भारत में खेलों का राजा है क्रिकेट

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)। जैसे भारत में फलों का राजा आम को माना जाता है, ठीक वैसे ही खेलों के राजा क्रिकेट को कहा जाता है। आइए जानते हैं क्रिकेट के इतिहास के बारे में। आप क्रिकेट खेल के बारे में तो जानते ही होंगे या फिर आपने यह खेल बचपन में खेला होगा। यह खेल वेसे तो लगभग पूरी दुनिया मे खेला जाता है लेकिन साउथ एशिया में यह चरम सीमा तक लोकप्रिय है। क्रिकेट भारत का एक लोकप्रिय खेल है। फुटबाल खेल के बाद सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल क्रिकेट को माना जाता है।

क्रिकेट का इतिहास

क्रिकेट का इतिहास भी रोचकता से भरा हुआ है। 16 वीं सदी में यह खेल अस्तित्व में आया था। तब इस खेल को क्रेक्केट कहा जाता था। यह खेल शुरुआत में ऊन के गोलों को गेंद बनाकर और लकड़ी के डंडे को बेट बनाकर खेला जाता था। इस खेल का जन्मस्थान ग्रेट ब्रिटेन को माना जाता है। अंग्रेज लोग क्रिकेट को शौकिया तौर पर खेला करते थे। इस खेल के लोकप्रिय होने के पीछे ग्रेट ब्रिटेन के औपनिवेशिक देशों को माना जाता है। ब्रिटेन की सरकार का दुनिया के जिस भी देश पर शासन रहा, वहां पर यह खेल ज्यादा लोकप्रिय हुआ।

ब्रिटेन के बाहर यह खेल उत्तरी अमेरिका, वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया, भारत में बहुत जल्द प्रसिद्ध हो गया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संस्था का गठन किया गया जिसका नाम “इम्पीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस” रखा गया था। 1981 में इस क्रिकेट संस्था का नाम बदलकर “इंटरनेशनल क्रिकेट कॉउन्सिल” (आईसीसी) रखा गया। विश्व क्रिकेट इसी संस्था के तत्वावधान में खेला जाता है। पहला अंतराष्ट्रीय मैच 1844 में कनाडा और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच खेला गया था। क्रिकेट खेले जाने का लिखित उल्लेख 18 वीं सदी का है। ब्रिटिश उपनिवेश वर्जिनिया में क्रिकेट मैच खेला गया था।

अंतराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत वर्ष 1877 में हुई थी। वर्तमान में अंतराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेलने वाली टीमें – भारत, अस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान, श्रीलंका, दक्षिणी अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड, बांग्लादेश, आयरलैंड, अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे है। विश्व क्रिकेट का पहला वनडे विश्वकप 1975 में खेला गया था, जिसकी विजेता वेस्टइंडीज टीम थी।1979 में भी यह ट्रॉफी वेस्टइंडीज ने ही जीती थी। 1983 में वर्ल्डकप को भारत ने अपने नाम किया था। 1987 में ऑस्ट्रेलिया और 1992 में पाकिस्तान टीम ने विश्वकप जीता था। 1996 में श्रीलंका ने वर्ल्डकप जीतकर सबको चकित कर दिया था। 1999, 2003 और 2007 का विश्वकप ऑस्ट्रेलिया ने जीता था। 2011 में भारत ने धोनी की अगुवाई में विश्वकप का खिताब अपने नाम किया। वर्ष 2015 में ऑस्ट्रेलिया ने पांचवी बार विश्वकप जीता था।

