बड़ा दंड चिन्मयानंद की निंदा करना ही है। सर्व समाज चिन्मयानंद के विरुद्ध एकजुटता से खड़ा हो और इसके कुकृत्यों की घनघोर निंदा करते हुए इसका पूर्ण रूप से बहिष्कार करे, इसकी यही सही सजा होगी।

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