तीन तलाक बिधेयक

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'महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता' का बिल पारित बेंगलूरु, (परिवर्तन)। पिछले दिनों राज्यसभा में तीन तलाक के मुद्दे पर वोटिंग हुई। अमूमन राज्यसभा में वोटिंग बटन दबाकर की जाती है, लेकिन इस समय वोटिंग के लिए पर्ची का सहारा लिया गया। यह इस वजह से किया गया क्योंकि राज्यसभा के कुछ सदस्यों को फिलहाल सीट अलॉट नहीं हुई है और सदन के नियमों से मुताबिक सदस्यों को अलॉट की गई सीट से ही वोटिंग करना होती है। इसलिए इस समय पर्ची का सहारा लिया गया।

वोटिंग से यह साफ हो गया कि तीन तलाक बिल सेलेक्ट कमेटी को नहीं भेजा जाएगा। बिल सेलेक्ट कमेटी को नहीं भेजने के समर्थन 100 और विरोध में 84 वोट डले। इस दौरान सत्तापक्ष विपक्ष में सेंध लगाने में कामयाब रहा। बीएससी और टीआरएस वोटिंग से गायब रहे। जेडीयू और एआईएडीएमके ने वोटिंग का बहिष्कार किया। इस तरह से बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव गिर गया। इससे पहले गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार ने विपक्ष मांग को नामंजूर कर दिया है इसलिए विपक्ष ने इस बिल के खिलाफ वोट किया है।

मालूम हो कि ये विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा में आसानी से ध्वनिमत से पारित हो गया था मगर राज्यसभा में इसे पारित करवाना सरकार के लिए एक परीक्षा मानी जा रही थी। लेकिन टीआरएस, जेडीयू और एआईएडीएमके के वॉकआउट करने की वजह से सरकार मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 को आसानी से पारित करवाने में कामयाब रही। राज्यसभा में अभी 241 सदस्य हैं मगर जेडीयू और एआईएडीएमके के वॉकआउट की वजह से उपस्थित सदस्यों की संख्या घटकर 213 रह गई। ऐसे में बिल पारित करवाने के लिए 107 सदस्यों की ज़रुरत होती और राज्यसभा में एनडीए के सदस्यों की संख्या 107 ही है जिससे बिल का पारित होना तय माना जा रहा था। दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा जिसके बाद ये क़ानून बन जाएगा। बीते मंगलवार को तीन तलाक़ विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया। बहस के लिए चार घंटे का समय निर्धारित किया गया था और उसके बाद वोटिंग होनी थी। विधेयक के पक्ष में बहस करते हुए क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इस क़ानून को महिलाओं की गरिमा के लिए ज़रूरी बताया। उन्होंने बिल को पेश करते हुए इसे 'महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता' सुनिश्चित करने वाला बताया। विधेयक पर चर्चा के दौरान एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा कि इसमें पति को तीन साल की सज़ा का प्रावधान हटाया जाए। उन्होंने इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग की। इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने पर हुई वोटिंग में पक्ष में 84 जबकि विरोध में 100 वोट पड़े। टीआरएस और जेडीयू ने भी वोटिंग के दौरान ग़ैरहाज़िर रहने का फैसला किया था। जबकि बीजेडी ने इस बिल का समर्थन करने का मन बनाया था। लेकिन एआईएडीएमके के राज्य सभा में नेता नवनीतकृष्णन ने समाचार एजेंसी एएनएई को बताया कि उनकी पार्टी इस विधेयक के विरोध में है इसलिए वोटिंग के समय वो वॉक आउट कर जाएंगे। बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "ये बिल शादी में अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए लाया जा रहा है लेकिन इसका असल मक़सद परिवारों का विनाश है।" उन्होंने कहा कि 'ये क़ानून राजनीति से प्रेरित है ताकि अल्पसंख्यक आपस में भी उलझ जाएं। पति और पत्नी एक दूसरे के ख़िलाफ़ वकील करें और उनकी फ़ीस देने के लिए ज़मीनें बिक जाएंगे। जबतक जेल की सज़ा पूरी होगी, वे कंगाल हो चुके होंगे। जब वे जेल से बाहर आएंगे वो या तो आत्महत्या कर लेंगे या डाकू और चोर बन जाएंगे। आपके बिल की यही मंशा है।'