भारत में क्रिकेट का इतिहास

भारत मे भी क्रिकेट का खेल अंग्रेज लाये थे। भारत भी अंग्रेजों के शासन के अधीन था। 1721 में ईस्ट इंडिया कम्पनी के नाविकों के द्वारा बड़ौदा के पास क्रिकेट खेला गया था। धीरे धीरे यह खेल पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में क्रिकेट के इतना ज्यादा लोकप्रिय होने की वजह भी ब्रिटेन का शासन था। भारत में क्रिकेट क्लब की भी शुरुआत हुई और बहुत जल्द प्रथम श्रेणी का टेस्ट मैच 1864 में चेन्नई में खेला गया। आपको शायद पता नहीं होगा कि भारत के पहले क्रिकेटर का नाम क्या था? आपने रणजी ट्रॉफी के बारे में तो सुना ही होगा जो हर साल खेली जाती है। रणजी ट्रॉफी जिस शख्श के नाम पर खेली जाती है, उनका नाम रणजीत सिंह था। रणजीत सिंह भारत के पहले क्रिकेटर थे। रणजीत सिंह ने अपना पहला मैच इंग्लैंड की तरफ से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1896 में खेला था। बतौर टीम भारत ने अपना पहला मैच सी. के. नायडू जी की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। यह मैच भारत हार गया था। भारत को पहली जीत आजादी के बाद 1952 में इंग्लैंड के खिलाफ हासिल हुई थी। धीरे धीरे क्रिकेट भारत में लोकप्रिय होता गया। सुनील गावस्कर, कपिल देव जैसे महान क्रिकेटर हुए जिन्होंने भारत को जीत का स्वाद चखाना शुरू किया।

साल 1983 में भारत ने लगातार 2 बार की विश्व विजेता वेस्टइंडीज को हराकर वर्ल्डकप अपने नाम किया। इस बड़ी जीत के बाद तो भारत मे क्रिकेट का सैलाब आ गया। क्रिकेट भारत में हर जगह लोकप्रिय हो गया। गली मोहल्लों तक में क्रिकेट खेला जाने लगा। भारत मे क्रिकेट बीसीसीआई के तत्वावधान में खेला जाता है। क्रिकेट को लोकप्रियता के चरम पर पहुंचाने का श्रेय क्रिकेट के भगवान को जाता है। क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का भारतीय क्रिकेट में आगमन विश्व क्रिकेट में एक नया अध्याय था। सचिन तेंदुलकर के साथ ही राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे महान क्रिकेटर हुए जिन्होंने भारत की क्रिकेट टीम को बुलन्दी पर पहुंचाया। भारत ने 2011 का विश्वकप भी अपने नाम किया। भारत की सरजमीं पर हुए इस वर्ल्डकप को जीतने का श्रेय भारतीय टीम के तत्कालीन महान कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को जाता है। धौनी भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान साबित हुए। वर्तमान में विराट कोहली भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान है। भारत ने दो बार विश्वकप जितने के अलावा एक बार टी 20 का विश्वकप, आई सी सी चैम्पियन्स ट्रॉफी भी जीती है। भारत में घरेलू क्रिकेट भी बहुत ज्यादा खेला जाता है। दिलीप ट्रॉफी, रणजी ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी जैसे प्रमुख टूर्नामेंट भारतीय घरेलू क्रिकेट में खेले जाते है। घरेलू मैचों को प्रथम श्रेणी के मैच भी कहते है। विश्व क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की बात करें तो इनमें डॉन ब्रेडमैन का नाम सबसे ऊपर आता है। ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रेडमैन एक महान खिलाड़ी थे। इनके अलावा विव रिचर्ड, सचीन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, शेन वॉर्न, मुथैया मुरलीधरन, वसीम अकरम, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, एलन बॉर्डर जैसे महान खिलाड़ियों ने भी क्रिकेट का गौरव बढ़ाया।

क्रिकेट से जुड़ी रोचक बातें

पहले क्रिकेट के एक ओवर में 4 गेंदे हुआ करती थी। बाद में इसको 5 गेंद और फिर 8 गेंद किया गया था। एक ओवर में 6 गेंद का नियम सन् 1947 में लागू किया गया था। क्रिकेट में काफी सारे नियम होते हैं। क्रिकेट के तीन फॉर्मेट टेस्ट, वनडे, टी 20 होते है। वर्ष 1975 में पहला विश्व कप क्रिकेट इंग्लैंड में खेला गया था। सात जून से 21 जुलाई तक खेली गई इस प्रतियोगिता में आठ टीमों ने हिस्सा लिया था। आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुपों में रखा गया था। हर ग्रुप की शीर्ष दो टीमों को सीधे सेमी फ़ाइनल में प्रवेश दिया गया था। उस समय 60 ओवर का एक मैच होता था। उस समय खिलाड़ी क्रिकेट की पारंपरिक पोशाक यानी उजले कपड़े पहनते थे। सभी मैच दिन में ही होते थे। मैच कुल 120 ओवर का होता था। इसलिए मैच जल्दी ही शुरू हो जाते थे।

