आप विधायक की गिरफ्तारी पर लगी रोक 26 तक बढ़ी

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नई दिल्ली, (परिवर्तन)। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी की गिरफ्तारी पर लगी रोक 26 सितम्बर तक के लिए बढ़ा दिया है। स्पेशल जज अजय कुमार कुहार ने अखिलेश पति त्रिपाठी को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब भी जांच अधिकारी बुलाएं वे जांच में शामिल हों।

पिछले 13 सितम्बर को कोर्ट ने अखिलेश पति त्रिपाठी की गिरफ्तारी पर लगी रोक पर आज तक के लिए रोक लगाई थी। कोर्ट ने नगर निगम के अधिकारी की पिटाई के बाद इलाज करने वाले निजी अस्पताल के रिकॉर्ड तलब किया था। पिछले 12 सितम्बर को कोर्ट ने अखिलेश पति त्रिपाठी को राहत देते हुए 13 सितम्बर तक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया था। त्रिपाठी ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के साथ मारपीट के मामले में दर्ज एफआईआर मामले में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। स्पेशल जज अजय कुमार कुहार ने त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 13 सितम्बर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। 13 सितम्बर तक त्रिपाठी के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी ने त्रिपाठी के खिलाफ आदर्श नगर थाने में मारपीट का मामला दर्ज कराया है। घटना पांच सितम्बर की है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के इंस्पेक्टर रवीन्द्र कुमार गुप्ता ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि जब वे आजादपुर इलाके में साफ सफाई के काम की निगरानी कर रहे थे उस समय विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी और उनके समर्थकों ने सरकारी काम में बाधा डालते हुए मारपीट की और मोबाइल छीन लिया। मारपीट में इंस्पेक्टर को चोटें आईं, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया। अखिलेश पति त्रिपाठी ने कोर्ट से कहा कि उन्हें इस केस में फंसाया गया है। ये एफआईआर उनकी शिकायत के बदले में दर्ज किया गया। वे पांच सितम्बर को अपने इलाके में जलजमाव की शिकायत की जांच करने पहुंचे थे। वहां उन्होंने नगर निगम के इंस्पेक्टर को कॉल किया, जिसका इंस्पेक्टर ने कोई जवाब नहीं दिया। उसके बाद विधायक स्थानीय लोगों के साथ इंस्पेक्टर के दफ्तर पहुंचे और जलजमाव की वजह के बारे में पूछताछ की। त्रिपाठी के मुताबिक पूछताछ करने पर इंस्पेक्टर ने झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इंस्पेक्टर ने अपनी कमियां छिपाने के लिए विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को बुला लिया। विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की।

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