मोदी सरकार के 100 दिनों का लेखा-जोखा

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बेंगलूरु, (परविर्तन)। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर केंद्र सरकार ने आने वाले वक्त में भारत को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य का रोडमैप जारी किया है। इसके अनुसार निवेश बढ़ाने और रोज़गार के नए अवसर पैदा करने के लिए दो कैबिनेट समितियां बनाई गई हैं। ये पैनल हैं 'निवेश एवं विकास पैनल' और 'रोज़गार एवं कौशल विकास पैनल।'

प्रधानमंत्री खुद इन दोनों पैनलों की अध्यक्षता करेंगे। इसके साथ यह भी बताया गया कि सरकार ने कृषि के क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में आने वाले वक्त में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 50 लाख करोड़ रुपये अकेले रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे। वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार सुषमा रामचंद्रन से बात कर यह पूछा कि सरकार के ये पैनल कितने अहम हैं और सरकार को इस दिशा में क्या क्या करने की ज़रूरत है?

5 ट्रिलियन इकोनॉमी को लेकर केंद्र सरकार ने जो पैनल बनाए हैं वो बेहद ज़रूरी हैं। देश में निवेश की गति बहुत धीमी हुई है। इसकी वजह से अर्थव्यवस्था की गति भी मंद हुई है। देश की अर्थव्यवस्था पिछली तिमाही में 5 फ़ीसदी की दर से बढ़ी है। विदेशी निवेश पिछले पांच सालों के दौरान अच्छा हुआ है लेकिन बीते एक-दो सालों से थोड़ा धीमा पड़ा है। इस दिशा में सरकार को काम करना होगा ताकि बाज़ार में निवेशकों का भरोसा बढ़े। सबसे पहले तो सरकार को निवेश के माहौल को अच्छा करना होगा। इसके लिए कई चीज़ें ज़रूरी हैं। सबसे अहम है कि सरकार को अपनी आर्थिक नीति एक जैसी रखनी होगी, उसे लंबी अवधि की पॉलिसी पर ध्यान देना चाहिए। दूसरी सबसे अहम बात है टैक्स की नीति। सरकार को करदाता और निवेशकों पर अपनी नीति स्पष्ट करनी होगी। केंद्र सरकार ने बजट के दौरान फ़ॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टमेंट की आय पर आयकर सरचार्ज बढ़ाने का जो फ़ैसला लिया था उसे हाल ही के दिनों में वापस ले लिया है। घरेलू निवेशकों के लिए आयकर सरचार्ज को बढ़ाने का निर्णय भी रद्द कर दिया गया है। निवेश के लिए आसान क्रेडिट देने की ज़रूरत है। सरकार ने बैंकिंग के क्षेत्र में थोड़ा सुधार किया है। एक साथ कई बैंकों के विलय की घोषणा की है और साथ ही 55,250 करोड़ के बेलआउट पैकेज की घोषणा भी की है। उम्मीद की जा रही है कि इससे बैंकों के एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) कुछ कम होंगे और वो कम से कम नुक़सान से उबर पाएंगे।  सरकार ने रोज़गार के सृजन के लिए पैनल की घोषणा भी की है। रोज़गार की बात होगी तो 5 फ़ीसदी के दर से विकास दर की बात वापस आएगी और इस पर चर्चा होगी। क्योंकि जब ग्रोथ कम होगा तो नौकरियों के सृजन पर इसका सीधा असर पड़ेगा ही। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बहुत कम ग्रोथ हुआ है। यहां सरकार को बहुत फोकस करना होगा। सरकार को खुद भी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पैसा लगाना होगा। रियल इस्टेट और कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में नौकरियों ज़्यादा होती हैं और यहां लेबर की अधिक मांग होती है, लिहाजा यहां अधिक पैसा लगाना होगा। इस क्षेत्र में दूसरी सबसे अहम चीज़ है सड़क। जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वर्णिम चतुर्भुज (गोल्डेन क्वाड्रिलेटरल) की घोषणा की थी तब उससे देश की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार हुआ था। सरकार ने रेलवे में 50 लाख करोड़ लगाने का फ़ैसला किया है। रेलवे पर फोकस ज़रूरी है लेकिन पब्लिक सेक्टर की जगह सरकार को प्राइवेट सेक्टर में नौकरियों के सृजन पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है। नौकरियों के लिए फैक्ट्री लगाने जैसे विकल्प भी हैं और इसके लिए मैन्युफैक्टरिंग सेक्टर पर ध्यान दिया जा सकता है लेकिन दीर्घावधि की जगह अल्पावधि में रोज़गार सृजन करने वाले विकल्पों को चुनना होगा। यदि जल्दी से जल्दी नतीजे चाहिए तो कंस्ट्रक्शन, रियल स्टेट और सड़कों पर सबसे ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत हैं। रेलवे भी अहम है। लेकिन पब्लिक सेक्टर पर अनावश्यक नौकरियां सृजन करने से बचना होगा।