पहले ग्रुप में इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, भारत और ईस्ट अफ़्रीका की टीमें थीं, तो दूसरे ग्रुप में थे- वेस्टइंडीज़, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और श्रीलंका। इसी विश्व कप के एक मैच में भारत के महान सुनील गावस्कर ने पूरे 60 ओवर बल्लेबाज़ी की और सिर्फ़ 36 रन बनाए। अपनी पारी में उन्होंने सिर्फ़ एक चौका लगाया था। मैच था इंग्लैंड के ख़िलाफ़। इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के मैदान पर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 60 ओवर में चार विकेट पर 334 रन बनाए थे। डेनिस एमिस ने 137 रनों की पारी खेली थी। लेकिन जवाब में भारत ने 60 ओवर में तीन विकेट पर 132 रन बनाए। गावस्कर ने 174 गेंद का सामना किया और एक चौके की मदद से सिर्फ़ 36 रन बनाए और नाबाद रहे। उसी मैच में सिर्फ़ 59 गेंद का सामना करते हुए गुंडप्पा विश्वनाथ ने सर्वाधिक 37 रन बनाए थे। कहा जाता है कि वनडे क्रिकेट का विरोध करने के लिए गावस्कर ने ऐसी धीमी पारी खेली थी। इस विश्व कप में भारत के कप्तान थे श्रीनिवास वेंकटराघवन। हालांकि ईस्ट अफ़्रीका के ख़िलाफ़ मैच में भारत ने 10 विकेट से जीत हासिल की। और इस मैच में सुनील गावस्कर ने 86 गेंद पर नाबाद 65 रनों की पारी खेली और पारी में नौ चौके भी लगाए। भारत इस विश्व कप में सिर्फ़ एक मैच जीत पाया, वो भी ईस्ट अफ़्रीका के ख़िलाफ़। पहले ग्रुप से इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड की टीमें सेमी फ़ाइनल में पहुँचीं, तो दूसरे ग्रुप से मौक़ा मिला वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया को। पहला सेमी फ़ाइनल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ। जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने चार विकेट से जीत दर्ज की। कम स्कोर वाले इस मैच में पहले खेलते हुए इंग्लैंड की टीम सिर्फ़ 93 रन बनाकर आउट हो गई। जबाव में ऑस्ट्रेलिया ने लक्ष्य हासिल करने के लिए छह विकेट गँवा दिए। दूसरे सेमीफ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ की टीम का मुक़ाबला था न्यूज़ीलैंड से। वेस्टइंडीज़ की टीम को विश्व कप का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था और उसने निराश भी नहीं किया। वेस्टइंडीज़ ने पाँच विकेट से जीत हासिल की। पहले खेलते हुए न्यूज़ीलैंड ने 158 रन बनाए। वेस्टइंडीज़ ने पाँच विकेट गँवाकर की लक्ष्य हासिल कर लिया। कालीचरण ने 72 और ग्रीनिज़ ने 55 रनों की शानदार पारी खेली।

फ़ाइनल में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर वेस्टइंडीज़ का मुक़ाबला हुआ ऑस्ट्रेलिया से। मैच काफ़ी रोमांचक था और इस ऐतिहासिक मैच में पहला विश्व कप जीतने का गौरव हासिल किया वेस्टइंडीज़ ने। कप्तान क्लाइव लॉयड की अगुआई में टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया और 17 रनों से जीत हासिल की। वेस्टइंडीज़ ने क्लाइव लॉयड के शानदार शतक (102) और रोहन कन्हाई के 55 रनों की मदद से 60 ओवर में आठ विकेट पर 291 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने अच्छी चुनौती दी। लेकिन उनकी टीम 58.4 ओवर में 274 रन बनाकर आउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया के पाँच बल्लेबाज़ रन आउट हुए।