क्या-क्या हैं तीन तलाक बिल में प्रावधान

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी अन्य विधि से तीन तलाक देता है तो उसकी ऐसी कोई भी 'उदघोषणा शून्य और अवैध होगी। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि तीन तलाक से पीड़ित महिला अपने पति से स्वयं और अपनी आश्रित संतानों के लिए निर्वाह भत्ता प्राप्त पाने की हकदार होगी। पीड़ित महिला को निर्वाह भत्ते के रूप में कितने पैसे दिए जाने चाहिए, इस रकम को मजिस्ट्रेट निर्धारित करेगा। त्वरित तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को रद्द करना और गैर कानूनी बनाना। इंस्टैंट तीन तलाक को संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान। इसका मतलब यह हुआ कि पुलिस बिना वारंट के तीन तलाक देने वाले शख्स को गिरफ़्तार कर सकती है। तीन तलाक बिल के मुताबिक, इसमें तीन तलाक देने वाले शख्स के लिए तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। तीन तलाक देने वाले आरोपी को जमानत के लिए मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाना होगा। यानी मजिस्ट्रेट ही उसे जमानत दे सकता है। हालांकि, इसके लिए दोनों पक्ष की दलील सुनना अनिवार्य है। अगर तीन तलाक देने वाला समझौता करना चाहता है, तो पहले इसके लिए पीड़िता की रजामंदी की जरूरत होगी। यानी पीड़ित मुस्लिम महिला के अनुरोध पर ही मजिस्ट्रेट समझौते की मंजूरी दे सकता है। 


बिल पर 2018 में चली बहस

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर माह में तीन तलाक़ बिल को राज्य सभा में पेश नहीं हो सका। विपक्ष ने बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने की मांग संसद के उच्च सदन में भी जारी रखी। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018 लोकसभा में पारित हो गया था। जिसके बाद बीजेपी सरकार अब इसे राज्य सभा से पास कराकर क़ानून की शक्ल देना चाहती थी। लोकसभा में जब इस बिल पर वोटिंग हुई थी तो कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। बिल के राज्यसभा में पहुंचने के बाद भी विपक्ष ने अपनी मांग जारी रखी। उस वक्त राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि हम इस बिल का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन बिल से करोड़ों लोगों की ज़िंदगी पर असर पड़ेगा, इसलिए इसे पहले सेलेक्ट कमिटी के पास भेजा जाना चाहिए। गुलाम नबी आज़ाद ने बीजेपी सरकार पर संसद की परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा था, "सालों से हर बिल को पहले स्टैंडिंग कमेटी और फिर सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाता है। उसके बाद बहुमत के आधार पर बिल संसद से पारित होता है। लेकिन बीजेपी सरकार अहम बिलों को सीधे-सीधे पास करा रही है। ये ग़लत है।" पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्राईन ने 15 विपक्षी दलों की ओर से बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा और कहा कि एक तिहाई विपक्ष तीन तलाक़ बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना चाहता है।

उस समय कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने बीजेपी पर बिल को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि विधायी जांच के बिना कोई क़ानून नहीं बन सकता। वहीं केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि सरकार बिल पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था, "ये इंसानियत और मानवता का मामला है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद तीन तलाक़ हो रहे हैं। विपक्ष का कोई सुक्षाव हो तो हम सुनने को तैयार हैं, लेकिन ये बिल को लटकाएं नहीं।" उस समय हंगामा बढ़ता देख उपसभापति ने राज्य सभा की कार्यवाही दो जनवरी 2019 सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। 

लेकिन कांग्रेस अड़ी रही - इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने कहा था, "मुख्य वजह ये है कि मुस्लिम समुदाय इस बिल से ख़ुश नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक़ को अवैध क़रार दे दिया था. लेकिन फिर सरकार ने बिल लाकर तीन तलाक़ को अपराधिक बना दिया और तीन साल की सज़ा का प्रावधान कर दिया।" नीरजा आगे कहती हैं, "हालांकि बाद में बीजेपी सरकार ने इसमें कुछ संशोधन किए। लेकिन संशोधनों के बाद भी मुस्लिम समुदाय इस बिल से ख़ुश नहीं है, क्योंकि एक तो इसे आपराधिक कर दिया था। दरअसल बीजेपी का रवैया अल्पसंख्यक विरोधी माना जा रहा है। इसलिए अल्पसंख्यक वोटर जिन पार्टियों का आधार हैं, उनको लगा रहा है कि इस वक़्त ये चीज़ नहीं होनी चाहिए, इसलिए वो विरोध कर रहे हैं।"

बिल का भविष्य क्या होगा - इस सवाल के जवाब में नीरजा चौधरी कहती हैं, "किसी भी पार्टी को इस बिल के भविष्य की चिंता नहीं है। बीजेपी ये चाहती है कि विपक्षी पार्टियां अल्पसंख्यकों के साथ खड़ी दिखें, ताकि उनको एंटी हिंदू क़रार दे दिया जाए। दरअसल बीजेपी इस तीन तलाक़ बिल के ज़रिए अपनी आज़माई हुई ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।" नीरजा कहती हैं कि इस बिल को आपराधिक नहीं बनाया जाना चाहिए, ये एक सिविल अपराध है। "और जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ को अवैध क़रार दे दिया था तो इस बिल की क्या ज़रूरत है।"