मोदी सरकार की 21 बड़ी उपलब्धियां और फैसलें

लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने 30 मई 2019 को शपथ ली थी। लगातार दूसरी बार सत्ता में काबिज हुई मोदी सरकार को सत्ता में आए अब 100 दिन पूरे हो चुके है। अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में मोदी सरकार ने ऐसे कई बड़े फैसले लिए है जिन्होंने इतिहास रच दिया है। मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर इस खास खबर में हम आपको मोदी सरकार के ऐसे 10 बड़े फैसले बताएंगे जिसने नया इतिहास लिख दिया है। ये निम्न हैं -


1. अनुच्छेद 370 और 35 A को खत्म करना 

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने को इतिहास में दर्ज करा लिया है। देश की आजादी के बाद जम्मू कश्मीर में 70 साल से चल रहे विशेष कानून को मोदी सरकार ने एक झटके में खत्म कर जम्मू कश्मीर में नया इतिहास लिखा दिया है। मोदी सरकार ने न केवल अनुच्छेद 370 को खत्म किया बल्कि राज्य को दो भागों में तोड़ते हुए लद्दाख को नया केंद्रशासित प्रदेश बनाकर वहां के लोगों की सालों पुरानी मांग पूरा कर दिया है। संविधान के अनुच्छेद 35 A को भी खत्म कर दिया। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करना मोदी सरकार का इस कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय है।


2. तीन तलाक से आजादी 

मुस्लिम महिलाओं को सदियों पुराने तीन तलाक कानून से आजादी दिलाने के लिए मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी कोशिश की थी लेकिन तब यह कानून राज्यसभा में नहीं पास हो पाया था। इस बार मोदी सरकार ने संसद के अपने पहले सत्र में इस कानून को पास कराकर मुस्लिम महिलाओं को एक नई आजादी दे दी है। मोदी सरकार के इस फैसले को उसके पहले 100 दिन की दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।


3. बैंकों का मर्जर

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के आर्थिक सुधारों में सबसे बड़ा फैसला बैंकों का मर्जर है। सरकार ने देश के 10 बड़े बैंको का 4 बैंकों में मर्जर कर दिया। सरकार के इस फैसले के बाद अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 18 से घटकर 12 रह गई है। मोदी सरकार के इस फैसले को बैंकिंग सेक्टर में नए और बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है।


4. पांच ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए देश के सामने 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रोडमैप भी रखा है। 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में पीएम मोदी ने भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार इस मुश्किल लक्ष्य को पूरा करेगी।


5. सुरक्षित सफर के लिए नया कानून 

देश में हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गवां देते है। मोदी 2.0 सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिन में देश में नया मोटर व्हीकल एक्ट कानून को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत लोगों को ट्रैफिक नियमों के लिए जागरुक करने के लिए बेहत सख्त जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 1 सितंबर से देश में लागू इस नए कानून को मोदी सरकार के लोगों के लिए बिना जोखिम सुरक्षित सफर के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।


6. मिशन चंद्रयान 2 

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में अंतरिक्ष में देश का अब तक के सबसे बड़ा और गौरवशाली मिशन लगभग पूरा होने वाला है। सात सिंतबर को जब मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरा होने का जश्न मना रही होगी तभी उसी समय चंद्रमा की सतह पर भारत का तिरंगा झंडा भी लहराएगा।