क्रिकेट के नियम और गेमप्ले

पिच -

मुख्य आकर्षण मैदान के विशेष रूप से तैयार किए गए क्षेत्र में होता है (आमतौर पर केन्द्र में) जो "पिच" कहलाता है। पिच के दोनों और 22 गज़ (20 मी॰) विकेट लगाए जाते हैं। ये गेंदबाजी उर्फ क्षेत्ररक्षण पक्ष के लिए लक्ष्य होते हैं और बल्लेबाजी पक्ष के द्वारा इनका बचाव किया जाता है जो रन बनाने की कोशिश में होते हैं। मूलतः एक रन तब बनता है जब एक बल्लेबाज गेंद को अपने बल्ले से मारने के बाद पिच के बीच भागता है, हालाँकि नीचे बताये गए विवरण के अनुसार रन बनाने के कई और तरीके हैं। यदि बल्लेबाज और रन बनाने का प्रयास नहीं करता है तो गेंद "डेड" हो जाती है और गेंदबाज के पास वापिस गेंदबाजी के लिए आ जाती है। गेंदबाजी पक्ष विभिन्न तरीकों से बल्लेबाजों को आउट करने की कोशिश करता है, जब तक बल्लेबाजी पक्ष "आल आउट" न हो जाए। इसके बाद गेंदबाजी वाला पक्ष बल्लेबाजी करता है और बल्लेबाजी वाला पक्ष गेंदबाजी के लिए "मैदान" में आ जाता है।


बल्ला और गेंद -

इस खेल का सार है कि एक गेंदबाज अपनी ओर की पिच से बल्लेबाज की तरफ़ गेंद डालता है जो दूसरे अंत पर बल्ला लेकर उसे "स्ट्राइक" करने के लिए तैयार रहता है। बल्ला लकड़ी से बना होता है इसका आकर ब्लेड के जैसा होता है और शीर्ष पर बेलनाकार हेंडल होता है। ब्लेड की चौडाई से अधिक नहीं होनी चाहिए और बल्ले की कुल लम्बाई से अधिक नहीं होनी चाहिए। गेंद एक सख्त चमड़े का गोला होती है जिसकी परिधि गेंद की कठोरता जिसे से अधिक गति से फेंका जा सकता है, वो एक विचारणीय मुद्दा है और बल्लेबाज सुरक्षात्मक कपड़े पहनता है जिसमें शामिल है पेड (जो घुटनों और पाँव के आगे वाले भाग की रक्षा के लिए पहने जाते हैं), बल्लेबाजी के दस्ताने हाथों के लिए, हेलमेट सर के लिए और एक बॉक्स जो पतलून के अन्दर पहना जाता है और क्रोच क्षेत्र को सुरक्षित करता है।


अंपायर -

मैदान पर खेल को दो अंपायर नियंत्रित करते हैं, उनमें से एक विकेट के पीछे गेंदबाज की तरफ़ खड़ा रहता है और दूसरा "स्क्वेयर लेग" की स्थिति में जो स्ट्राइकिंग बल्लेबाज से कुछ गज पीछे होता है। जब गेंदबाज गेंद डालता है तो विकेट वाला अम्पायर गेंदबाज और नॉन स्ट्राइकर के बीच रहता है। यदि खेल की स्थिति पर कुछ संदेह होता है तो अम्पायर परामर्श करता है और यदि आवश्यक होता है तो वो खिलाड़ियों को फ़ील्ड से बहार ले जाकर मैच को स्थगित कर सकता है, जैसे बारिश होने पर या रोशनी कम होने पर। मैदान से बहार और टी वी पर प्रसारित होने वाले मैचों में अक्सर एक तीसरा अंपायर होता है जो विडियो साक्ष्य की सहायता से विशेष स्थितियों में फ़ैसला ले सकता है।


