जेटली छात्र राजनीति का वह पौधा थे जो बाद में भारतीय राजनीति का वटवृक्ष बन गया : प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली, (परविर्तन)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली को याद करते हुए कहा कि मोदी ने कहा कि अरुण जेटली छात्र राजनीति का एक पौधा थे जो बाद में भारतीय राजनीति का वटवृक्ष बन गया। वह एक सर्वप्रिय और सर्वसुलभ नेता थे।

समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों विशेषकर मीडिया से उनका निकट का नाता था। मीडिया के लिए वह बहुत उपयोगी सूचना स्त्रोत साबित होते थे। एक पत्रकार को किसी मुद्दे पर जानकारी हासिल करने के लिए घंटों का समय लगाना हो, उसे जेटली कुछ ही मिनटों में आसान शब्दों में स्पष्ट कर देते थे। प्रतिभा को एक निश्चित दिशा में ढाल करके उन्होंने हर काम में एक नई ऊर्जा और एक नई सोच दी। उन्होंने कहा कि कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी दिन आएगा कि मुझे मेरे दोस्त को श्रद्धांजलि देने के लिए आना पड़ेगा। यहां जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में अरुण जेटली की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस समेत तमाम दलों के नेता उपस्थित रहे। सभी ने जेटली की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि जेटली साधन संपन्न व्यक्ति थे, लेकिन वह पार्टी के आयोजनों में मुहैया कराई गई सुविधाओं का ही उपयोग करते थे। विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी बैठकों के दौरान वह और जेटली एक ही कमरे में रुकते थे । जेटली अपने बलबूते किसी फाइव स्टार होटल में सुख सुविधा के साथ रह सकते थे लेकिन पार्टी की संस्कृति के अनुरुप वह केवल मुहैया कराई गई सुविधा का ही उपयोग करते थे। अपने सहयोगी की कानूनी प्रतिभा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई मुवक्किल जेटली के पास जाता था तो वह उसकी बात सुनते समय टेलीविजन देखने या अन्य काम में मशगूल रहते थे। मुवक्किल को जिज्ञासा होती थी कि कोर्ट में मेरा वकील बहस कैसे करेगा। लेकिन जब कोर्ट में सुनवाई होती थी तो जेटली इतने प्रभावशाली ढ़ंग से कानूनी तर्क पेश करते थे कि मुवक्किल दंग रह जाता था । जेटली अपने मुवक्किल के केस जीत लेते थे। मोदी ने कहा कि लंबे समय तक अनेक बिमारियों से जूझने वाले जेटली मिलने वाले किसी व्यक्ति से अपने या बिमारी के बारे में बात नही करते थे । उन्हें यह जानने की सतत उत्सुकता रहती थी कि देश में क्या हो रहा है, आगे कैसे काम किया जाना चाहिए । जेटली की अंत्येष्टि में शामिल न होने का दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि इतने लंबे कालखंड तक अभिन्न मित्रता  रही और फिर भी वह अपने मित्र का अंतिम दर्शन नहीं कर पाए ,उनके मन पर यह बोझ सदा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि  जेटलीवे सर्वमित्र थे, वे सर्वप्रिय थे और वे अपनी प्रतिभा, पुरुषार्थ के कारण जिसको जहां भी उपयोगी हो सकते थे, वे हमेशा उपयोगी होते थे ।रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जो भी अरुण जी से मिलता था, स्वाभाविक रूप से उनका कायल हो जाता था। उनसे पहली मुलाकात में ही मैं उनकी योग्यता और कार्यक्षमता का कायल हो गया था । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व वित्तमंत्री को याद करते हुए कहा कि जेटली के असमय चले जाने से देश, देश की संसद, भाजपा, उनके परिवार और मेरी निजी क्षति हुई है। ये जो रिक्तता उनके जाने से सार्वजनिक जीवन में बन गई हो, वो लंबे समय तक नहीं भर पाएगी। शाह  ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पार्टी लाइन को क्रॉस करते हुए ढेर सारे लोगों से मित्रता के संबंध बनाना  जेटली की विशेषता थी। अपने से आयु में बड़े, हमउम्र और अपने से छोटे सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को अपना मित्र बनाने की कला अरुण जी के पास थी। शाह ने जेटली से अपने रिश्तों को लेकर कहा कि वो हमेशा एक बड़े भाई की तरह खड़े रहे, चट्टान के जैसे मेरे साथ खड़े रहे। चाहे पार्टी के अंदर बात करनी हो, चाहे कानूनी लड़ाई लड़नी हो।

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