गर्भावस्था में ऐसे निपटे रक्तचाप से

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। गर्भावस्था के दौरान हर महिला को कई शारीरिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इनमें से कुछ बदलाव गर्भवती के लिए परेशानियां भी लेकर आते हैं। कभी जी-मिचलाना, उल्टी आना, तो कभी उच्च या निम्न रक्तचाप। अगर इन परेशानियों का समझदारी से सामना किया जाए, तो मां और शिशु दोनों के लिए अच्छा होता है। इस लेख में हम गर्भावस्था के दौरान कम रक्तचाप के बारे में बात करेंगे। हम जानेंगे कि गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप कम कब होता है, यह कितने प्रकार का होता है, इसके कारण व लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान कम रक्तचाप का मतलब क्या है?

चाहे आप गर्भवती हैं या नहीं दोनों ही अवस्था में रक्तचाप का सामान्य स्तर 120/80 एमएमएचजी होता है। वहीं, गर्भावस्था के दौरान 90/50 एमएमएचजी से कम के स्तर को कम रक्तचाप कहा जाता है (1)। लो बीपी को हाइपोटेंशन भी कहा जाता है। गर्भावस्था के दौरान सामान्य रक्तचाप इस बात का संकेत होता है कि मां और बच्चे का स्वास्थ्य ठीक है और बच्चे का विकास ठीक प्रकार से हो रहा है। वहीं, अगर रक्तचाप कम या ज्यादा होता है, तो यह कई तरह की शारीरिक परेशानियां खड़ी कर सकता है। इसलिए, जरूरी है कि अपना रक्तचाप सामान्य रखें। गर्भावस्था की पहली तिमाही यानी शुरुआती तीन महीनों में कम रक्तचाप की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। वहीं, किसी-किसी मामले में यह समस्या दूसरी तिमाही तक भी चल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि गर्भवती के रक्तचाप की नियमित रूप से जांच की जाए, ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी तरह का नुकसान न हो। जब आप काफी देर से बैठी हों या लेटी हों और अचानक खड़ी हो जाएं, तो इससे रक्तचाप कम हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अचानक से खड़े होने पर रक्त को मस्तिष्क तक पहुंचने में कुछ समय लगता है, जिस कारण रक्तचाप धीमा पड़ जाता है। गर्भवती महिला जब सहारा लेकर बैठती या लेटती है, तो वीना कैवा और महाधमनी जैसी प्रमुख रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिस कारण रक्तचाप में गिरावट आ सकती है। ऐसा बढ़ते गर्भाशय के कारण होता है, जो ज्यादातर दूसरी और तीसरी तिमाही के आसपास होता है। गर्भावस्था के दौरान कम रक्तचाप के प्रकार जानने के बाद आइए नजर डालते हैं लो-बीपी के कारणों पर।


गर्भावस्था के दौरान कम रक्तचाप के कारण

गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव ज्यादा होते हैं, इस कारण भी रक्तचाप के स्तर में उतार-चढ़ाव आ जाता है। फिलहाल हम नीचे गर्भावस्था के दौरान कम रक्तचाप के कुछ सामान्य कारण बताने जा रहे हैं : पहली तिमाही में कम रक्तचाप के पीछे मुख्य कारण हार्मोनल परिवर्तन हो सकता है, जिससे रक्त वाहिकाओं में फैलाव होता है।

गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में उल्टियां होने के कारण कई बार शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिस कारण रक्तचाप गिर सकता है। गर्भाशय का फैलाव रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है, जिस कारण हाइपोटेंशन यानी कम रक्तचाप की समस्या पैदा हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया और हाइपोग्लाइसीमिया (ऐसी स्थिति, जो कम रक्त शर्करा के स्तर का कारण बनती है) होने से भी बीपी कम हो सकता है। अगर आपको हृदय से संबंधित परेशानियां हैं, तो इससे आपके रक्तचाप के स्तर में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, विटामिन-बी12 और फोलिक एसिड की कमी के कारण भी रक्तचाप कम हो सकता है। जब शिशु गर्भ में होता है, तो मां से पोषक तत्व ग्रहण करता है। ऐसे में अगर गर्भवती में विटामिन और फोलिक एसिड की कमी होती है, तो रक्तचाप भी गिरने लगता है।