पारियां -

पारी (हमेशा बहुवचन रूप में प्रयुक्त होती है) बल्लेबाजी पक्ष के सामूहिक प्रदर्शन के लिए एक शब्द है। [10] सिद्धांत के तौर में, बल्लेबाजी पक्ष के सभी ग्यारह सदस्य बारी बारी से बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन कई कारणों से "पारी" इससे पहले भी ख़त्म हो सकती है (नीचे देखें)। खेले जा रहे मैच के प्रकार के अनुसार हर टीम की एक या दो परियां होती हैं। "पारी" शब्द का उपयोग कभी कभी एक बल्लेबाज के व्यक्तिगत योगदान को बताने के लिए भी किया जाता है। ("जैसे उसने एक अच्छी पारी खेली" आदि।)


ओवर -

ओवर या षटक ६ गेंदों का समुच्चय या समूह होता है। यह शब्द इस तरह से आया है क्योंकि अंपायर कहता है "ओवर" यानि पूरा। जब ६ गेंदें डाली जा चुकी होती हैं, तब दूसरा गेंदबाज दूसरे छोर पर आ जाता है और क्षेत्ररक्षक भी अपना स्थान बदल लेते हैं। एक गेंदबाज लगातार दो ओवर नहीं डाल सकता है, हालांकि एक गेंदबाज छोर को बिना बदले उसी छोर से कई ओवर डाल सकता है। बल्लेबाज साइड या छोर को बदल नहीं सकते हैं, इसलिए जो नॉन स्ट्राइकर था वह स्ट्राइकर बन जाता है और स्ट्राइकर अब नॉन स्ट्राइकर बन जाता है। अंपायर भी अपनी स्थिति को बदलते हैं ताकि जो अंपायर स्क्वेयर लेग की स्थिति में था वह विकेट के पीछे चला जाता है और इसका विपरीत भी होता है।


गेंदबाजी

गेंदबाज अक्सर दौड़ कर गेंद डालने के लिए आते हैं, हालाँकि कुछ गेंदबाज एक या दो कदम ही दौड़ कर आते हैं और गेंद डाल देते हैं। एक तेज गेंदबाज को संवेग की जरुरत होती है जिसके कारण वह तेजी से और दूरी से दौड़ कर आता है। तेज गेंदबाज बहुत तेजी से गेंद को डाल सकता है और कभी कभी वह बल्लेबाज को आउट करने के लिए बहुत ही तेज गति की गेंद डालता है जिससे बल्लेबाज पर तीव्रता से प्रतिक्रिया करने का दबाव बन जाता है। अन्य तेज गेंदबाज गति के साथ साथ किस्मत पर भी भरोसा करते हैं। कई तेज गेंदबाज गेंद को इस तरह से डालते हैं कि वह हवा में "झूलती हुई" या "घूमती हुई" आती है।


बल्लेबाजी -

किसी भी एक समय पर, मैदान में दो बल्लेबाज होते हैं। एक स्ट्राइकर छोर पर रह कर विकेट की रक्षा करता है और संभव हो तो रन बनाता है। उसका साथी, जो नॉन स्ट्राइकर होता है वो उस छोर पर होता है जहाँ से गेंदबाजी की जाती है।


रन -

स्ट्राइकर बल्लेबाज की प्राथमिकता होती है गेंद को विकेट पर टकराने से रोकना और दूसरी प्राथमिकता होती है बल्ले से गेंद को हिट कर के रन बनाना ताकि इससे पहले कि क्षेत्ररक्षण पक्ष की ओर से गेंद वापस आए, उसे और उसके सहयोगी को रन बनाने का समय मिल जाए। एक रन रजिस्टर करने के लिए, दोनों धावकों को अपने बल्ले से या शरीर के किसी भाग से क्रीज के पीछे की भूमि को छुना होता है। (बल्लेबाज दोड़ते समय बल्ला लिए होते हैं) प्रत्येक रन स्कोर में जुड़ जाता है।


क्रिकेट में क्या होता है अतिरिक्त

फील्डिंग पक्ष की और से की गई त्रुटियों के कारण बल्लेबाजी पक्ष को जो रन प्राप्त होते हैं वे अतिरिक्त कहलाते हैं। (ऑस्ट्रेलिया में "सनड्रिज" कहलाते हैं)। यह चार प्रकार से प्राप्त किये जा सकते हैं :

