यातायात उल्लंघन दंड : क्या केवल जनता के नाम हो !

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केंद्र सरकार द्वारा बीते दिनों मोटर व्हीकल एक्ट 2019 लागू किया गया। इस एक्ट की मानें तो ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वाले व्यक्ति पर इसमें बताए गए कानून के तहत भारी भरकम चालान काटे जा रहे हैं। देश के विभिन्न प्रांतों में आम जनता इससे परेशान है। सरकारी नेताओं का कहना है कि इस कानून के तहत लोगों में ट्रैफिक नियमों के पालन हेतू जागरूकता बढ़ेगी और सड़क दुर्घटनाएं भी कम होंगी।

हालांकि यह एक्ट देश के हर व्यक्ति पर लागू होना चाहिए लेकिन सोशल मीडिया में फैले कुछ वीडियो में जो देखने को मिल रहा है वो इससे कहीं विपरीत है। दरअसल पिछले दिनों कई बड़े अफसरों और नेताओं द्वारा किए गए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन का वीडियो सामने आया। वीडियो में यह भी दिखाया गया कि किस प्रकार अफ़सर बाबू और नेताजी चालान काटने पर ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों को धमका रहे हैं। इन वीडियो को देख कर ऐसा कहना ग़लत नहीं होगा कि नए मोटर वाहन क़ानून को  आम जनता पर एकतरफ़ा थोपा जा रहा है। केवल जनता पर इसके अमल से यह ज़ाहिर है कि देश में शासक-वर्ग यानी नेताओं के लिए अब भी अभिजात्य व्यवस्था का दौर जारी है। पुलिस अधिकारी यदि क़ानून तोड़ें, तो दुगने जुर्माने का क़ानून बनाया गया है। क़ानून बनाने वाले माननीय नेता लोग यदि इन कानूनों को तोड़ें तो पाँच गुना जुर्माने का प्रावधान क्यों नहीं होना चाहिए? मोटर वाहन क़ानून के अनुसार पॉल्यूशन सर्टिफिकेट न होने पर जुर्माने का प्रावधान है। सड़कों पर ग़ैर-ज़िम्मेदार तरीक़े से वाहन चलाने और रेसिंग पर भी नए क़ानून के अनुसार जुर्माने का प्रावधान है। इन क़ानूनों का मक़सद आम लोगों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण करना भी है। फिर इन क़ानूनों को नेताओं की बाइक रैलियों पर क्यों नहीं लागू नहीं किया जाता? देश में करोड़ों लोगों का सीट बेल्ट और हेलमेट नहीं पहनने पर चालान हो रहा है। परन्तु बगैर हेलमेट के चुनावी झंडों के साथ मदमस्त बाइकर्स के डराते हुजूम के नेताओं पर जुर्माना क्यों नहीं लगता? सुशासन के नाम पर बनी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने वर्ष 2011 में मुंबई से बाइक रैली के ट्रेंड की शुरुआत की थी। उसके बाद हरियाणा में भाजपा नेताओं ने एक लाख बाइक की रैली से नया राजनीतिक कीर्तिमान तो बनाया, परन्तु सड़क सुरक्षा के सारे क़ानून ध्वस्त हो गए। नई क़ानूनी व्यवस्था के तहत दो पहिया वाहनों में ओवरलोडिंग पर 20 गुना जुर्माने का प्रावधान है। सवाल यह है कि रोड-शो के दौरान वाहनों की ओवरलोडिंग के लिए राजनेताओं के गैंग पर जुर्माना लगा कर, नई मिसाल क्यों नहीं कायम की जाती?

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