प्रेग्नेंसी के दौरान लो ब्लड प्रेशर के कुछ सामान्य लक्षण :

चक्कर आना

जी-मिचलाना

धुंधला दिखना

बार-बार प्यास लगना

सांस लेने में परेशानी होना

दिन भर थकान महसूस करना

ठंड लगना या त्वचा में पीलापन आना

अचानक से खड़े होने पर सिर घूमने जैसा महसूस होना या आंखों के आगे अंधेरा छाना


गर्भावस्था में कम रक्तचाप की जांच

रक्तचाप के स्तर की जांच करना आसान है। रक्तचाप को मापने के लिए स्फाइगनोमैनोमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। रक्तचाप की जांच के लिए पहले महिला के हाथ को चारों ओर से रबर के पट्टे को लपेट दिया जाता है। इसके बाद ब्रेकियल धमनी में 200 एमएम एचजी का दबाव देते हुए पंप करते हैं। स्फाइगनोमैनोमीटर में इस दबाव को देखा जा सकता है। इसके बाद रबड़ के पट्टे के दबाव को डिफ्लेटिंग से कम करते हैं और धमनी पर रखे गए स्टेथोस्कोप के जरिए पट्टे के दबाव से पहली टेपिंग आवाज सुनाई देती है। इसे सिस्टोलिक दबाव कहते हैं।


गर्भावस्था में कम रक्तचाप का घरेलू उपचार

इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर किसी तरह की कोई शारीरिक समस्या शुरू होती है, तो बहुत लोग सबसे पहले घरेलू उपचार की ओर रुख करते हैं। कम रक्तचाप के मामलों में भी ऐसा ही है। इसलिए, नीचे हम आपको गर्भावस्था के दौरान कम रक्तचाप होने पर अपनाए जाने वाले घरेलू उपचारों के बारे में बता रहे हैं। आप अपने डॉक्टर की सलाह लेकर इन चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

नमक का पानी : ज्यादातर डॉक्टर बीपी गिरने पर नमक वाला पानी पीनी की सलाह देते हैं। चूंकि, नमक में सोडियम होता है, जो रक्तचाप बढ़ाने में मदद करता है, लेकिन आप इसका सेवन ज्यादा भी न करें। इससे सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। रक्तचाप कम होने पर एक गिलास पानी में आधा चम्मच नमक डालकर पी सकते हैं। चूंकि, नमक का पानी पीने से रक्तचाप बढ़ सकता है, इसलिए उच्च रक्तचाप में इसका सेवन करने से मना किया जाता है।

मुरब्बा : रोजाना आंवले या सेब का मुरब्बा खाने से लो ब्लड प्रेशर की समस्या से राहत मिल सकती है।

खजूर : रोजाना रात को एक गिलास दूध में दो से तीन छुआरे डालकर उबालें और फिर इसे पिएं। इससे कम रक्तचाप की समस्या से कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।

कॉफी : कॉफी कम रक्तचाप में फायदा पहुंचा सकती है, लेकिन ध्यान रहे कि आप इसका ज्यादा सेवन न करें। गर्भावस्था के दौरान एक से दो कप कॉफी पीने से कम रक्तचाप की समस्या को टाला जा सकता है। कॉफी पीने से रक्तचाप तेज होता है।

तरल पदार्थ लें : कम रक्तचाप होने पर जरूरी है कि आप ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करें। आप चाहें तो फलों के जूस में थोड़ा नमक डालकर भी पी सकती हैं।

चुकंदर का रस : इस दौरान रोजाना एक सप्ताह तक एक कप चुकंदर का रस पिएं। इससे कम रक्तचाप में सुधार आएगा।

अदरक : एक अदरक के टुकड़े पर नींबू का रस और सेंधा नमक लगाकर भोजन से पहले थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते रहें। इस घरेलू उपाय से कम रक्तचाप से राहत मिल सकती है।

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