नो बॉल - नो बॉल एक ऐसी अतिरिक्त बॉल होती है जो गेंदबाज के द्वारा किसी नियम का उल्लंघन करने पर दंड के रूप में डाली जाती है। (1) अनुपयुक्त भुजा एक्शन के कारण, (2) पोप्पिंग क्रिज पर ओवर स्टेप्पिंग के कारण, (3) यदि उसका पैर रिटर्न क्रिज के बाहर हो, इसके लिए गेंदबाज को फ़िर से गेंद डालनी होती है। वर्तमान नियमों के अनुसार खेल के ट्वेंटी 20 और ओडीआई प्रारूपों में फ़िर से डाली गई गेंद फ्री हिट होती है, अर्थात इस गेंद पर बल्लेबाज रन आउट के अलावा किसी और प्रकार से आउट नहीं हो सकता है।

वाइड – दंड के रूप में दी गई एक अतिरिक्त गेंद होती है जो तब दी जाती है जब गेंदबाज ऐसी गेंद डालता है जो बल्लेबाज की पहुँच से बाहर हो। बाई वाइड बल्लेबाज को मिलने वाला अतिरिक्त रन है जब बल्लेबाज गेंद को मिस कर देता है और यह पीछे विकेट कीपर के पास से होकर निकल जाती है जिससे बल्लेबाज को परंपरागत तरीके से रन लेने का समय मिल जाता है (ध्यान दें कि एक अच्छे विकेट कीपर की निशानी है कि वह कम से कम बाईज दे। लेग बाई, अतिरिक्त दिया जाने वाला रन, जब गेंद बल्लेबाज के शरीर को हिट करती है लेकिन बल्ले को नहीं और यह क्षेत्ररक्षकों (फील्डरों) से दूर जाकर बल्लेबाज को परंपरागत तरीके से रन लेने का समय भी देती है।


व़िकेट पतन या आऊट होने के नियम

एक बल्लेबाज दस तरीके से आउट हो सकता है और कुछ तरीके इतने असामान्य हैं कि खेल के पूरे इतिहास में इसके बहुत कम उदाहरण मिलते हैं। आउट होने के सबसे सामान्य प्रकार हैं "बोल्ड", "केच", "एल बी डबल्यू", "रन आउट", "स्टंपड" और "हिट विकेट".असामान्य तरीके हैं "गेंद का दो बार हिट करना", "मैदान को बाधित करना", "गेंद को हेंडल करना" और "समय समाप्त"।

इससे पहले कि अंपायर बल्लेबाज के आउट होने की घोषणा करें सामान्यत: क्षेत्ररक्षण पक्ष का कोई सदस्य (आमतौर पर गेंदबाज) "अपील" करता है। यह "हाउज़ देट?" बोल कर या चिल्ला कर किया जाता है। इसका मतलब है "हाउ इस देट?" यदि अंपायर अपील से सहमत हैं, तो वह तर्जनी अंगुली उठा कर कहता है "आउट!" अन्यथा वह सिर हिला कर कहता है "नॉट आउट".अपील उस समय तेज आवाज में की जाती है जब आउट होने की परिस्थिति स्पष्ट न हो। यह एल बी डबल्यू की स्थिति में हमेशा होता है और अक्सर रन आउट और स्टंप की स्थिति में होता है।


बोल्ड - यदि गेंदबाज गेंद से विकेट पर हिट करता है जिससे की कम से कम एक विकेट गिर जाए और बेल अपने स्थान से हट जाए (ध्यान दें की यदि गेंद विकेट पर लगती है पर बेल अपने स्थान से नहीं हटती है तो वो नॉट आउट होता है।)

केच - यदि बल्लेबाज ने बल्ले से या हाथ से गेंद को हिट किया और इसे क्षेत्र रक्षण टीम के किसी सदस्य ने केच कर लिया हो।

लेग बिफोर विकेट (एल बी डब्ल्यू) - यह जटिल है लेकिन इसका मूल अर्थ यह होता है कि यदि गेंद ने पहले बल्लेबाज की टांग को न छुआ होता तो वो आउट हो जाता