7. किसानों को सौगात 

मोदी सरकार ने चुनाव के समय किसानों को पेंशन,आय दोगुनी उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने का जो वादा किया था उसको सरकार ने अपने पहले 100 दिन में लगभग पूरा कर दिया है। शपथ ग्रहण के बाद मोदी सरकार की पहली कैबिनेट की बैठक में देश के सभी किसानों को पेंशन देने के लिए किसान सम्मान योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तरह देश के 15 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 6000 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके साथ ही किसानों को आय दोगुनी करने के लिए 14 सूत्रीय रोड मैप पर भी काम शुरु कर दिया गया है।


8. छोटे व्यापारियों को पेंशन

मोदी 2.0 सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट के बैठक में छोटे व्यापरियों के लिए पेंशन योजना को मंजूरी दी। इस योजना के देश के करीब 3 करोड़ खुदरा व्यापारियों को 60 साल की उम्र के बाद 3000 हजार रुपए हर महीने पेंशन मिलेगी। इस योजना की घोषणा मोदी सरकार ने अपने अंतिरम बजट में की थी।


9. पॉलिथीन मुक्त बनाने का फैसला 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में देश के पॉलिथीन मुक्त बनाने का फैसला किया। पीएम ने अपने भाषण में लोगों से प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल नहीं करने और इससे दूर रहने का आग्रह किया है। सरकार ने देश में 2 अक्टूबर गांधी जी की जयंती से सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने का फैसला किया है।


10. जल जीवन मिशन की शुरूआत 

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में देश के सभी लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन की शुरुआत की। योजना के तहत 2024 तक देश के हर घर तक पानी का साफ पानी पहुंचाने के लिए 3.5 लाख करोड़ से अधिक की राशि जल जीवन मिशन पर खर्च करने की योजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में इस योजना का एलान किया। हर घर पानी पहुंचाने के लिए हमने जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। इससे जिन घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है, उनको फायदा होगा। इसके लिए 3.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।


11. पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मात

मोदी सरकार ने अपनी मजबूत प्लानिंग के जरिए पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मात दी। कश्मीर पर भारत को अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत लगभग हर बड़े देश का साथ मिला। मोदी सरकार की घेराबंदी इतनी मजबूत थी कि चीन चाहकर भी खुलकर पाकिस्तान की मदद नहीं कर सका।


12. अत्याधुनिक हथियारों की खरीदी 

मोदी सरकार 2 ने अपने पहले 100 दिनों में अमेरिका, रूस, इसराइल समेत कई देशों से हथियार समझौते किए। भारत ने हाल ही में अमेरिका से 8 अपाचे हेलीकॉप्टर भी हासिल किए इससे वायुसेना की मारक क्षमता में वृद्धि हुई।


13. आतंकवाद का खात्मा

आतंकवाद के खिलाफ कानून को और मजबूत को बनाने के लिए एनआईए को और मजबूत किया गया। इससे संस्था को ज्यादा अधिकार मिलेंगे और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई में आसानी होगी। इतना भारत ने इस कानून के तहत माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम, हाफिम मोहम्मद सईद, मसूद अजहर और जकी उर रहमान लखवी आतंकवादी भी घोषित कर दिया।


14. मजदूरों के लिए पेंशन योजनाएं

सरकार ने घोषणापत्र में किए कई वादे जैसे किसानों, छोटे व्यापारियों और असंगठित मजदूरों के लिए पेंशन योजनाएं, सभी किसानों के लिए पीएम-किसान योजना का विस्तार और जल शक्ति मंत्रालय की स्थापना को पूरा करने के लिए कदम उठाए।


15. फसलों की एमएसपी बढ़ी

सरकार ने सौ दिन के भीतर ही 14 खरीफ फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) भी बढ़ा दिया है। इनमें उड़द दाल, धान, कपास, अरहर दाल, तिल, सूरजमुखी और सोयाबीन शामिल हैं।


