संतों ने सुप्रीम कोर्ट और मोदी सरकार का जताया आभार

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नई दिल्ली, (परिवर्तन)। अखिल भारतीय संत समिति के आह्वान पर देशभर से यहां पहुंचे संतों ने शनिवार को न्याय विमर्श में हिस्सा लेकर श्रीराम जन्मभूमि के मुद्दे पर अपने विचार रखे। संत समिति ने दो प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35-ए को समाप्त करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि मामले की नियमित सुनवाई के फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार प्रकट किया।

संतों ने श्रीराम जन्मभूमि, सबरीमाला, राम सेतु, मठ मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप, धर्मांतरण रोकने के लिए कानून, जम्मू-कश्मीर में 90 के दशक में तोड़े गये 435 मंदिरों के पुनर्निर्माण और गंगा संरक्षण कानून सहित कई प्रमुख बिन्दुओं पर अपने विचार रखे। इस दौरान संतों ने मठ-मंदिरों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित ऐसे मठ-मंदिरों को गोद लेने का आह्वान किया। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अविचल दास महाराज ने कहा कि न्याय विमर्श में श्रीराम जन्मभूमि को लेकर संतों को चिंतन करना था लेकिन नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में सरकार ने कुछ ही क्षणों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए को समाप्त कर एक अच्छा संदेश दिया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि मामले के महत्व को समझा और उसकी नियमित सुनवाई का फैसला सुनाया। ऐसे में अब संत समाज आश्वस्त है कि जल्द ही राम मंदिर का मामले पर फैसला आ जाएगा और इसका निर्माण कार्य भी जल्द शुरू हो जाएगा। श्रीराम मंदिर के पक्ष में बन रहे माहौल के बीच श्रेय लेने की होड़ में शामिल होने वालों को चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का कार्य श्रीराम जन्मभूमि न्यास के तत्वावधान में ही होगा। भगवान के भव्य मंदिर का जो चित्र लाखों घरों में पहुंचाया गया है उसी के अनुसार मंदिर का नक्शा होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उसमें कोई अंतर नहीं आने वाला है। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने सुप्रीम कोर्ट को हृदय से साधुवाद देते हुए कहा कि लंबे समय से श्रीराम जन्मभूमि के वाद में किसी न किसी कारण टल रही सुनवाई को प्रतिदिन पूरे समय सुनने का निर्णय लेकर प्रधान न्यायाधीश ने बहुत ही साहसिक एवं पवित्र कदम उठाया है। उन्होंने सप्ताह में तीन दिन के बजाय पांच दिन सुनवाई के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का साधुवाद दिया। बैठक में संतों ने श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला आने पर विरोधियों के देश का माहौल बिगाड़ने के प्रयासों की भी संभावना जताई। दिल्ली संत महामंडल के महामंत्री महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास ने कहा कि राष्ट्रद्रोही लोगों ने कभी माना ही नहीं कि अयोध्या में राम मंदिर था लेकिन खुदाई में मस्जिद के कोई प्रमाण नहीं मिले। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला तो हिन्दुओं के पक्ष में ही आना है लेकिन ऐसे में राष्ट्रद्रोही देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास करेंगे। ऐसे में संत समाज को अभी से अपने-अपने क्षेत्रों में गोष्ठी और प्रवचनों के माध्यम से समाज को जातिवाद और छुआछूत सहित तमाम सामाजिक भेद भुलाकर एकजुट करने के कार्य में जुट जाना चाहिए। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और राज्यसभा सदस्य  सुब्रमण्यम स्वामी ने भी संत समेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा अयोध्या की जीत काफी नहीं है बल्कि मथुरा और काशी विश्वनाथ को भी पुन: स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि के राष्ट्रीकरण का सुझाव देते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट को सूचित कर सकती है कि विवादित भूमि पर फैसला आने के बाद इस भूमि का राष्ट्रीयकरण कर देंगे।

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