आगरा का किला : मुगल बादशाहों ने सैंकड़ों वर्षों तक किया राज

Total Views : 441
Zoom In Zoom Out Read Later Print

प्राचीन किलों से है भारत की पहचान बेंगलूरु, (परिवर्तन)। प्राचीनकाल में विशालकाय महल और मंदिर बनते थे। नगर को चारों ओर से सुरक्षित करने के लिए परकोटे बनते थे अर्थात चारों ओर विशालकाय पत्थरों की दीवारें होती थीं और उन दीवारों में चारों दिशाओं में चार अलग-अलग दरवाजे होते थे। मध्यकाल में विदेशी आक्रमण के चलते भव्य किले बनाए जाने लगे। किले को 'दुर्ग' कहा जाता है। ऐसे किले हमारे गौरवशाली इतिहास और युद्ध को दर्शाते हैं। हर साल विदेशों से आने वाले लाखों सैलानियों का कहना है कि इन प्राचीन किलों से यह पता चलता है कि भारत का इतिहास कितना प्राचीन और कितना भव्य है। इनमें से ‍कुछ किलों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में भी शामिल किया गया है। आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे किलों के बारे में बता रहे हैं जिनका इतिहास जानकार आप हैरान रह जाएंगे।

उत्तरप्रदेश के आगरा में स्थित आगरा का किला यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में दर्ज है। इस किले में मुगल बादशाह बाबर, हुंमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां व औरंगजेब रहते थे। यहीं से उन्होंने आधे भारत पर शासन किया। ये सभी विदेशी थे जिन्हें भारत में 'तुर्क' कहा जाता था। इन तुर्क शासकों ने इस चौहानवंशी किले पर कब्जा करके इसे अरबी लुक दिया। आगरा का किला मूलतः एक ईंटों का किला था, जो चौहान वंश के राजपूतों के पास था। इस किले का प्रथम विवरण 1080 ईस्वी में आता है, जब महमूद गजनवी की सेना ने इस पर कब्जा कर लिया था। पुरुषोत्तम नागेश ओक की किताब 'आगरे का लाल किला हिन्दू भवन है' में भी इसका जिक्र है। सिकंदर लोधी (1487-1517) ने भी इस किले में कुछ दिन गुजारे थे। लोधी दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था। उसकी मृत्यु भी इसी किले में 1517 में हुई थी। इसके बाद उसके पुत्र इब्राहीम लोधी ने गद्दी संभाली।

पानीपत के युद्ध के बाद यह किला मुगलों के हाथ में आ गया। यहां उन्हें अपार संपत्ति मिली। फिर इस किले में इब्राहीम के स्थान पर बाबर आया और उसने यहीं से अपने क्रूर शासन का संचालन किया। इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा है कि यह किला एक ईंटों का किला था जिसका नाम बादलगढ़ था। यह तब खस्ता हालत में था तब अकबर ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। हिन्दू शैली में बने किले के स्तंभों में बाद में तुर्क शैली में नक्काशी की गई। बाद में अकबर के पौत्र शाहजहां ने इसे अपने तरीके से रंग-रूप दिया। उसने किले के निर्माण के समय राजपुताना समय की कई पुरानी इमारतों व भवनों को तुड़वा भी दिया था।

See More

Latest Photos