16. एफपीआई से सरचार्ज वापस

पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) पर से विवादास्पद कर अधिभार को वापस लेने की घोषणा की। बजट में उनपर सरचार्ज बढ़ा दिया गया था। इसके अलावा एलटीसीजीऔर एसटीसीजी पर लगे बढ़ाए गए अधिभार को वापस लेने की घोषणा हुई।


17. अर्थव्यवस्था के लिए अहम फैसले

सरकार ने 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए है. मोदी सरकार के अनुसार, देश को साल 2024 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने राज्यों को अपनी प्रमुख क्षमता को पहचानने की सलाह दी है और कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़ाने की पहल जिला स्तर से शुरू की जानी चाहिए।


18. फिट इंडिया अभियान की शुरूआत

प्रधानमंत्री मोदी ने खेल दिवस के अवसर पर फिट इंडिया अभियान की शुरूआत की। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, जिला, ब्लॉक स्तर पर इस अभियान को मिशन की तरह चलाया जाएगा। फिट इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास जैसे मंत्रालय आपसी सूझबूझ से काम करेंगे और इसकी रूपरेखा भी तैयार करेंगे।


19. सभी वर्गों को मिला सुरक्षा कवच

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, 'तेजी से देशहित के निर्णय, तैयारी से जबर्दस्त निर्णय, तरक्की के बहुत महत्वपूर्ण निर्णय, सामाजिक न्याय के निर्णय, गरीब, मजदूर, किसान, दलित आदिवासी को सक्षम बनाने के निर्णय, इन्हीं सारे वर्गों को सुरक्षा कवच देने वाले निर्णय, सारी सरकारी प्रशासन में पारदर्शिता लाने वाले निर्णय, जनभागीदारी के निर्णय और विश्व में साख बढ़ाने वाले निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में हुए।'


20. रोजाना 80 हजार गैस कनेक्श दिए

देहात के हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य छह महीने में पूरा हो जाएगा। उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए और मोदी सरकार में 6 करोड़ लोगों ने अपने पैसे से कनेक्शन लिए। ऐसे में पिछले पांच वर्षों में गैस कनेक्शन का कुल आंकड़ा 14 करोड़ रहा है। बाकी घरों में भी गैस कनेक्शन पहुंचाने पर काम चल रहा है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों में 80 लाख गैस कनेक्शन दिए गए। मतलब हर दिन 80-80 हजार गैस कनेक्शन दिए गए हैं।


21. आयुष्मान भारत बड़ी सफलता

आयुष्मान भारत के तहत 41 लाख मरीज अस्पताल में मुफ्त इलाज करवा चुके हैं। यह आयुष्मान भारत की बड़ी सफलता है। दिल्ली जैसे कुछ राज्यों ने इसे स्वीकार नहीं किया है। अब ऐसे राज्यों की जनता ही सरकारों को योजना लाने को बाध्य करेगी। इसके तहत 16 हजार हॉस्पिटल योजना में शामिल हैं, 10 करोड़ ई-कार्ड्स जारी हुए हैं। 20 हजार से ज्यादा वेलनेस सेंटर भी तैयार हुए। इन सेंटरों में हर व्यक्ति का हर साल बेसिक मेडिकल टेस्ट होगा और बीमारियों से बचने के उपाय भी बताए जाएंगे।


मोदी सरकार के समक्ष 10 बड़ी चुनौतियां 

केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार को दूसरी बार सत्ता में आए हुए 100 दिन पूरे हो चुके हैं। ऐसे में मोदी सरकार के कामकाज की समीक्षा होने लगी है। मोदी सरकार ने अपने पहले 100 दिन में ऐसे कई बड़े फैसले लिए हैं जिनसे वह पिछली बार की अपनी सरकार से 100 कदम आगे खड़ी दिखाई दे रही है, लेकिन इस दौरान सरकार के सामने कुछ ऐसी चुनौती आकर खड़ी हो गई है जिससे वह 10 कदम पीछे भी हटती हुई दिखाई दे रही है।