सुप्रीम कोर्ट का बैन 

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ को अवैध क़रार दे दिया था। इसके बाद सरकार मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक लेकर आई थी। ये विधेयक लोकसभा में तो पारित हो गया लेकिन राज्यसभा में अटक गया था। विपक्ष ने तीन तलाक़ पर कुछ संशोधनों की मांग की थी। संशोधन करने के बाद सरकार इसपर अध्यादेश ले आई है, जिसे क़ानून की शक्ल देने के लिए इस सत्र में बिल को संसद से पास कराया गया।


किस दल के नेता ने क्या कहा ?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, "तीन तलाक बिल का पास होना महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। तुष्टीकरण के नाम पर देश की करोड़ों माताओं-बहनों को उनके अधिकार से वंचित रखने का पाप किया गया। मुझे इस बात का गर्व है कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक देने का गौरव हमारी सरकार को प्राप्त हुआ है।" मोदी ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया, "सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है। इस ऐतिहासिक मौके पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं।"

  • क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, "ये एक ऐतिहासिक दिन है जब राज्यसभा में तीन तलाक़ बिल पास हो गया। इससे पहले ये लोकसभा से पास हो चुका था। मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने के अपने वादे को पूरा किया। अब और तलाक़ तलाक़ तलाक़ नहीं।"

  • सड़क राजमार्ग एवं जहाज मंत्री नितिन गडकरी ने ट्ववीट कर इसे महिला सशक्तीकरण की ओर बढ़ा कदम बताया।

  • एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, "ट्रिपल तलाक़ बिल को मुस्लिमों की पहचान और नागरिकता पर 2014 से किए जा रहे हमले के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। भीड़ की हिंसा, पुलिस अत्याचार और बड़े पैमाने पर जेल में बंद करना झुका नहीं पाएगा।" उन्होंने लिखा है, "मुझे उम्मीद है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसकी वैधानिकता को चुनौती देगा। क़ानून समाज में सुधार नहीं लाता। अगर ऐसा होता तो कन्या भ्रूण हत्या, बाल अत्याचार, पत्नियों को छोड़ देना और दहेज प्रथा इतिहास हो जाते।"

  • जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट किया है, "राज्य सभा में बीजेपी/एनडीए की रणनीति बहुत शानदार थी, बावजूद कि उच्च सदन में सरकार के पक्ष में पर्याप्त नंबर नहीं थे। मुझे ताज्जुब होगा अगर राज्यसभा में सरकार को एक भी क़ानून के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।"

  • तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उमर अब्दुल्लाह के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, "ये फ़्लोर मैनेजमेंट (रणनीति) नहीं बल्कि बीजेपी के अदृश्य और सबसे भरोसेमंद सहयोगी सीबीआई और ईडी का कमाल है।"

  • समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने कहा कि सरकार को उन्हीं मामलों में दंडात्मक कानून बनाना चाहिए जिससे समाज में अव्यवस्था पैदा होने का ख़तरा हो। उन्होंने कहा कि तीन तलाक की प्रथा से समाज में कोई अव्यवस्था पैदा नहीं होती। उन्होंने कहा कि देश में प्रेम विवाह के मामलों से समाज में कई अवसरों पर क़ानून व्यवस्था की स्थिति पैदा हो जाती है। उहोंने पूछा कि क्या सरकार प्रेम विवाह रोकने के लिए कोई कानून बनाएगी। उन्होंने कहा कि इस्लाम में विवाह एक करार है, विवाह में कोई जोर जबरदस्ती नहीं है। कोई भी एक पक्ष इस करार से बाहर आ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार तीन तलाक को दंडात्मक अपराध बनाने के लिए सीरिया और अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देशों का हवाला दे रही है। यह बहुत दुखद है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और उसे लोकतांत्रिक देशों की नजीर ही देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन तलाक के मामलों की संख्या के बारे में सरकार सदन को गुमराह कर रही है। एक ओर सरकार ने उनके एक प्रश्न के उत्तर में सदन में कहा कि उसके पास तलाक के मामलों की कोई संख्या उपलब्ध नहीं है दूसरी और केंद्रीय कानून मंत्री तलाक के मामलों की अलग-अलग संख्या बता रहे हैं।

  • बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य ने विधेयक का समर्थन करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि उनके दल के कई सुझावों को सरकार ने नए विधेयक में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक में भी कुछ कमियां हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। पति के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार केवल महिला को होना चाहिए। महिला के परिवार वालों को शिकायत का अधिकार दिए जाने से इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है।

  • राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसके पीछे मंशा सही नहीं है। तलाक जैसे नागरिक अनुबंध में दंडात्मक प्रावधान नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पति के जेल जाने की सूरत में महिला को गुजारा भत्ता मिलने के बारे में विधेयक में कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।

  • अन्ना द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि तीन तलाक विरोधी विधेयक देश में सामान नागरिक कानून लागू करने का पूर्व कदम है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के इलमरम करीम ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश की विभिन्नता को ख़त्म कर एकरूपता कायम करना चाहती है।

  • भाजपा के स्वप्नदास गुप्ता ने कहा कि संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में सरकार से यह अपेक्षा की गयी है कि वह सामाजिक सुधार के  सक्रिय प्रयास करेगी। इसी के अनुरूप देश में सामजिक सुधार सम्बन्धी विभिन्न कानून बनाए गए।

  • शिव सेना के संजय राउत ने कहा कि इस विधेयक से देश में मुस्लिम आबादी की आधी संख्या को आजादी मिलेगी जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि इस कानून से धर्मनिरपेक्षता कमजोर नहीं बल्कि मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विधेयक पारित होने से लेकर विधेयक के राज्य सभा तक आने की अवधि में ही तीन तलाक की अनेक घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सामान नागरिक संहिता की ओर पहला कदम है।

  • वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी ने विधेयक का विरोध करते हुये कहा कि जब तीन तलाक का अस्तित्व ही नहीं माना गया तो पति को सजा किस बात की दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि एक नागरिक अनुबंध में आपराधिक धाराएं लागू कैसे की जा सकती हैं।

  • भाजपा की सरोज पांडेय इस विधेयक से देश में महिलाओं को न्याय देने और समानता के नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने शाह बानो मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गांधी ने कट्टरपंथी मजहबी नेताओं के सामने घुटने टेक दिए थे।

  • मनोनीत नरेन्द्र जाधव ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसके प्रावधानों में अंतर्विरोध है, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।

  • द्रमुक के टीकेएस एलंगोवन ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि विधेयक को प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।

  • पीडीपी के नजीर अहमद लवाय ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं को बहुत अजीम दर्जा हासिल है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में तीन तलाक का नामोनिशान ही नहीं है। सरकार को देश की सभी महिलाओं को न्याय दिलाने का कानून बनाना चाहिए।

  • बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के मजीद मेमन ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तीन तलाक को कोई मान्यता ही नहीं है तो पति को दंड किस बात का दिया जा रहा है। मेमन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने आप में कानून है तो सरकार नया कानून क्यों बना रही है। जरूरत इस बात की है कि न्यायालय के आदेश को कारगर तरीके से अमल किया जाये।

  • मनोनीत सोनल मानसिंह ने सदन में अपने पहले सम्बोधन में कहा कि देश की महिलाओं को धर्म के आधार पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को न्याय देने के लिए व्यवस्था में होना चाहिए। बदलाब का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।

  • पीडीपी के मीर मुहम्मद फयाज ने जम्मू कश्मीर में हालात के कारण सैकड़ों विधवा महिलाओं और उनके बच्चों की स्थिति की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने जम्मू कश्मीर में 35 ए को हटाने के प्रयास का जोरदार विरोध किया।

  • भाजपा के राकेश सिन्हा ने विधेयक पर कम्युनिस्ट सदस्यों द्वारा विरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि शाह बानो प्रकरण में कम्युनिस्ट पार्टियों ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुस्लिम महिला विरोधी कदम का विरोध किया था। इसी अवसर पर कांग्रेस के आरिफ मुहम्मद खान ने अपनी ही सरकार का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के सामने यह मौका है कि वह शाह बनो प्रकरण में हुई गलती को सुधारे।


तीन तलाक से जुड़ी अहम बातें - 

  • लोकसभा में भी इस बिल पर मतदान के दौरान जेडीयू के सांसदों ने वॉक आउट किया था।

  • लोकसभा में 25 जुलाई को विपक्ष के भारी विरोध के बीच तीन तलाक बिल पास हो गया था।

  • बिल पर वोटिंग से पहले लोकसभा से जेडीयू, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और टीएमसी ने वॉकआउट कर दिया था। 

  • जेडीयू, टीएमसी वोट से अलग रहीं, वहीं, बीजेडी ने बिल के पक्ष में वोट किया था। टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस बिल के खिलाफ हैं।

  • तुरंत तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को रद्द और गैर कानूनी बनाना।

  • तुरंत तीन तलाक को संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है।

  • तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

  • मजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत दे सकता है। जमानत तभी दी जाएगी, जब पीड़ित महिला का पक्ष सुना जाएगा।

  • पीड़ित महिला के अनुरोध पर मजिस्ट्रेट समझौते की अनुमति दे सकता है।

  • पीड़ित महिला पति से गुज़ारा भत्ते का दावा कर सकती है।

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