रन आउट – क्षेत्ररक्षण पक्ष के एक सदस्य ने गेंद से विकेट को तोड़ दिया या गिरा दिया जब बल्लेबाज अपनी क्रीज़ पर नहीं था; यह सामान्यत: तब होता है जब बल्लेबाज रन लेने की कोशिश कर रहा होता है और सटीक थ्रो के द्वारा गेंद से विकेट तोड़ दिया जाता है।

स्टंपड – यह उसी के समान है है लेकिन इसमें विकेट को विकेट कीपर तोड़ता है जब बल्लेबाज गेंद को मिस कर के रन लेने के लिए अपनी क्रीज़ से बाहर चला जाता है; कीपर को गेंद को हाथ में लेकर विकेट को तोड़ना होता है। (यदि कीपर गेंद को विकेट पर फेंकता है तो यह रन आउट होता है।)

हिट विकेट - बल्लेबाज हिट विकेट से आउट हो जाता है जब बल्लेबाज गेंद को हिट करते समय या रन लेने की कोशिश करते समय अपने बल्ले, कपड़े, या किसी अन्य उपकरण से एक या दोनों बेलों को गिरा देता है।

दो बार गेंद को मारना – यह बहुत ही असामान्य है और यह खेल के जोखिम को ध्यान में रखते हुए और क्षेत्ररक्षकों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया है। बल्लेबाज कानूनी रूप से एक बार गेंद को खेल लेने के बाद सिर्फ इसे विकेट पर टकराने से रोकने के लिए दुबारा हिट कर सकता है।

क्षेत्र बाधित - एक और असामान्य बर्खास्तगी जिसमें एक बल्लेबाज जानबूझकर एक क्षेत्ररक्षक के रास्ते में आ जाए।

गेंद को पकड़ना - एक बल्लेबाज जानबूझकर अपने विकेट को सुरक्षित करने के लिए हाथ का प्रयोग नहीं कर सकता है। (ध्यान दें कि अक्सर गेंद बल्लेबाज के हाथ को छूती है लेकिन यदि यह जान बूझ कर नहीं किया गया है तो नॉट आउट होता है; हालाँकि वह इसे अपने हाथ में पकड़ सकता है)।

टाइम आउट - यदि एक बल्लेबाज के आउट हो जाने के दो मिनट के अन्दर अगला बल्लेबाज मैदान पर न आए।

अधिकांश मामलों में स्ट्राइकर ही आउट होता है। यदि गैर स्ट्राइकर आउट है तो वह रन आउट होता है, लेकिन वह मैदान को बाधित कर के, बॉल को पकड़ कर या समय समाप्त होने पर भी आउट हो सकता है। एक बल्लेबाज बिना आउट हुए भी मैदान को छोड़ सकता है। अगर उसे चोट लग जाए या वह घायल हो जाए तो वह अस्थायी रूप से जा सकता है, उसे अगले बल्लेबाज के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाता है। इसे रिटायर्ड हर्ट या रिटायर्ड बीमार के रूप में दर्ज किया जाता है। रिटायर्ड बल्लेबाज नॉट आउट होता है और बाद में फ़िर से आ सकता है। एक अछूता बल्लेबाज, रिटायर हो सकता है उसे रिटायर आउट कहा जाता है; जिसका श्रेय किसी भी खिलाड़ी को नहीं जाता है। बल्लेबाज नो बॉल पर बोल्ड, केच, लेग बिफोर विकेट, स्टंप्ड या हिट विकेट आउट नहीं हो सकता है। वो वाइड बॉलपर बोल्ड, केच, लेग बिफोर विकेट, या बॉल को दो बार हिट करने पर आउट हो सकता है। इनमें से कुछ प्रकार के आउट गेंदबाज के द्वारा बिना गेंद डाले ही हो सकते हैं। नॉन-स्ट्राइकर बल्लेबाज भी रन आउट हो सकता है यदि वह गेंदबाज के द्वारा गेंद डालने से पहले क्रीज को छोड़ दे और एक बल्लेबाज क्षेत्ररक्षण बाधित करने पर या रिटायर आउट होने पर किसी भी समय आउट हो सकता है। समय समाप्त , बिना डिलीवरी के होने वाली बर्खास्तगी है। आउट होने के किसी भी तरीके में, केवल एक ही बल्लेबाज एक गेंद पर आउट हो सकता है।

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