1. आर्थिक मंदी की आहट 

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक मोर्च पर मिल रही है। सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में देश आर्थिक मंदी के संकट से जूझ रहा है। देश की जीडीपी का 5 फीसदी तक पहुंच जाना सरकार के अगले 5 साल के लिए एक खतरे की घंटी है। मंदी का असर देश के शेयर मार्केट और सोने की कीमतों पर भी दिख रहा है, जहां बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। आर्थिक मंदी की आहट से देश में इस वक्त एक डर का माहौल है जिसके चलते मोदी सरकार पर विपक्ष के साथ ही अब लोग भी सवाल उठाने लगे हैं। आर्थिक मामलों के जानकार इसके लिए मोदी सरकार के पहले के कार्यकाल की नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों को जिम्मेदार बता रहे है। ऐसे में आज मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना है जिसके लिए सरकार अब कुछ कदम पीछे हटते हुए दिखाई दे रही है।


2. बेरोजगारी और नौकरियों पर संकट

आर्थिक मंदी की आहट के चलते इस वक्त मोदी सरकार के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती देश में बढ़ती बेरोजगारी और दूसरा पहले से रोजगार पाए लोगों पर आए नौकरी का संकट है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वृद्धि दर पिछले साल के मुकालबे 12 फीसदी से घटकर मात्र 0.6 फीसदी रह जाने से इस क्षेत्र में अब लाखों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल समेत सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट के चलते बड़ी संख्या में नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया है जिससे लोगों में भय का माहौल बैठ गया है। ऐसे में मोदी सरकार लोगों के मन से इस भय को खत्म करने के लिए अपने कुछ फैसलों का रिव्यू कर कुछ राहत की घोषणा करने की तैयारी में है इसमें जीएसटी की दरों का संशोधन और कुछ विशेष पैकेज देना शामिल हो सकते हैं।


3. कश्मीर और कश्मीरियों का विश्वास जीतना

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाना मोदी सरकार के पहले 100 दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर गिना जा रहा है लेकिन दूसरी ओर उसी कश्मीर को दोबारा पटरी पर लाना और वहां के लोगों का विश्वास जीतना मोदी सरकार के सामने अब भी एक चुनौती बना हुआ है। सूबे से 370 हटाने के फैसले को अब जब एक महीने से भी अधिक का समय हो गया है तब भी वहां के हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैंं। पूरे कश्मीर में अब भी एक अज्ञात डर और भय का महौल है, एक महीने से अधिक समय से कश्मीर में इंटरनेट और टेलीफोन सेवा अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। अब भी लोग अपने घरों से निकलने में डर रहे है ऐसे हालात में मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि वह ऐसे फैसले करे जिससे कि कश्मीर और कश्मीरियों का विश्वास फिर से पूरी तरह लौट सके।


4. पाकिस्तान से संबंध सुधारना

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान से संबंध बिगड़ गए हैं। पाकिस्तान आए दिन युद्ध और परमाणु युद्ध की धमकी दे रहा है। पड़ोसी देश की धमकी को भले ही गीदड़भभकी समझा जाए लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट कहते हैं कि कंगाल पाकिस्तान जो अब बर्बादी के दरवाजे पर पहुंच गया है अपने को बचाने के लिए कोई भी आत्मघाती कदम भी उठा सकता है। ऐसे में मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान से संबंध सुधारना है क्यों‍‍कि अगर युद्ध जैसी कोई नौबत आई तो उसका खामियाजा पाकिस्तान के साथ ही देश की जनता को भी भुगतना पड़ेगा।


5. असहिष्णुता और मॉब लिचिंग

देश में आए दिन होने वाली मॉब लिंचिंग की घटना को रोकना भी मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। पीएम मोदी जब खुद भी मॉब लिंचिंग को गलत ठहरा चुके है तभी मोदी सरकार के इस कार्यकाल के पहले 100 दिन में देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं की एक तरह से बाढ़ आना देश में बढ़ती असहिष्णुता की भावना को दिखाता है। अगर समाज में असहिष्णुता की भावना इसी तरह आगे बढ़ती रही तो वह देश के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है।


