फ्लेक्सी किराए के चलते शताब्दी एक्सप्रेस में सीटें खाली, रेलवे को घटा

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लखनऊ, (परिवर्तन)। रेलवे ने लखनऊ से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में फ्लेक्सी किराया सिस्टम लागू कर रखा है। इसलिए ट्रेन का किराया तो बढ़ गया है, लेकिन सितम्बर महीने के अंत तक काफी सीटें खाली हैं।

रेल आरक्षण से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि शताब्दी एक्सप्रेस यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन है, लेकिन  फ्लेक्सी किराए के चलते इस ट्रेन में यात्रियों का रूझान अब कम हो गया है। इसलिए गर्मी की छुट्टियों और त्योहार के बाद यह ट्रेन यात्रियों के लिए तरस जाती है। उन्होंने बताया कि  इन दिनों जहां दिल्ली की ओर जानी वाली दूसरी ट्रेनों में वेटिंग चल रही है जबकि शताब्दी एक्सप्रेस में सीटें खाली हैं। इस चेयरकार ट्रेन में हवाई  जहाज सी सुविधाओं वाली 'अनुभूति' बोगी भी है। हालांकि  इसका किराया भी हवाई जहाज जैसा ही है। अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने इस ट्रेन पर 'फ्लेक्सी प्राइसिंग सिस्टम' लागू कर  रखा है। इससे चेयरकार का किराया 1500 रुपये तक पहुंच गया, जबकि अनुभूति बोगी का किराया 2,255 रुपये है। उन्होंने बताया कि फ्लेक्सी सिस्टम के चलते किराया बढ़ने से  रेलवे को नुकसान हो रहा है। ट्रेन की चेयरकार बोगियों और अनुभूति कोच में  सितम्बर के अंत तक बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं, जबकि लखनऊ मेल व एसी एक्सप्रेस में वेटिंग चल रही है। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (सीपीआरओ) पकंज कुमार सिंह ने बताया कि फ्लेक्सी प्राइसिंग की वजह से शताब्दी एक्सप्रेस में सीटें खाली नहीं रह जाती हैं। त्योहारों पर तो खासी वेटिंग रहती है। फ्लेक्सी प्राइसिंग के बावजूद यात्री इस ट्रेन में टिकट खरीदते हैं।दरअसल, शताब्दी एक्सप्रेस में फ्लेक्सी प्राइसिंग सिस्टम के तहत  दस प्रतिशत सीटें बुक होने के बाद किराये में दस प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है। इससे अलावा किराए में कैटरिंग चार्ज 165 रुपये, रिजर्वेशन चार्ज 40 रुपये, सुपरफास्ट चार्ज 45 रुपये, फ्लेक्सी और जीएसटी चार्ज भी जोड़ा जाता है। इससे किराया काफी बढ़ जाता है।

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