6. विपक्ष का विश्वास जीतना 

लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भले ही भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर देश की जनता का विश्वास जीत लिया हो लेकिन एक स्वस्थ लोकंतत्र के लिए जरूरी है कि सरकार लोगों के साथ विपक्ष का भी विश्वास जीते। केंद्र सरकार के इस कार्यकाल में अब तक उसकी विपक्ष से दूरी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आज मोदी सरकार और विपक्ष के बीच एक ऐसी खाई बनती दिख रही है जिसे एक स्वस्थ लोकंतत्र के लिए किसी भी तरीके से उचित नहीं कहा जा सकता।


7. सबका साथ - सबका विकास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के अपने पहले 2 भाषणों में कह चुके हैं कि सबका साथ और सबका विकास उनकी सरकार का पहला लक्ष्य है। पीएम ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि जिन्होंने उनको वोट नहीं दिया है वह भी उनके अपने हैं और सरकार का लक्ष्य बिना किसी भेदभाव के साथ सभी को एकसाथ लेकर आगे बढ़ने का है।


8. एनआरसी विवाद को सुलझाना

असम में एनआरसी के चलते आज 19 लाख लोगों के सामने अपनी नागरिकता को लेकर संकट खड़ा हो गया है। एनआरसी विवाद को हल करना भी मोदी सरकार के सामने एक बड़ा चैलेंज है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जिस तरह एनआरसी का मुद्दा गर्माया था, उससे देश के सीमावर्ती राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर भी मुश्किल खड़ी हुई थी।


9. खेती को लाभ का धंधा बनाना

आजादी के 70 सालों के बाद भी सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी अब भी किसानों की हालत में कोई परिर्वतन नहीं आया है। आज भी किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और किसान आज भी कर्ज के जाल में फंसकर मौत को गले लगा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में किसानों के लिए कई घोषणाएं की हैं लेकिन अब भी खेती लाभ का धंधा कैसे बने, इसको लेकर सरकार की जमीनी स्तर पर अभी भी ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।


10. जनता से किए वादों पर खरा उतरना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके दूसरे कार्यकाल के लिए देश की जनता ने जिस तरह प्रचंड बहुमत दिया था उसके बाद मोदी सरकार से लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता से किए अपने वादों को पूरा करना है।


आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार ने क्या खोया क्या पाया 

बीते 100 दिनों के भीतर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें से उसे कुछ में सफलता हाथ लगी है तो कुछ का रिपोर्ट कार्ड उतना बेहतर नहीं आया जितनी उम्मीद की जा रही थी। सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए भी कई बड़े फैसले लिए हैं जिनका असर बाद में पता चलेगा। सरकार की ओर से 100 दिनों की उपलब्धी पर रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाएगा। हालांकि, एक तरफ जहां बीजेपी, सरकार के कई फैसलों को उपलिब्‍धयां बता रही है, वहीं कई विपक्षी पार्टियां इन पर सवाल भी उठा रही हैं। बहरहाल, सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए इस बीच क्या क्या फैसले लिए हैं उसपर डालते हैं एक नजर। हाल ही में मोदी सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर 4 बड़े बैंक बनाने का एलान किया है। इसके बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जाएगी। इसके अलावा लोन को रेपो दर से जोड़कर लोगों को सस्ते कर्ज का रास्ता भी खोल दिया गया है। जिन बैंकों का विलय हुआ है उनमें ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया गया। सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में मिलाया गया। आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जोड़ने का एलान किया गया है।

सरकार ने घोषणापत्र में किए कई वादे जैसे किसानों, छोटे व्यापारियों और असंगठित मजदूरों के लिए पेंशन योजनाएं, सभी किसानों के लिए पीएम-किसान योजना का विस्तार और जल शक्ति मंत्रालय की स्थापना को पूरा करने के लिए कदम उठाए। किसानों को साहूकारों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर बड़ा फैसला लिया, ताकि किसान किसी व्यक्ति की बजाय बैंकों से सबसे सस्ती दर पर पैसा लेकर खेती-किसानी को आगे बढ़ा सकें। सरकार ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि आवेदन के 15वें दिन तक यानी दो सप्ताह के अंदर ही केसीसी बन जाए। किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए बैंकों को निर्देश है कि वह गांव-गांव में कैंप लगाएं। किसानों को हितो की रक्षा करते हुए सरकार ने सौ दिन के भीतर ही 14 खरीफ फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) भी बढ़ा दिया है। इनमें उड़द दाल, धान, कपास, अरहर दाल, तिल, सूरजमुखी और सोयाबीन शामिल हैं। पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) पर से विवादास्पद कर अधिभार को वापस लेने की घोषणा की। बजट में उनपर सरचार्ज बढ़ा दिया गया था। इसके अलावा एलटीसीजीऔर एसटीसीजी पर लगे बढ़ाए गए अधिभार को वापस लेने की घोषणा हुई। वित्त मंत्री ने बाजार में 5 खरब रुपये की नकदी जारी करने के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करने की घोषणा की। वित्त मंत्री के निर्देशों के मुताबिक, अब बैंकों को उपभोक्ताओं को रेपो रेट घटाने पर उसका फायदा देना होगा। सरकार ने ऑटो सेक्टर एवं एनबीएफसी सेक्टर को मजबूती देने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वादा किया है कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदार को राहत देने की दिशा में प्रयास करेगी।


एक नजर में जानें मोदी सरकार 2.0 की पहली बात


  • पहला विदेश दौरा

मोदी पड़ोसी देशों को तरजीह देने का संदेश देने के इरादे से सात जून को बतौर प्रधानमंत्री अपने दूसरे कार्यकाल में पहले विदेश दौरे पर मालदीव पहुंचे। आठ जून को ईस्टर हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दर्शाने के लिए श्रीलंका गए। हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।


  • पहला कैबिनेट फैसला

31 मई को हुई पहली कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय रक्षा निधि के तहत चल रही प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना में बदलाव की घोषणा। आतंकी-नक्सली हमले में शहीद जवानों के बेटों के लिए छात्रवृत्ति की राशि दो से बढ़ाकर ढाई हजार रुपये प्रति माह की। बेटियों के लिए यह रकम तीन हजार रुपये हुई।


  • पहली कूटनीतिक जीत

जून में एससीओ सम्मेलन में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को नजरअंदाज कर दर्शाया कि आतंक पर ठोस कार्रवाई के बिना वार्ता संभव नहीं। अगस्त में जी-7 सम्मेलन में कश्मीर मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछालने की पाक की कोशिश नाकाम की। कश्मीर को आंतरिक मामला बता साफ किया तीसरे पक्ष के दखल की गुंजाइश नहीं।


  • पहला बड़ा सम्मान

24 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात ने मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से नवाजा। 25 अगस्त को मोदी बहरीन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से सम्मानित किए गए। जानकारों ने इसे मुस्लिम देशों के समर्थन के तौर पर भी देखा। 


पॉस्को एक्ट पास होना बड़ी उपलब्धि

बच्चों के साथ बढ़ती हिंसा की खबरों को देखते हुए राजग सरकार पॉक्सो एक्ट में संसोधन विधेयक लेकर आयी। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृित ईरानी ने बीते 18 जुलाई को इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया। विपक्षी नेताओं ने कहा कि प्राकृतिक आपदा और सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बच्चों के साथ होने वाली हिंसा को भी इसमें शामिल किया जाए। सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया और सभी ने पार्टी लाइन और राजनीति से ऊपर उठकर इसके पक्ष में मतदान किया। 24 जुलाई को पॉक्सो एक्ट संसोधन बिल-2019 राज्यसभा से पास हो गया। जब ये राज्यसभा से पास हो गया तो लोकसभा में सत्तारूढ़ दल की संख्याबल के आधार पर इसे आसानी से पास हो जाना था। हुआ भी ऐसा हीय़ बीते 29 जुलाई को उपरोक्त विधेयक लोकसभा से भी पास हो गया। इसके साथ ही इस संबंध में कड़ा कानून बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया।


पॉक्सो एक्ट संसोधन विधेयक में ये प्रावधान हैं -

बलात्कार का दोषी पाए जाने पर संबंधित शख्स को 7 की बजाय 10 साल का कठिन कारावास भुगतना होगा। यदि पीड़ित की उम्र 16 साल से कम है (चाहे वो लड़का हो या लड़की) तो दोषी को न्यूनतम 20 साल या फिर अधिक की कठिन कारावास की सजा होगी। बलात्कार के दौरान यदि बच्चे की मौत हो जाती है, प्राकृतिक आपदा के दौरान दुष्कर्म होता है या फिर किसी सांप्रदायिक हिंसा के दौरान किसी बच्चे के साथ दुष्कर्म होता है तो दोषी को न्यूनतम 20 साल की सजा होगी। मामले की गंभीरता अथवा घटना की प्रकृति के आधार पर दोषी को फांसी की सजा दी जा सकती है।  किसी नाबालिग बच्ची या बच्चे से सामूहिक दुष्कर्म की वारदात होने पर दोषियों के लिए इस विधेयक में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। फांसी की सजा तभी दी जाएगी जब आरोपी की उम्र 16 साल से अधिक हो। नए विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक यदि बच्चों के शरीर में हार्मोन या कैमिकल इंजेक्ट करके उसे यौनिक रूप से परिपक्व बनाने की कोशिश को भी यौन अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इस अपराध के लिए दोषी को न्यूनमत पांच साल वहीं अधिकतम सात साल के कारावास का प्रावधान है। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी की परिभाषा में बदलाव किया गया है। पहले केवल बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो को ही इसके दायरे में रखा गया था लेकिन अब तस्वीर, एनिमेटेड वीडियो और कार्टून्स को भी चाइल्ड पोर्नोग्राफी के दायरे में रखा गया है। अगर कोई बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखता हुआ पकड़ा गया तो पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 हजार रुपये वहीं दूसरी बार अपराध साबित होने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। चाइल्ड पोर्नोग्राफी को प्रचारित, प्रसारित करने अथवा उसे बेचने के जुर्म में पहले तीन साल जेल की सजा का प्रावधान था पर अब इसे बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है। मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि निर्भया फंड से 123 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। उम्मीद जाहिर की जा रही है कि कोर्ट 2021 तक बन कर तैयार हो जाएंगे। इन अदालतों में मामले की सुनवाई महज 6 महीने के अंदर की जाएगी। सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है जिसमें बच्चों को सुनवाई के दौरान प्रताड़ना का अनुभव ना हो। उनसे कठिन सवाल ना पूछे जाएं और ना ही उनको पूछताछ के लिए बार-बार ना बुलाया जाए। ऐसे व्यक्ति को भी 6 महीने की जेल हो सकती है जिसने यौन अपराध की जानकारी होने के बाद भी पुलिस को इसकी सूचना ना दी हो।


मोदी सरकार 2.0 ने दी देश को 75 नए मेडिकल कॉलेजों की सौगात

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के असेवित एवं आकांक्षी जिलों में 75 नये मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मोदी सरकार 2.0 ने अपने 100 दिन के कार्यकाल के अंदर मंजूरी दे दी। इस पर 24 हजार करोड़ रूपये से अधिक राशि का निवेश होगा।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक के बारे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि कैबिनेट ने 75 नये मेडिकल कालेज खोलने का निर्णय किया। इससे एमबीबीएस की 15,700 नयी सीट सृजित होंगी। उन्होंने बताया कि ये सभी मेडिकल कालेज वैसे स्थानों पर खोले जायेंगे जहां पहले से कोई चिकित्सा कालेज नहीं है और असेवित एवं आकांक्षी जिले हैं जो विकास में पिछड़ गए हैं। इस प्रस्ताव पर अमल में 24,375 करोड़ रूपये की लागत आयेगी और इन कालेजों की स्थापना 2021-22 तक की जानी है। जावड़ेकर ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में पीजी और एमबीबीएस की 45 हजार सीटें जोड़ी गई हैं और इस अवधि में 82 मेडिकल कालेजों को मंजूरी दी गई थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि इससे लाखों की संख्या में गरीबों एवं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लाभ होगा और देहातों एवं ग्रामीण इलाकों में डाक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। जावड़ेकर ने जोर दिया कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया के किसी देश में यह बड़ा विस्तार है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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